नई दिल्ली. देश में बैंक घोटालों की बाढ़ सी आई हुई है. पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के बाद लगातार कई बैंक घोटाले सामने आए और खास बात यह रही कि इन घोटालों के मास्टरमाइंड बड़ी ही आसानी से देश छोड़कर अन्य देशों में जा बसे हैं. एक अन्य बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने एक कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. यह घोटाला 5,000 करोड़ का बताया जा रहा है. प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में गुजरात के संदेसरा ग्रुप की एक फार्मा कंपनी 'स्टर्लिंग बायोटेक' के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.

इस मामले में ईडी ने आंध्रा बैंक के पूर्व निदेशक अनूप प्रकाश गर्ग को पिछले हफ्ते शनिवार को गिरफ्तार किया था. अनूप प्रकाश को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था. कोर्ट ने प्रकाश को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था. इस मामले में यह दूसरी गिरफ्तारी थी. इससे पहले पिछले साल नवंबर में दिल्ली के एक बिजनेसमैन गगन धवन को गिरफ्तार किया गया था.

डायरी से हुआ खुलासा

प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि इस घोटाले का खुलासा उस समय हुआ जब आयकर विभाग ने संदेसरा ब्रॉदर्स के यहां एक छापेमारी के दौरान एक डायरी बरामद की थी. इस डायरी में 2008-2009 के दौरान बैंक अधिकारी को 1.52 करोड़ के भुगतान की एंट्री थीं. ईडी ने बताया कि डायरी में बैंक अधिकारी को कई बार भुगतान दिए जाने के बारे में पता चला था. बैंक अधिकारी को यह भुगतान संदेसरा ग्रुप की बेनामी कंपनियों के बैंक खातों से पैसा निकालने के एवज में किया गया था.

4700 करोड़ की संपत्ति जब्त

संदेसरा ग्रुप के मालिक चेतन संदेसरा और नितिन संदेसरा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला पिछले साल अक्टूबर में दर्ज किया गया था. हालांकि इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशाल संदेसरा ग्रुप की 4700 करोड़ की संपत्तियों को सीज कर चुका है. यह कार्रवाई मई के आखिरी में की गई थी. ईडी ने गुजरात के वडोदरा, अहमदाबाद और मुंबई में छापेमारी करके इन संपत्तियों की सीज किया था. ईडी ने आरोप लगाया कि इस ग्रुप ने आंध्रा बैंक के अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और यूको बैंक से भी फर्जी तरीके से लोन लिया था. लोन के इस पैसे से इस ग्रुप ने देश के कई इलाकों में बड़े बंगले, फ्लैट और प्लॉट खरीदे थे. छापेमारी के दौरान 200 से ज्यादा बैंक खातों के चेक बुक भी जब्त की गईं.

ये हैं कंपनियां

गुजरात के संदेसरा ग्रुप ने स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड, स्टर्लिंग पोर्ट लिमिटेड, पीएमटी मशीन लिमिटेड, स्टर्लिंग एसईजेड और इन्फ्रास्टक्चर लिमिटेड एवं स्टर्लिंग ऑयल रिसोर्सेस लिमिटेड समेत कई फर्जी कंपनियां बनाई हुई थीं. इन कंपनियों के खातों में बैंकों से 5000 करोड़ से अधिक का लोन लिया गया था. और इसी लोन के एवज में बैंक अधिकारियों को भुगतान किया जाता था.

कांग्रेसी नेता से करीबी संबंध

ईडी द्वारा तहकीकात करने पर पता चला है कि संदेसरा ग्रुप के मालिकों के कांग्रेस के एक कद्दावर नेता से करीबी संबंध थे और ये लोग इस नेता के दामाद को भी समय-समय पर भुगतान किया करते थे.

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