इनदिनों. पीएम नरेन्द्रभाई मोदी की सोच है- एक देश, एक चुनाव! लेकिन कैसे? वैसे तो इसकी चाबी केन्द्रीय भाजपा के पास है, क्योंकि अधिकतर राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सरकारे हैं, लेकिन ज्यादातर सियासी दल अपने राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से इसे देख रहे हैं!

यदि भाजपा इसके समर्थन में है तो इसलिए कि उसे पता है कि दोनों चुनाव एकसाथ लडऩे की क्षमता इस वक्त भाजपा के अलावा किसी भी अन्य दल के पास नहीं है? तो गैरभाजपाई सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस शर्त के साथ इसका समर्थन कर रहे हैं कि लोकसभा चुनाव के साथ यूपी विधानसभा के चुनाव भी हों, कारण? उन्हें यूपी में भाजपा को मात देने का फार्मूला मिल गया है और विधानसभा चुनाव बहुत दूर हैं!

क्या लोकसभा चुनाव समय से पहले इसी साल होंगे? यह सवाल है भाजपा के लिए? और समस्या है गैरभाजपाई दलों के लिए?

यदि जवाब हां है तो...

* केन्द्रीय भाजपा इसके लिए इसलिए तैयार हो सकती है कि इससे गैरभाजपाई दलों को संभलने का मौका नहीं मिलेगा?

* गैरभाजपाई दलों की एकता का ढांचा अभी तैयार नहीं हुआ है, लिहाजा सीटों के बंटवारे में विपक्ष उलझ जाएगा?

* इसी साल राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं, यदि इनके नतीजे भाजपा के खिलाफ रहे तो इसकी कीमत आम चुनाव 2019 में केन्द्र की भाजपा सरकार को चुकानी पड़ेगी?

* भाजपा के अलावा किसी और दल में अभी इतनी क्षमता नहीं है कि वह एकसाथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ सके?

* भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह विभिन्न राज्यों का दौरा करके यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि वास्तविक स्थिति क्या है? क्या संभावनाएं है? यदि हालात भाजपा के पक्ष में नजर आए तो समयपूर्व लोकसभा चुनाव संभव हैं!

तब चुनाव सही समय पर होंगे, यदि...

* केन्द्रीय भाजपा को लगा कि चुनाव कराने का यह सही समय नहीं है?

* एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकारें बन सकती हैं?

* यदि केन्द्रीय भाजपा को एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में खतरा नजर आया तो राष्ट्रपति शासन जैसे किसी तरीके से इन राज्यों के चुनाव आगे बढ़ाए जा सकते हैं जो लोकसभा चुनाव के साथ संपन्न हो सकें?

* कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच- देश हमारा, प्रदेश आपका! फार्मूले के आधार पर समझौता हो जाता है तो एक साथ चुनाव केन्द्रीय भाजपा के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि तब गैरभाजपाई दलों में विवाद की गुंजाईश कम हो जाएगी?

पीएम नरेन्द्रभाई मोदी सरकार का कार्यकाल अब तकरीबन दस महीने ही बचा है तो भाजपा शासित तीन बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव इस साल के अंत में हैं, ऐसी स्थिति में क्या यह संभव है कि पीएम मोदी अपनी सोच- एक देश, एक चुनाव! को साकार करने के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करवाएं?

दरअसल, जहां भाजपा की प्रादेशिक सरकारें हैं वहां से तो पीएम मोदी की सोच को प्रायोगिक समर्थन मिल सकता है और 2019 के आम चुनावों के साथ विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं, लेकिन आम चुनाव से पहले जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनका क्या? दो रास्ते हैं...

पहला... इन राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगा कर आम चुनाव 2019 के साथ विधानसभा चुनाव करवाए जाएं!

दूसरा... इसी साल इन तीन राज्यों के साथ ही लोकसभा चुनाव करवा लिए जाएं!

सियासी संकेत यही हैं कि केन्द्रीय भाजपा राजनीतिक हालातों का मूल्यांकन कर रही है और जैसा फायदा नजर आएगा, वैसा फैसला हो जाएगा?

एक देश-एक चुनाव! पर सभी दल राजनीतिक चतुराई दिखा रहे हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि चुनावी नतीजे राजनेताओं की चतुराई पर नहीं, जनता की चाहत पर निर्भर हैं? 

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