बुधवार, 18 जुलाई 2018 

शक सम्वत 1940 विलम्बी

विक्रम सम्वत 2075

काली सम्वत 5120

दिन काल 13:45:28

मास  आषाढ

तिथि षष्ठी - 14:37:57 तक

नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी - 08:19:49 तक

करण तैतिल - 14:37:57 तक, गर - 26:02:21 तक

पक्ष शुक्ल

योग परिघ - 11:33:20 तक

सूर्योदय 05:34:27

सूर्यास्त 19:19:55

चन्द्र राशि कन्या

चन्द्रोदय 11:01:00

चन्द्रास्त 23:26:59

ऋतु वर्षा

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: दक्षिण-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 08:20 तक

चन्द्र वास: दक्षिण में

देवी कात्यायनी

* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.

* देवी दुर्गा का छठा स्वरूप कात्यायनी है.

* देवी कात्यायनी, सिंह पर सवार हैं.

* देवी कात्यायनी एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए हैं, शेष दो हाथ- वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं. 

* जिन व्यक्तियों ने जाने/अनजाने बुजुर्गों और गुरु का अपमान किया हो उन्हें देवी कात्यायनी से सच्चे दिल से क्षमा मांगनी चाहिए और पूजा-अर्चना करके प्रायश्चित व्रत करना चाहिए, साथ ही भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए.

* देवी कात्यायनी की पूजा-अर्चना से गुरु ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए धनु और मीन राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.

* जिन श्रद्धालुओं की गुरु की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी कात्यायनी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

* प्रतियोगी परीक्षा, उच्च शिक्षा और शिक्षण कार्य के क्षेत्र में सफलता के लिए श्रद्धालुओं को देवी कात्यायनी की आराधना करनी चाहिए.

* जिन श्रद्धालुओं के बुजुर्गों/पति से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी कात्यायनी की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.

* देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें... ओम देवी कात्यायन्यै नम:॥

- आज का राशिफल 

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या, 

वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

बुधवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- लाभ             पहला- उद्वेग

दूसरा- अमृत             दूसरा- शुभ

तीसरा- काल            तीसरा- अमृत

चौथा- शुभ               चौथा- चर

पांचवां- रोग             पांचवां- रोग

छठा- उद्वेग             छठा- काल

सातवां- चर             सातवां- लाभ

आठवां- लाभ           आठवां- उद्वेग

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

* प्रदीप श्रीदवे, कमलाश्री आश्रम, वागड़ 

ppirajasthannews'gmail.com

* 9772354346

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