इनदिनों. क्या एसडी शर्मा होंगे राजस्थान भाजपा का ब्राह्मण चेहरा? राजस्थान भाजपा में वरिष्ठ ब्राह्मण नेता रहे घनश्याम तिवाड़ी के भाजपा छोडऩे के बाद यह सवाल गहरा रहा है कि अब राजस्थान में ब्राह्मण वोटों को साधने की जिम्मेदारी किस पर रहेेगी? वैसे तो आजादी के बाद से लेकर अब तक सरकार किसी की भी रही हो, राजस्थान की प्रादेशिक सत्ता में ब्राह्मणों का दबदबा रहा है और कई ब्राह्मण नेता विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष तौर पर चाणक्य की भूमिका निभाते रहे हैं! हालांकि, जनसंख्या के लिहाज से प्रदेश में ब्राह्मण उतने ज्यादा भले ही नहीं हों, परन्तु विभिन्न वर्गों के लिए सियासी प्रेरक की भूमिका के कारण ब्राह्मण नेताओं का राजनीतिक महत्व सदैव रहा है?

बीसवीं सदी में प्रदेश के ज्यादातर ब्राह्मण कांग्रेस के साथ थे, लेकिन कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण की नीति के चलते बीसवीं सदी के उत्तरार्ध से ब्राह्मण भाजपा की ओर बढऩे लगे, नतीजा? पिछले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में ब्राह्मणों ने भाजपा का पूरा-पूरा साथ दिया और भाजपा ने कामयाबी का परचम लहराया!

वैसे तो भाजपा में कई वरिष्ठ ब्राह्मण नेता हैं, लेकिन ज्यादातर राजधानी जयपुर के बाहर उतने सक्रिय नहीं हैं कि सारे प्रदेश के ब्राह्मण समाजों से निरंतर संपर्क में हों, यही वजह है कि घनश्याम तिवाड़ी के भाजपा छोडऩे के बाद राज्य देवस्थान बोर्ड के अध्यक्ष और राजस्थान ब्राह्मण महासभा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एसडी शर्मा का नाम वैकल्पिक तौर पर तेजी से उभर रहा है!

देवस्थान बोर्ड अध्यक्ष के रूप में अपना एक कार्यकाल पूरा कर दोबारा अध्यक्ष बनाये गये शर्मा ने कुछ वर्षों के दौरान न केवल प्रदेश में एक प्रभावी ब्राह्मण नेता के रूप में स्वयं को स्थापित किया है बल्कि तमाम जिलों में अपनी पकड़ भी बनाई है. क्योंकि एसडी शर्मा, सीएम वसुंधरा राजे के विश्वसनीय भी हैं, इसलिए भी चर्चा में हैं!

कई वर्षों से प्रदेश भाजपा की राजनीति में सक्रिय और संगठन में काम कर रहे एसडी शर्मा ने राजस्थान में देवस्थान बोर्ड का अध्यक्ष बनने के बाद अपनी अलग सोच और कार्यशैली से प्रदेश के देवालयों को बेहतर बनाने के प्रयास किए, जिसमें वे काफी हद तक कामयाब भी रहे. यही नहीं, शर्मा ने प्रदेश के तकरीबन सभी क्षेत्रों के दौरे किए और प्रभावी स्थानीय ब्राह्मण नेताओं की पहचान और संपर्क अभियान जारी रखा.

गुजरात विधानसभा चुनाव से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव के दौरान देव-दर्शन करते रहे हैं तथा इसका उन्हें सियासी फायदा भी मिलता रहा है, लेकिन राजस्थान में देव-दर्शन का उतना लाभ इसलिए नहीं मिल पाएगा कि राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे पहले से ही विभिन्न देवालयों में होने वाले विविध धार्मिक आयोजनों में भाग लेती रहीं हैं, साथ ही एसडी शर्मा भी नियमितरूप से ऐसे धार्मिक आयोजनों और गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं!

इस वर्ष के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव हैं तथा अगले वर्ष लोकसभा चुनाव हैं जिनमें प्रदेश के ब्राह्मणों की खास भूमिका है, कांग्रेस के पास पूर्व मंत्री और राजस्थान ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष भंवर लाल शर्मा हैं तो घनश्याम तिवाड़ी ने तो अपनी अलग पार्टी ही खड़ी कर ली है, देखना दिलचस्प होगा कि राजस्थान में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किस ब्राह्मण नेता को दी जाती है? 

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