इनदिनों. इस वर्ष तीन प्रमुख राज्यों- राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की अग्रिपरीक्षा है, कारण? तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार हैं और इस साल होने वाले प्रादेशिक चुनावों में इन प्रदेशों में भाजपा की सत्ता बचाए रखने की तगड़ी चुनौती है! 

दक्षिण राजस्थान कभी कांग्रेस का गढ़ था, परन्तु पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यह गढ़ जीत लिया था, और अब 2017 में राहुल गांधी की बांसवाड़ा में कामयाब जनसभा के बाद एक बार फिर कांग्रेस को यहां उम्मीद की किरण नजर आ रही है? यह संभावना जताई जा रही है कि इस बार राजस्थान के विधानसभा चुनाव की शुरूआत, कांग्रेस दक्षिण राजस्थान से करेगी!

उधर, भाजपा भी इस गढ़ पर कब्जा बनाए रखना चाहती है. राजस्थान की सीएम तो वैसे भी देवी त्रिपुरा सुंदरी की परम भक्त है, लिहाजा उनका चुनाव प्रचार तो एक तरह से दक्षिण राजस्थान से ही होगा, लेकिन यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बार पीएम नरेन्द्र भाई मोदी प्रादेशिक चुनाव की शुरूआत दक्षिण राजस्थान, खासकर मानगढ़ धाम से करेंगे, इसके कई कारण हैं...

* आजादी से पहले इस क्षेत्र पर गोविंद गुरू का विशेष प्रभाव था और उनके अनुयायी आज भी यहां संपूर्ण आस्था के साथ सक्रिय हैं.

* मानगढ़ वह जगह है जिसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कहा जाता है जहां गोविंद गुरू के सैकड़ों अनुयायियों को अंग्रेजों ने गोलियां चला कर मार दिया था.

* मानगढ़ के विकास के लिए उनके अनेक ज्ञात/अज्ञात अनुयायियों ने प्रयास किए जिनमें राजस्थान के पूर्व एमएलए नाथूराम भगत प्रमुख हैें, जिन्होंने तत्कालीन राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष पं. लक्ष्मीनारायण द्विवेदी से अनेक जगह पत्र लिखवा कर मानगढ़ धाम की संपूर्ण जानकारी देते हुए इसके विकास के लिए शुरूआती प्रयास किए. यही नहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी से चर्चा कर इसे विकसित करने की शुरूआत भी की!

* मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय/प्रादेशिक स्तर पर प्रकाश में लाने के लिए बीसवीं सदी में ईश्वरलाल प. वैश्य, नंदकिशोर पटेल, शैलेन्द्र उपाध्याय, गोपेन्द्रनाथ भट्ट, भंवर पंचाल, दीपक दत्त आचार्य, नागेन्द्र डिंडोर आदि लेखकों-पत्रकारों का उल्लेखनीय योगदान रहा तो एक्कीसवीं सदी में वरूण भट्ट, कमलेश शर्मा आदि ने मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीयस्तर पर स्थापित किया!

* इनके अलावा भी कई लेखकों ने मानगढ़ पर लेख लिखे और पुस्तकें प्रकाशित की, पहली वागड़ी फिल्म तण वाटे की टीम- साहले सईद, भंवर पंचाल, कैलाश जोशी, जगन्नाथ तैली आदि ने तो वहां जा कर शुटिंग भी की!

* वर्तमान में मानगढ़ के विकास के लिए कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों के नेता सक्रिय हैं?

* गोविंद गुरू के अनुयायियों का प्रभाव राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के संयुक्त क्षेत्र पर है, लिहाजा उनके प्रत्यक्ष/परोक्ष सहयोग-समर्थन के लिए चुनाव प्रचार की शुरूआत मानगढ़ से हो सकती है!

* आजादी के बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के संयुक्त आदिवासी क्षेत्र पर जननेता मामा बालेश्वर दयाल का एकछत्र साम्राज्य रहा है. उनके गुजरने के बाद उनके कुछ अनुयायी भाजपा में चले गए तो कुछ कांग्रेस में और शेष अनुयायी जनता दल के विभिन्न खेमों में हैं. मामा बालेश्वर दयाल के इस प्रभाव क्षेत्र में करीब एक दर्जन विधानसभा सीटें हैं तो तकरीबन आधा दर्जन लोकसभा सीटें हैं, लिहाजा दक्षिण राजस्थान से चुनाव प्रचार भाजपा के लिए फायदे की शुरूआत है?

* पिछले विधासभा चुनाव में भाजपा को इस क्षेत्र में जो कामयाबी मिली थी उसमें मामाजी के अनुयायियों का बड़ा योगदान था, लेकिन कुछ समय से इस क्षेत्र में कांग्रेसी नेता तो विशेषरूप से सक्रिय हुए ही हैं, शरद यादव, नीतीश कुमार आदि की भी इस क्षेत्र पर नजर है, इसलिए भाजपा को इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए भी इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पड़ेगी?

* दक्षिण राजस्थान के आदिवासियों का गुजरात से गहरा नाता है, लिहाजा यदि नरेन्द्र भाई मोदी इस क्षेत्र से चुनाव प्रचार प्रारंभ करते हैं तो भाजपा को उत्साहजनक नतीजे मिल सकते हैं?

उधर, कांग्रेस को भी दक्षिण राजस्थान से इस बार बेहतर संभावनाएं नजर आ रही हैं, लिहाजा वह भी इस क्षेत्र से चुनाव प्रचार की शुरूआत करके अपना पुराना गढ़ फिर से फतह करने की कोशिश करेगी?

दक्षिण राजस्थान पर पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के जमाने से ही अशोक गहलोत की अच्छी पकड़ और पहचान रही है, लिहाजा उनका प्रयास भी यही रहेगा कि प्रादेशिक चुनावों के प्रचार की शुरूआत राहुल गांधी दक्षिण राजस्थान से करें? 

उल्लेखनीय है कि गुजरात की तर्ज पर राजस्थान में भी राहुल गांधी देव-दर्शन को विभिन्न मंदिरों में जाएंगे, जिनमें देवी त्रिपुरा सुंदरी का मंदिर प्रमुख है. राजस्थान के कांग्रेसजन भी चाहते हैं कि राहुल गांधी सियासी सफलता के लिए देवी त्रिपुरा सुंदरी के मंदिर जाएं, क्योंकि राजनीति में कामयाबी के लिए देवी त्रिपुरा सुंदरी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है और इसीलिए देश-प्रदेश के अनेक राजनेता अपनी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष सियासी मनोकामनाएं लेकर देवी त्रिपुरा के दरबार में आते रहे हैं. 

बहरहाल, प्रादेशिक चुनाव में दक्षिण राजस्थान की विशेष भूमिका है, लिहाजा कांग्रेस और भाजपा, दोनों प्रमुख दल चाहेंगे कि यहां से अधिक-से-अधिक सीटें प्राप्त हों? देखना दिलचस्प होगा कि इस बार एमपी-राजस्थान का यह संयुक्त क्षेत्र किसका साथ देता है? इस बार विधानसभा चुनाव के दौरान कौन-कौन राजनेता देवी त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में आते हैं? और किन-किन को देवी त्रिपुरा सुंदरी का आशीर्वाद मिलता है?

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