सियासत के सितारे. यदि सितारों की समीकरण पर आप का भरोसा है तो इससे इंकार नहीं कर सकते कि राजनीतिक सफलता में सितारों की बड़ी भूमिका है? यूपी के सीएम अखिलेश यादव का कहना है कि वे पीएम नहीं, फिर से यूपी का सीएम बनना चाहते हैं! 

खैर, अखिलेश यादव क्या चाहते हैं, इससे हट कर उनकी हाथों की रेखाएं बताती है कि अभी तो उनकी कामयाबी का सियासी सफर शुरू हुआ है, कई और बड़े पद उनका इंतजार कर रहे हैं!  

किसी भी राजनेता के लिए राष्ट्रीयस्तर पर पहचान बनाना बड़ी उपलब्धि मानी जानी चाहिए और इस पैमाने पर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव काफी हद तक सफल रहे हैं? और यही वजह है कि उनका नाम संभावित प्रधानमंत्रियों की चर्चा में प्रमुखता से लिया जा रहा है! 

याद रहे, बतौर संभावित प्रधानमंत्री, अखिलेश यादव का नाम सबसे पहले पल-पल इंडिया की 26 दिसंबर 2016 की रिपोर्ट में ही सामने आया था?

लेकिन... खुद अखिलेश यादव का कहना है कि वे पीएम नहीं, सीएम बनना चाहते हैं! आखिर क्यों?

अखिलेश यादव अब किसी जल्दी में नहीं हैं... उन्हें यूपी की सत्ता का अच्छाखासा अनुभव मिल गया है, संगठन का अनुभव मिल गया है और उन्हें अपनी और अपने संगठन की सीमाओं का अहसास भी है? यूपी की सियासी गणित उनके बस में है, लेकिन देश की सियासी समीकरण साधने में थोड़ा वक्त लगेगा? अलबत्ता, इस वक्त उनके आयुवर्ग में राहुल गांधी के अलावा कोई बड़ा चेहरा राष्ट्रीय स्तर पर नहीं है! लिहाजा, वर्ष 2019 का आम चुनाव अखिलेश के लिए प्री-एग्जाम टेस्ट की तरह है? लेकिन, इस दौरान उनके समक्ष दो प्रमुख काम होंगे, एक... सपा का राष्ट्रीयस्तर पर विस्तार, और दो... राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पकड़ बनाना! अलबत्ता, इस दौरान बेहतर मौका मिलने पर वे नेताजी मुलायमसिंह यादव का नाम जरूर पीएम पद के लिए आगे बढ़ा सकते हैं?

जहां तक बसपा का सवाल है, मायावती को आगे रख कर चलना उनके लिए इसलिए लाभदायक है कि मायावती के अलावा बसपा में कोई बड़ा चेहरा नहीं है और सपा-बसपा के वोट बैंक का नेचर तकरीबन एक जैसा है, मतलब? बसपा का वोट बैंक भविष्य में अखिलेश यादव की ताकत बन सकता है! 

फिलहाल तो अखिलेश यादव महागठबंधन के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी को 2019 में हराने की तैयारी में लगे हैं?

समाजवादी पाटी के अध्यक्ष अखिलेश यादव यूपी में एक चैनल के कार्यक्रम में कहा कि मुझे देश का प्रधानमंत्री नहीं बनना है, मुझे तो केवल एक बार फिर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री ही बनना है!

देश में गैरभाजपाइयों के मिशन- 2019 को धार देने में विभिन्न सियासी पार्टियां सक्रिय हैं. एक ओर भाजपा को मात देने के लिए गैरभाजपाई महागठबंधन तैयार हो रहा है तो दूसरी ओर एमपी, राजस्थान जैसे प्रदेशों से भी भाजपा को बाहर करने की तैयारी चल रही है. इस राजनीतिक कवायद में समाजवादी पार्टी की बड़ी भूमिका है, क्योंकि यदि यूपी में भाजपा उलझ गई तो केन्द्र की सत्ता पर कब्जा जमा नहीं पाएगी? लेकिन... ऐसा तभी संभव है जब समाजवादी पार्टी बसपा के साथ मिलकर भाजपा को चुनौती दे! 

बसपा की सर्वेसर्वा मायावती की राजनीति एकदम खुली किताब है और यूपी के अलावा शेष कई राज्यों में भी बसपा का प्रभाव है, लिहाजा मायावती का पहला निशाना केन्द्र है तो तो दूसरा यूपी? किसी विषम राजनीतिक परिस्थिति में पीएम का पद मायावती को भी मिल सकता है, हालांकि सियासी इतिहास बताता है कि कांग्रेस और भाजपा के अलावा किसी और दल के नेता के लिए केन्द्रीय सत्ता की लंबी पारी खेलना संभव नहीं है? मगर, केन्द्रीय सत्ता के इतिहास में बतौर पीएम नाम दर्ज होना भी कोई कम उपलब्धिपूर्ण नहीं है!

अखिलेश यादव, मायावती की सियासी महत्वकांक्षाएं जानते हैं और इसीलिए वे मायावती को पूरा समर्थन दे रहे हैं ताकि बसपा उन पर भरोसा कर सके? बसपा से गठबंधन पर अखिलेश का कहना था कि बसपा के साथ मिलकर समाजवादी पार्टी 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ेगी और इस समझौते के लिए हमें कोई कुर्बानी देनी पड़ी तो भी पीछे नहीं हटेंगे!

यदि अखिलेश, बसपा का भरोसा जीतने में कामयाब रहे तो उनका सियासी भविष्य उज्ज्वल है? फिर क्या पीएम और क्या सीएम पद? सियासी कामयाबी उनकी हमकदम होगी! 

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


1. माना की पीएम मोदी बहादुर हैं, पर प्रेस से क्यों दूर हैं?

2. कैशलेस पर भरोसा नहीं? लोगों के हाथ में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा कैश

3. अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार ने मांगे 22 हजार अतिरिक्त जवान

4. कीनिया को रौंदकर भारत ने हीरो इंटर कांटिनेंटल फुटबॉल कप जीता

5. SCO समिट- भारत समेत कई देशों के बीच महत्वपूर्ण एग्रीमेंट, PM मोदी ने दिया सुरक्षा मंत्र

6. ट्रंप से मुलाकात के लिए उत्तर कोरिया से चाइना होते हुए सिंगापुर पहुंचे किम जोंग

7. उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने यूजीसी बड़े बदलाव की तैयारी में

8. सुपर 30 का दबदबा कायम आईआईटी प्रवेश परीक्षा में 26 छात्र सफल

9. रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्विनी लोहानी, भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे.?

10. क्या आप भी पूजा-पाठ करने के लिए स्टील के लोटे का करते हैं इस्तेमाल?पहले जान लें ये बात

11. काम में मन नहीं लगता तो यह करें उपाय

************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।