नयी दिल्ली. देश की अर्थव्यवस्था को कैशलेस बनाने के रास्ते पर चले मोदी सरकार को झटका लगा है. देश में इस समय देश में इस समय जनता के हाथ में मुद्रा का स्तर 18.5 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है जो इसका अब तक अधिकतम स्तर है. यह नोटबंदी के दौर की तुलना में दोगुने से अधिक है. नोटबंदी के बाद जनता के हाथ में मुद्रा सिमट कर करीब 7.8 लाख करोड़ रुपए रह गई थी. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है.

इस समय चलन में कितनी मुद्रा

आर.बी.आई. के मुताबिक, इस समय चलन में कुल मु्द्रा 19.3 लाख करोड़ रुपए से अधिक है जबकि नोटबंदी के बाद यह आंकड़ा लगभग 8.9 लाख करोड़ रुपए था. चलन में मौजूद कुल मुद्रा में से बैंकों के पास पड़ी नकदी को घटा देने पर पता चलता है कि चलन में कितनी मुद्रा लोगों के हाथ में पड़ी है.

उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले देश के विभिन्न हिस्सों में नकदी संकट की खबरें आई थी जबकि इसके विपरीत लोगों के पास बड़ी मात्रा में नकदी मौजूद है. आंकड़ों के मुताबिक, 'जनता के पास मुद्रा' औ 'चलन में मुद्रा' दोनों नोटबंदी के फैसले से पहले के स्तर से अधिक हैं. सरकार के नोटबंदी के फैसले से चलन में मौजूद कुल मुद्रा में मूल्य के हिसाब से 86 प्रतिशत मुद्रा अमान्य हो गई थी.

RBI के आंकड़ों से हुआ खुलासा

सरकार ने इन पुराने 500 और 1000 रुपए के नोटों के चलन पर 8 नवंबर 2016 को पाबंदी घोषित कर दी थी पर लोगों को अपने पास पड़े बड़े मूल्य के नोटों को बैंकों में जमा करने के लिए समय दिया था. जिसके बाद करीब 99 प्रतिशत मुद्रा बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गई थी. आर.बी.आई. द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कुल 15.44 लाख करोड़ रुपए की अमान्य मुद्रा में से 30 जून 2017 तक लोगों ने 15.28 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा बैंकों में जमा करवाई.

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