नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर बताया है. दरअसल, एक आरटीआई आवेदक ने 6 राष्ट्रीय दलों के जुटाए गए चंदे की जानकारी मांगी थी. इन 6 दलों को सीआईसी, जून 2013 में पारदर्शिता कानून के दायरे में लाया था. इस पर चुनाव आयोग ने कहा है कि राजनीतिक दल आरटीआई कानून के दायरे से बाहर हैं. चुनाव आयोग ने केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देश के उलट ये आदेश दे दिया है.

वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि वर्ष 2019 में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए चुनाव यदि एकसाथ कराया गया तो चुनाव आयोग को करीब 24 लाख ईवीएम की जरूरत पड़ेगी जो कि केवल संसदीय चुनाव कराने के लिए जरूरी मशीनों की संख्या से दोगुनी है. चुनाव आयोग के अधिकारियों ने एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर विधि आयोग के साथ गत 16 मई को हुई अपनी चर्चा में कहा था कि उन्हें करीब 12 लाख अतिरिक्त इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन और उतनी ही वीवीपैट मशीनें खरीदने के लिए करीब 4500 करोड़ रूपये की जरूरत होगी.

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