इनदिनों. पीएम नरेंद्रभाई मोदी और अमित शाह के नेतृत्ववाली भारतीय जनता पार्टी देश का सबसे बड़ा सियासी दल है, लेकिन... वर्ष 2014 के आमचुनाव में अकेले अपने दम पर बहुमत हासिल करके 282 सीटों पर जीत दर्ज करवाने वाली भाजपा इस वक्त एकल बहुमत से दूर हो गई है? हालांकि संयुक्त बहुमत बरकरार है!

लोकसभा में एकल बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों की संख्या से भाजपा पीछे इसलिए खिसक गयी है कि अब स्पीकर को छोड़कर भाजपा के पास वहां केवल 270 सीटें बची हैं? मतलब... भाजपा की 2014 की 282 सीटें 270 हो गई हैं!

वजह? एक तो इन चार वर्षों में हुए कई उपचुनाव भाजपा हार गई जहां से भाजपा के सांसद थे, तो दूसरा... कर्नाटक के दो एमपी- बीएस येदियुरप्पा और बी श्रीरामुलु, ने विधानसभा के लिए लोकसभा से त्यागपत्र दे दिया!

दरअसल, भाजपा 2014 के चुनाव के बाद एकल बहुमत हांसिल करने में कामयाब रही थी और इसी कारण से भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए की संयुक्त सरकार एक तरह से भाजपा की सरकार बन गई थी? इसी एकल ताकत का नतीजा रहा कि पीएम मोदी निर्विघ्र सरकार चला पाए! 

इन चार सालों में भाजपा को कई उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा जिनमें यूपी में गोरखपुर और फूलपुर, पंजाब में गुरुदासपुर, राजस्थान में अलवर और अजमेर, एमपी में भिंड आदि हैं. हालांकि... गुजरात के वडोदरा, एमपी के शाहडोल और असम के लखीमपुर उपचुनाव में भाजपा ने अपनी सीटें फिर से जीत लीं, लेकिन जो भाजपा हार गई उसकी भरपाई संभव नहीं है, अलबत्ता... अभी भी भाजपा के पास मौका है गणित सुधारने का, चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं- महाराष्ट्र में भंडारा-गोंदिया और पालघर, यूपी में कैराना और नगालैंड, लेकिन... विपक्षी एकता की संभावनाओं के चलते इन चुनावों में जीत हासिल करना भाजपा के बड़ी चुनौती रहेगी?

पीएम मोदी से बहुत पहले भाजपा के प्रमुख नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार के पास क्योंकि एकल बहुमत नहीं था, इसलिए उन्हें केन्द्र सरकार को अपने अनुसार चलाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था और केन्द्र सरकार क्षेत्रीय दलों के दबाव में थी?

भाजपा 2019 में न केवल 2014 को दोहराना चाहती है, बल्कि उस कामयाबी से भी आगे जाना चाहती है, लेकिन जहां एक ओर गैरभाजपाइयों की एकता जोर मार रही हैं वहीं दूसरी ओर भाजपा में भी बगावत के स्वर ऊंचे हो रहे हैं? ऐसी स्थिति में पीएम नरेन्द्रभाई मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के सामने 2019 में 272 सीटों के आंकड़े को पार करना ही बड़ी चुनौती बनता जा रहा है? हालांकि एक ओर उत्तर भारत में भाजपा कमजोर हुई है तो पूर्वोत्तर जैसे देश के कुछ क्षेत्रों में भाजपा की ताकत बढ़ी भी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि... क्या 2019 में उत्तर भारत में भाजपा की सीटों में की संभावित कमी की भरपाई नए क्षेत्रों से हो पाएगी? 

यदि भाजपा 2019 में एकल बहुमत नहीं हासिल कर पाती है तो केन्द्र में एनडीए की सरकार बनने के बावजूद नरेन्द्रभाई मोदी का प्रधानमंत्री बनना मुश्किल हो जाएगा? इसके दो प्रमुख कारण हैं, एक... सहयोगी दल पीएम मोदी से खुश नहीं है, और दो... पीएम मोदी की कार्यशैली गंठबंधन सरकार के अनुकुल नहीं है, ध्यान रहे... अटलबिहारी वाजपेयी की तरह तालमेल बैठा कर गठबंधन की सरकार चलाना आसान काम नहीं है!

वर्ष 2019 की आशंकाओं के चलते ही भाजपा में एक बार फिर राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज आदि के नाम बतौर पीएम उम्मीदवार चर्चाओं में हैं, लेकिन यदि 2019 में एकल बहुमत पाने में भाजपा कामयाब रहती है तो पीएम नरेन्द्रभाई मोदी ही होंगे, क्योंकि ऐसी स्थिति में संघ की मर्जी के बगैर पीएम मोदी को हटाना संभव नहीं होगा?

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