हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य के लिए मुहूर्त का देखा जाता है, क्योंकि शुभ मुहूर्त में शुरू किया गया काम बिन किसी विध्न के पूरा हो जाता है, ऐसे में ज्योतिष के अनुसार वर्ष में कई सारे विशेष शुभ मुहूर्त आते हैं जिन पर कोई भी शुभ कार्य करना श्रेयसकर होता है, पर वहीं कुछ दिन ऐसे होते हैं जिनमें कोई शुभ कार्य नहीं किया जा सकता, पंचक भी इन्ही में से एक है. यही वजह है कि पंचक में बहुत से शुभ कार्य करना निषेध है. ऐसा ही एक पंचक काल शुरू हो चुका  है. ज्योतिष के जानकारों की माने तो ये पंचक  मंगलवार की शाम लगभग 06.16 से पंचक शुरू हो गया  और 13 मई, रविवार की सुबह लगभग 11.48 तक रहेगा.चूकि ये पंचक मंगलवार से शुरू हुआ  है इस कारण ये अग्नि पंचक कहलाएगा. ज्योतिष के अनुसार अग्नि पंचक में आग से नुकसान होने का खतरा रहता है. वहीं इसमें बहुत से शुभ कार्यों की मनाही होती है, चलिए विस्तार से इस बारे में जानते हैं.

पंचक में अगर हो किसी की मृत्यु 

दरअसल ज्योतिष में 27 नक्षत्रों में से अंतिम पांच नक्षत्र.. धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार धनिष्ठा से रेवती तक इन पांच नक्षत्रों का गठजोड़ अशुभ होता है. यहां तक कि इस दौरान अगर किसी की मृत्यु हो जाए और उसका अंतिम संस्कार ठीक ढंग से न किया गया तो इससे पंचक दोष लग सकते है. गरुण पुराण में बताया गया है कि , पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी धर्म और ज्योतिष के ज्ञानी से पूछकर ही संस्कार आदी करना चाहिए.वहीं ‘मुहूर्त चिंतामणि’ में इस बात का उल्लेख है कि इन नक्षत्रों की युति में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के दूसरे सदस्यों को भी मृत्यु तुल्य कष्ट का भय बना रहता है, ऐसे में पंचक के दौरान दाह-संस्कार करते समय बहुत-सी सावधानियों का पालन करना होता है.

इन कार्यों की है मनाही 

ज्योतिष के जानकारों की माने तो पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता, ऐसा करने से कोई बड़ा विपदा आने की आशंका रहती है.

पंचक के दौरान जब समय घनिष्ठा नक्षत्र हो, उस वक्त घास, लकड़ी आदि जलने वाली सामग्री एकत्र नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे आग लगने का भय रहता है. 

वहीं पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने की मनाही होती है, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है.

ज्योतिष के जानकरों की माने तो पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र हो, तो उस समय घर की छत नहीं बनानी चाहिए, ऐसा करने से धन हानि और घर में क्लेश की सम्भावना बनती है. 

आपको बता दें कि पांच दिनों का ये विशेष समय, वर्ष में कई बार आता है, और दिन के इनके भी कई प्रकार के होते हैं, जैसे कि..

रोग पंचक 

ज्योतिष के अनुसार जब पंचक की शुरूआत रविवार के दिन से होती है तो ये रोग पंचक कहलाता है, जिसके प्रभाव से शारीरिक और मानसिक परेशानियों बढ़ती है. वहीं इस दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य निषेध माना गया है.

राज पंचक

वहीं अगर पंचक का आरम्भ सोमवार से हो तो ये पंचक राज पंचक होता है, जो कि दूसरें पंचक के जैसे अशुभ नहीं बल्कि बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि राज पंचक के दौरान सरकारी कार्यों में सफलता हासिल होती है और बिना किसी बाधा के संपत्ति से जुड़े मामले हल हो जाते हैं. 

अग्नि पंचक 

जबकि मंगलवार से शुरु हुए इस पंचक को ‘अग्नि पंचक’ कहते हैं. ज्योतिष के अनुसार इन पांच दिनों में अग्नि से नुकसान होने का भय रहता है. साथ ही दूसरे कार्यों को करने के लिए भी शुभ नहीं माना जाता. 

चोर पंचक 

वहीं शुक्रवार से शुरू हुए पंचक को चोर पंचक कहा जाता है, जिसके दौरान यात्रा करना निषेध होता है . वहीं इसके साथ ही धन से जुड़ा किसी भी कार्य को करने की मनाही होती है. वहीं इस दौरान धन की हानि होने की संभावनाएं भी प्रबल रहती हैं. 

मृत्यु पंचक

ज्योतिष के अनुसार शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है और इसीलिए इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है. मान्यता है कि अगर इस दिन किसी कार्य की शुरुआत की जाए, तो व्यक्ति को मृत्यु तुल्य कष्ट मिलता है. ऐसे में शनिवार से शुरू हुए पंचक के दौरान कोई भी जोखिम वाल कार्य नहीं करना चाहिए, क्योंकि मृत्यु पंचक के कारण व्यक्ति को चोट लगने, दुर्घटना होने और मृत्यु तक की आशंका बनी रहती है.

वहीं अगर पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार के दिन से शुरू होता है तो फिर ये अधिक अशुभ नहीं माना जाता. इस तरह के पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को छोड़कर बाकी कार्य किए जा सकते हैं.

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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