नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने एक अहम आदेश में कहा है कि उज्जैन के महाकाल मंदिर में शिवलिंग पर केवल आरओ का आधा लीटर पानी ही चढ़ाया जाए. इसके साथ ही अदालत ने प्रति श्रद्धालु दूध और दूसरी पूजन सामग्री की सीमा सीमित करने का फैसला सुनाया है. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रखते समय साफ किया था कि पूजा कैसे हो, ये तय करना कोर्ट का काम नहीं है. बल्कि अदालत ने सिर्फ शिवलिंग को नुकसान से बचाने पर सुनवाई की. आज का आदेश  शिवलिंग के घिसने की वजह से दिया गया है. बुधवार को अदालत ने कहा कि महाकाल ज्योतिर्लिंग को क्षरण से बचाना बहुत जरूरी है. इसके लिए महाकाल मंदिर कमेटी के फैसले को माना जाए.

कोर्ट ने कहा कि शिवलिंग की सुरक्षा के लिए बनी कमेटी के आधार पर मंदिर प्रबंधन समिति ने ये सुझाव दिए थे. मंदिर कमेटी ने कहा कि अलग-अलग पानी से शिवलिंग का क्षरण हो रहा है. इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि भस्म आरती कैसे होगी यह हम तय नहीं कर सकते हैं. मंदिर की पूजा पद्धति में हम किसी तरह का दखल नहीं देंगे.  पिछले साल भी अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरओ के पानी से महाकाल शिवलिंग का अभिषेक किया जाना चाहिए. 

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