नई दिल्ली. भारत सरकार ने वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश का दायित्व ग्रहण कर चुकी हैं. उन्होंने शुक्रवार को पद की शपथ ली. केंद्र सरकार ने सीनियर एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किए जाने को मंजूरी दी थी. वह बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज नियुक्त होने वाली वह पहली महिला जज हैं. 61 वर्षीय मल्होत्रा का नाम सुप्रीम कोर्ट की सर्वश्रेष्ठ वकीलों में गिना जाता है. इस बात की जानकारी विधि मंत्रालय में मौजूद सूत्रों ने दी है. इस फैसले के साथ ही सरकार ने न्यायमूर्ति केएम जोसेफ के प्रमोशन को रोकने का फैसला किया है. न्यायमूर्ति जोसेफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हैं.

सूत्रों के मुताबिक कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, जल्द ही CJI दीपक मिश्रा को इंदु को नियुक्त किए जाने के सरकार के फैसले के बारे में पत्र लिखेंगे. दरअसल, कॉलेजियम ने तीन महीने पहले ही उत्तराखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा की सुप्रीम कोर्ट जज के तौर पर नियुक्ति का सुझाव दिया था. सुप्रीम कोर्ट का जज बनने वाली महिलाएं देश की आजादी के बाद से सुप्रीम कोर्ट में 39 वर्षों तक कोई भी महिला जज नहीं रही.

1989 में फातिमा बीबी को सुप्रीम कोर्ट की जज बनाया गया. इसके बाद जस्टिस सुजाता मनोहर, जस्टिस रुमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना देसाई को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया. ऐसे में इंदु मल्होत्रा आजादी के बाद से सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली छठी महिला होंगी. बेंगलुरु के मशहूर वकील परिवार में पैदा हुईं मल्होत्रा 1983 में दिल्ली बार काउंसिल में शामिल हुईं और उन्होंने लीगल प्रोफेशन की शुरुआत की. 1988 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड परीक्षा में पहली रैंक हासिल की, जिसके लिए उन्हें मुकेश गोस्वामी मेमोरियल पुरस्कार भी मिला.

वह मध्यस्थता के मामलों की विशेषज्ञ हैं और उन्होंने कई घरेलू व अंतरराष्ट्रीय व्यवसायिक मध्यस्थता के केस लड़े हैं सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े के मुताबिक, मल्होत्रा सर्वोच्च अदालत की सबके विनम्र वकीलों में से एक है. संजय हेगड़े ने बताया, वह हमेशा विनम्र रहती हैं और अपने क्लाइंट्स के लिए आखिरी समय तक लड़ती हैं, जबकि कुछ वकील हार मान लेते हैं. हेगड़े ने बताया, इंदु बेंगलुरु में पैदा हुईं. इस जगह से उनकी कई यादें जुड़ी हैं.

इसी जगह मेरी उनसे पहली बार मुलाकात हुई. इंदु जाने-माने वकील अशोक सेन के परिवार से जुड़ी हुई हैं. उनके पिता प्रकाश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट थे. इसके अलावा उन्होंने औद्योगिक विवादों के कानून पर कई किताबें भी लिखीं. 1991 से 1996 तक वे सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा की तरफ से स्टैंडिंग काउंसिल रहीं. इसके अलावा वे इंडियन काउंसिल ऑफ आर्बिट्रेशन (ICA), डेल्ही इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (DAC), ASSOCHAM जैसी कई आर्बिट्रेशन बॉडीज से जुड़ी रहीं.

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