जयपुर. भक्ति की किसी विशेष संप्रदाय जाति की नहीं होती. ना सीमाओ से बंधी होती है, ईश्वर सिर्फ आस्था देखता है. इस बात का उदाहरण अगर आपको देखना है तो आप कृष्णादास के कीर्तन में सुन सकते है. भगवान शिव, राम- कृष्णा और हनुमान के भजन-कीर्तन करने वाले जैफिरी कॉगेल की आवाज पर भारतीयों के अलावा दूसरी संस्कृति के लोग भी मंत्र मुग्ध रहते हैं.

31 मई 1947 को पैदा हुए जैफिरी उर्फ कृष्णादास पेशे से गायक है और भक्ति गाने गाते हैं. उनके गाने सुनने वाले लोगों की संख्या लाखों में हैं. देश-विदेश में लाखों लोग उनका कीर्तन सुनते हैं. आवाज में भक्ति का ऐसा भाव पैदा होता है कि भक्त को ईश्वरीय संपर्क होने लगता है.  उनके भजन को सुनकर 5 मिनट में आप इनकी दैवीय गुण का आभास कर लेंगे. 

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