विवाह मानव जीवन का अति महत्वपूर्ण संस्कार है,समय पर और शुभ विवाह करना हर महिला और पुरुष की कामना होती है,हर माता पिता अपने बच्चो का ऐसा विवाह करना चाहते है जिसमे आगे कोई रुकावट न हो,लेकिन पूर्णतः ऐसा हो जाय ऐसा असम्भव है जीवन मे हर चीज़ के दो पहलू होते है,शुभ विवाह के साथ अशुभ विवाह भी होते है शादी के बाद पटरी न बैठना,झगडे,अलगाव की नौबत आना ये भी जीवन मे होता है,इसके लिये हम क्या करे की विवाह के पश्चात झगडे हो तो प्यार भी रहे,शानदार जीवन के सपने हो तो उसके लिये संघर्ष भी साथ मे हो,आपस मे एक दूसरे का सम्मान और आंतरिक प्रेम भी हो.

*पत्रिका मिलान कैसे करें -

विवाह मे पत्रिका मिलान एक प्राचीन तथा सर्वमान्य परम्परा है

पत्रिका मिलान के कुल 36गुण होते है,जिसमे वर्ण का 1गुण,वश्य के 2गुण,तारा के 3गुण,योनि के 4गुण,ग्रह मैत्री के 5गुण,गण मिलान के 6 गुण,भकूट यानी राशि मिलान के 7 और नाड़ी मिलान के 8 गुण माने जाते है,ये कुल मिलाकर 36 गुण होते है,इनमें कम से कम 18 गुणों का मिलान होना अतिआवश्यक माना जाता है.

*ग्रह मैत्री,भकूट और नाड़ी मिलान मिलान के महत्वपूर्ण बिंदु*-

हर किसी का मिलान 36 या 32 गुण का हो ऐसा हमेशा सम्भव नही लेकिन वर वधू की आपस मे ग्रह मैत्री,दोनो की जन्म राशि मे मित्रता होना अति आवश्यक है,ग्रह मैत्री से दोनो की कार्य शैली,खाना पीना,दिनचर्या मे मिलान होने से जीवन अच्छा रहता है,इस मिलान के 6गुण है.

*भकूट यानी मन मिलान*

-इसमे वर वधू की जन्म राशि का आपस मे उत्तम मिलान देखा जाता है मेरे अनुभव से यदि यह मिलान उत्तम हो तो वैवाहिक जीवन काफी हद तक सफल माना जाता है,वर वधू की जन्म राशियों का समसप्तम होना चाहिये.

*राशियों का सप्तम*

-मेष-तुला

वृषभ-वृश्चिक

मिथुन-धनु,

कर्क-मकर,

सिंह-कुम्भ,

कन्या-मीन.

*राशियों का नवपंचम*

-मेष-धनु,

वृषभ-मकर,

मिथुन-कुम्भ

कर्क-मीन,

सिंह-मेष,

कन्या-वृषभ

उक्त राशियों का सम्बंध श्रेष्ठ होता है.

*नाड़ी मिलान*-

नाड़ी मिलान के विषय मे ऐसा कहा जाता है की यदि आपके 36 गुण भी मिल रहे हो और यदि नाड़ी अलग अलग न हो तो विवाह नही करना चाहिये,वर वधू की नाड़ी अलग होना श्रेष्ठ माना गय़ा है.

*तीन नाड़ी*- नाड़ी तीन प्रकार की होती है आदि,मध्य,अंत,ये तीन नाड़ी वर वधू की अलग अलग होना चाहिये.

आदि-अंत

मध्य -आदि

अंत -मध्य

मध्य -अंत

नाड़ी का जातक की शारीरिक अवस्था से गहरा सम्बंध होता है,डॉक्टर,आयुर्वेद आचार्य नाड़ी देखकर ही लोगो का इलाज करते है,वर वधू मे शारीरिक सम्बंध से ही नये मेहमान का आगमन होता है,वरवधू का मिलन विपरीत लिंग का मिलन होता है यदि दोनो की नाड़ी अलग हो तो आने वाली संतान स्वस्थ होती है,एक नाड़ी होने पर वधू को रोग संतानहीनता या संतान को बीमारी होती है इसीलिये वर वधू की नाड़ी अलग होना चाहिये.

*विशेष*- हमारे समझदार परिवार वाले सारी बनीयागीरी पंडितों के साथ ही करते है शादी के अन्य बिना मतलब के खर्च कर्ज लेकर भी करते है जबकि पत्री मिलान सबसे मुख्य कार्य है इसीलिए इस कार्य मॆ कंजूसी न करे,विद्वान का आर्थिक और मानसिक रूप से सम्मान करे ताकि वह भी आपको सही सलाह दे अन्यथा 21,51,101से आपका वैवाहिक जीवन बिगड़ सकता है.

*प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"*

9893280184,7000460931

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