दिव्यांगों को हमारा समाज किसी बोझ से कम नहीं समझता. इस मानसिकता का असर समाज की विकासात्मक नीतियों में भी साफ तौर पर झलकता है. दिव्यांगों को जितनी सुविधाएं मिलनी चाहिए वे नहीं मिल पा रही हैं. यही वजह है कि वे अपने आप को और अधिक अक्षम पाते हैं. चाहे वो किसी सरकारी बिल्डिंग की बात हो या फिर सार्वजनिक परिवहन की. हर जगह दिव्यांगों की उपेक्षा की जाती है. इससे उन्हें रोजमर्रा के काम करने में और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन धीरे ही सही सार्वजनिक जगहों पर दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था की शुरुआत हो गई है और इस क्रम में केरल का एर्णाकुलम ऐसा पहला रेलवे स्टेशन बन गया है जो दिव्यांगों के लिए पूरी तरह से अनुकूल है.

इसका पूरा श्रेय 25 वर्षीय विराली मोदी को जाना चाहिए जो कि मुंबई में दिव्यांगों के अधिकारों के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रही हैं. वे सार्वजनिक जगहों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाने के लिए संघर्षरत हैं. विराली लंबे समय से व्हीलचेयर पर ही हैं और उन्होंने #MyTrainToo नाम से एक कैंपेन शुरू किया था, जिसकी वजह से यह संभव हो पाया. विराली को एर्णाकुलम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करने के लिए बुलाया गया था. अब एर्णाकुलम स्टेशन पर व्हीलचेयर के लिए परमानेंट रैंप बना दिए गए हैं. सामान उठाने वाले पोर्टरों को भी ट्रेनिंग दे दी गई है कि उन्हें दिव्यांग यात्रियों की कैसे मदद करनी है.

लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट के तहत दिव्यांग यात्रियों के लिए एक इलेक्ट्रिक गाड़ी भी उपलब्ध कराने का वादा किया गया है. साथ ही एसी और सामान्य विश्रामालयों में दिव्यांगजनों के लिए सुविधाजन सीटें लगा दी गई हैं. रेलवे ने इसके अलावा शौचालय और बाकी सुविधाओं को भी छह महीने में पूरा करने का वादा किया है. इतना ही नहीं रेलवे ने कहा है कि आने वाले समय में पूरे प्रदेश में ऐसी ही सुविधा की जाएगी.

विराली बताती हैं कि एक बार रेलवे से सफर करते समय उन्हें काफी मुश्किल उठानी पड़ी थी और उनके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ था. रेलवे के एक कुली ने उनकी दिव्यांगता का फायदा उठाने की कोशिश की थी. उसके बाद विराली ने रेलवे को दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए #Mytraintoo कैंपेन शुरू किया था. इसके लिए उन्हें पूरे देश से समर्थन मिला था.

कई लोगों ने उन्हें लिखकर इस काम को शुरू करने के लिए शुक्रिया भी किया था. पिछले साल 9 फरवरी को तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने उनके ट्वीट का संज्ञान लेते हुए उन्हें इस दिशा में काम करने का भरोसा दिलाया था. हालांकि विराली ने कहा कि रेल मंत्री के आश्वासन के बाद भी सिर्फ केरल ने इस तरह की पहल प्रारंभ की है. विराली की निजी जिंदगी भी काफी संघर्षों भरी रही है. 2008 में अमेरिकी डॉक्टरों ने उन्हें क्लिनिकली डेड घोषित कर दिया था, लेकिन वो मुंबई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने न केवल बचाया बल्कि इस काबिल बनाया कि आज वे व्हीलचेयर के सहारे अपनी जिंदगी बसर कर रही हैं.

साभार:yourstory.com

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