नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय मूल के प्रवासियों को देश का राजदूत बताते हुए उनसे नए भारत के निर्माण की विकास यात्रा में साझीदार बनने का आह्वान किया है. मोदी ने आज यहां प्रवासी दिवस पर पहले प्रवासी सांसद सम्मेलन में अपने उद्धाटन भाषण में कहा कि दुनिया का भारत के प्रति नजरिया बदल रहा है और यह बदलाव सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक तीनों स्तर पर आ रहा है. देश की व्यवस्था में बदलाव हो रहे हैं जिन्हें देखते हुए दुनिया का भारत के प्रति बेहद सकारात्मक रुख है और अर्थव्यवस्था के हर हिस्से में दूरगामी सुधार​ किए गए हैं.

इसी का परिणाम है कि पिछले वर्ष 2016-17 में देश में 60 अरब डॉलर का निवेश हुआ है. प्रधानमंत्री ने 24 देशों से आए भारतीय मूल के 134 सांसदों तथा महापौरों को देश में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि देश में 21 वीं सदी की जरूरतों को देखते हए बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है और राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल लाइनों को बिछाने तथा जल मार्ग बनाने की दिशा में दोगुना रफ्तार से काम किया जा रहा है. 

उन्होंने कहा कि विश्व के साथ संबंधो में भारतीय प्रवासी देश के राजदूत की तरह हैं और भारत सरकार आपकी हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है. दुनिया में जब भी कहीं भारतीय मूल का नागरिक कोई उपलब्धि हासिल करता है तो भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा उठ जाता है क्योंकि भारत आपको अपना साझीदार मानता है और इसी नाते आज वह सभी प्रवासी भारतीयों से नये भारत के निर्माण की विकास यात्रा में योगदान की अपील करते हैं. मोदी ने कहा कि प्रवासी भारतीय आज देश में जो विकास का माहौल बना है उसके बारे में अपने-अपने देशों तथा समाज में जागरूकता फैलाएं और भारत के विकास में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएं. उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के नागरिक बड़ी- बड़ी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं और उनका भारत की विकास यात्रा में मजबूत विश्वास है क्योंकि वे अपने आपको इसमें एक पक्ष मानते हैं.

उन्होंने अगले वर्ष प्रयाग में होने वाले कुंभ के आयोजन की जानकारी देते हुए कहा कि पर्यटन क्षेत्र के लिए यह बहुत बड़ा अवसर है और भारतीय मूल के नाग​रिक इस अवसर पर अपनी जड़ों से जुडऩे के साथ-साथ देश की आर्थिक उन्नति में भी योगदान दे सकते हैं. दुनियाभर में स्वास्थ्य क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए वे भारत की पुरातन हॉलिस्टिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी दे सकते हैं. श्री मोदी ने कहा कि भारतीय मूल के शिक्षक एक विशेष योजना के तहत एक से तीन महीने तक विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अपनी सेवा देकर युवाओं को अपने अनुभवो का ज्ञान दे सकते हैं. 

प्रवासी भारतीयों के संधर्ष और उनकी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सब लोग बधाई के पात्र हैं क्योंकि आपने दूसरे देशों में जाकर वहां के परिवेश में धुलने मिलने के बावजूद भारत की सभ्यता, मूल्यों और भारतीयता को जीवित रखा है. उन्होंने कहा कि सवा सौ करोड़ भारतीयों को आपकी इन उपलब्धियों पर गर्व है. इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारतीय मूल के सांसदों तथा महापौरों का स्वागत करते हुए कहा कि कई प्रतिनिधि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद इस सम्मेलन में हिस्सा लेने आये हैं और वह उनके प्रति आभार व्यक्त करती हैं. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में मुख्य रूप से दो विषय रखे गये हैं जिनमें प्रवासी भारतीय अपने संसद तक के सफर के बारे में तथा उभरते भारत में प्रवासियों की भूमिका पर विचार रखेंगे. 

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