हिन्दू धर्म के ग्रन्थों में लिखा है कि ब्रह्मा ने कष्टों और दुखों के भवसागर को पार करने के लिए बृहस्पति और शुक्र नाम के दो चप्पू बनाये थे. इनकी सहायता से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के कष्टों और दुखों से पार होकर बृहस्पतिदेव के निकट पहुंच सकता है और उनमें विलीन हो सकता है. इससे उसके जीवन में किसी भी तरह का कोई कष्ट नहीं बचेगा.

जिसका बृहस्पति बलवान होता है उसका परिवार समाज एवं हर क्षेत्र में प्रभाव रहता है. बृहस्पति बलवान होने पर, शत्रु भी सामना होते ही ठंडा हो जाता है. बृहस्पति प्रधान व्यक्ति को सामने देखकर हमारे हाथ अपने आप उन्हें नमस्कार करने के लिए उठ जाते हैं. बृहस्पति व्यक्ति कभी बोलने की शुरूआत पहले नही करते यह उसकी पहचान है. निर्बल बृहस्पति व्यक्ति का समाज एवं परिवार में प्रभाव नही रहता. ज्योतिष विद्या बृहस्पति की प्रतीक है.

न्यायाधीश, वकील, मजिस्ट्रेट, ज्योतिषी, ब्राम्हण, बृहस्पति, धर्मगुरू, शिक्षक, सन्यासी, पिता, चाचा, नाटा व्यक्ति इत्यादि बृहस्पति के प्रतीक हैं तो ज्योतिष, कर्मकांड, शेयर बाजार, शिक्षा, शिक्षा से संबंधित किताबों का व्यवसाय, धार्मिक किताबों और चित्रों का व्यवसाय, वकालत, शिक्षा संस्थाओं का संचालन इत्यादि बृहस्पति के प्रतीक रूप व्यवसाय है. इनमें सफलता प्राप्त करने के लिए बृहस्पति प्रतीकों का उपयोग करना चाहिए. बैंक मैनेजर,कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आदि बृहस्पति के प्रतीक है. फाइनेंस कंपनी, अर्थ मंत्रालय भी बृहस्पति के प्रतीक है.

चना दाल, शक्कर, खांड, हल्दी, घी, नमक, बृहस्पति की प्रतीक रूप चीजें है. संस्कृत बृहस्पति की प्रतीक भाषा है. ईशान्य या उत्तर बृहस्पति की दिशाएं है. शरीर में जांघ बृहस्पति का प्रतीक है. मंदिर मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च बृहस्पति के प्रतीक है. बृहस्पति का रंग पीला है.

घर की तिजोरी में बृहस्पति का वास है. बृहस्पति अर्थतंत्र का कारक है. ज्योतिषशास्त्र खजाने को बृहस्पति का प्रतीक मानता है. घर में रखे धर्मग्रंथ देखने से भी व्यक्ति के बृहस्पति का अंदाजा मिल जाता है.

रोग: अशुभ गुरु शरीर में कफ, धातु एवं चर्बी (मोटापा) की वृद्धि करता है. मधुमेह, गुर्दे का रोग, सूजन, मूर्च्छा, हर्निया, कान के रोग, स्मृति विकार, जिगर के रोग, पीलिया, फेफड़ों के रोग, मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों के रोग, हृदय को धक्का पहुंचना, पेट खराब करता है. मोटापे के बहुत सारे कारणों में से एक कारण आपकी कुंडली में बृहस्पति ग्रह का गलत जगह पर बैठना भी हो सकता है. जिन जातक की जन्म (लग्न) कुंडली में देव गुरू बृहस्पति किसी पापी ग्रह से दृष्ट हो, किसी पापी ग्रह के साथ युति हो अथवा गुरू की महादशा,अन्तर्दशा अथवा प्रतांतर चल रहा हो तब भी मोटापे का प्रभाव देखने में आता है. गुरू ग्रह की डिग्री (अंश) की भी भूमिका महत्वपूर्ण होती है, यदि बृहस्पति जन्मपत्रिका में अस्त या वक्री हों तो मोटापे से संबंधित दोष आते हैं और पाचन तंत्र के विकार परेशान करते हैं. जब-जब गोचर में बृहस्पति लग्न, लग्नेश तथा चंद्र लग्न को देखते हैं तो वजन बढने लगता है.

वास्तव में हमारे शरीर की संरचना हमारी कुंडली निर्धारित करती है. चंद्रमा, बृहस्पति और शुक्र ये तीन ग्रह शरीर में वसा की मात्रा को नियंत्रित करते हैं. वात, पित्त व कफ की मात्रा बढऩे से शरीर में मोटापा बढ़ता है. इसके अलावा यदि लग्न में जलीय राशि जैसे कर्क, वृश्चिक हो और इनके स्वामी भी शुभ हो या लग्न में जलीय प्रकृति का ग्रह हो तो शरीर पर मोटापा बढ़ेगा ही. ऐसी स्थिति में बाहरी उपाय की बजाय ग्रहों को मजबूत करना फायदा देगा.

बृहस्पति आशावाद के प्रतीक हैं, गुरू हैं तथा देवताओं के मुख्य सलाहकार हैं. वे उपदेशक हैं, प्रवाचक हैं तथा सन्मार्ग पर चलने की सलाह देते हैं. वे विज्ञान हैं, दृष्टा हैं तथा उपाय बताते हैं जिनसे मोक्ष मार्ग प्रशस्त हो. यदि गुरू अपने सम्पूर्ण अंश दे दें तो व्यक्ति महाज्ञानी हो जाता है.

बृहस्पति के उपाय हेतु जिन वस्तुओं का दान करना चाहिए उनमें चीनी, केला, पीला वस्त्र, केशर, नमक, मिठाईयां, हल्दी, पीला फूल और भोजन उत्तम कहा गया है. इस ग्रह की शांति के लिए बृहस्पति से संबंधित रत्न का दान करना भी श्रेष्ठ होता है. दान करते समय आपको ध्यान रखना चाहिए कि दिन बृहस्पतिवार हो और सुबह का समय हो. दान किसी ब्राह्मण, गुरू अथवा पुरोहित को देना विशेष फलदायक होता है. बृहस्पतिवार के दिन व्रत रखना चाहिए. कमज़ोर बृहस्पति वाले व्यक्तियों को केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पक्षियों विशेषकर कौओं को देना चाहिए. ब्राह्मणों एवं गरीबों को दही चावल खिलाना चाहिए. पीपल के जड़ को जल से सींचना चाहिए. गुरू, पुरोहित और शिक्षकों में बृहस्पति का निवास होता है अत: इनकी सेवा से भी बृहस्पति के दुष्प्रभाव में कमी आती है.

1. ऐसे व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए तथा महत्त्वपूर्ण समयों पर इनका चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिए.

2. सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए.

3. ऐसे व्यक्ति को मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर नि:शुल्क सेवा करनी चाहिए.

4. किसी भी मन्दिर या इबादत घर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से झुकाना चाहिए.

5. ऐसे व्यक्ति को परस्त्री / परपुरुष से संबंध नहीं रखने चाहिए.

6. गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख गौघृत का दीपक जलाना चाहिए.

7. गुरुवार के दिन आटे के लोयी में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए.

8. गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु गुरुवार का दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व-भाद्रपद) तथा गुरु की होरा में अधिक शुभ होते हैं. इन उपायों से होगा लाभ.

* गुरू आध्यात्मिक ज्ञान का कारक है अत: ब्राम्हण देवता, गुरू का सम्मान करे.

* वृहस्पति वार को ब्रम्ह वृहस्पताये नम: का जाप करे.

* यदि कुंडली में बृहस्पति खराब हो या उच्च स्थित हो (बुरे भाव का स्वामी होकर) तो तैलीय-मसालेदार भोजन से परहेज रखें. गले में हल्दी की गाँठ गुरूवार को धारण करने से मोटापे पर नियंत्रण हो सकता है. पीली वस्तुओं का दान और गुरू के मंत्र का जाप लाभ दे सकता है.

* कई बार गोचर के ग्रहों का लग्न से भ्रमण होने पर भी मोटापा बढ़ता है. अत: इन ग्रहों का अध्ययन करके अन्य उपायों के साथ इन उपायों को अपनाने से उपयुक्त फल प्राप्त हो सकते हैं.

* गुरूवार के दिन गुरू यानि देवगुरू बृहस्पति के वैदिक मंत्र जप से पेट रोग और मोटापे से पैदा हुई परेशानियों से निजात मिलती है. इनमें अपेंडिक्स, हार्निया, मोटापा, पीलिया, आंत्रशोथ, गैस की समस्या आदि प्रमुख है.

* बृहस्पति के दोषों के निवारण के लिए शिव सहस्त्र नाम जप, गऊ और भूमि का दान तथा स्वर्ण दान करने से अरिष्ट शांति होती है.

* गुरूवार के दिन देवगुरू बृहस्पति की पूजा में गंध, अक्षत, पीले फूल, पीले पकवान, पीले वस्त्र अर्पित कर इस गुरू का यह वैदिक मंत्र बोलें या किसी विद्वान ब्राह्मण से इस मंत्र के जप कराएं -

ऊँ बृहस्पतेति यदर्यो अर्हाद्युमद्विभार्ति क्रतुमज्जनेषु.

यद्दीदयच्छवसे ऋतु प्रजात तदस्मासु द्रविणं देहि चितम्.

संभव हो तो यह मंत्र जप करने या करवाने के बाद योग्य ब्राह्मण से हवन गुरू ग्रह के लिए नियत हवन सामग्री से कराना निश्चित रूप से पेट रोगों में लाभ देता है.

* गुरूवार को बृहस्पति पूजन में केले का पूजन लाभ देता है.

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-पं.प्रदीप मिश्रा शास्त्री

मोबाइल: 94251-61406

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