एक आधुनिक कहावत है कि गरीबों की प्लेट में उतने फल नहीं होते जितने अमीरों के शैंपू में होते हैं. कहने को ये बात मजाक में कही गई लगती है, लेकिन भारत की हकीकत कुछ ऐसी है जहां अभी आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी दो वक्त की रोटी की तलाश में ही रहता है. हाल ही में जारी की गई वैश्विक भुखमरी सूचकांक में 119 देशों की सूची में भारत को 100वां स्थान मिला है जो कि काफी दयनीय स्थिति है. सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया में लगभग 81 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्हें पौष्टिक भोजन नहीं मिल पाता है. सबसे ज्यादा बुरी हालत भारत जैसे विकासशील देशों की है. इससे लड़ने के लिए भारत में सरकार और गैर सरकारी संगठनों द्वारा कई प्रयास किए जा रहे हैं.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हुए नोएडा में सामाजिक कार्यकर्ता अनूप खन्ना द्वारा ऐसा ही प्रयास किया जा रहा है. अनूप गरीबों को सिर्फ पांच रुपये में दाल चावल और घी लगी हुई रोटी की व्यवस्था करते हैं. अनूप ने कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर 'दादी की रसोई' शुरू की है. उनका मकसद कम से कम पैसों में गरीबों को अच्छा भोजन उपलब्ध करवाना है. खन्ना ने बताया, 'हम ऐसा भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं जो न केवल पौष्टिक होता है बल्कि खाने पर घर के जैसा स्वाद मिलता है. हम उन लोगों के लिए काम कर रहे हैं जो पैसे के आभाव में अच्छा खाना नहीं खा पाते हैं.'

अनूप खुद इस पहल की देखरेख करते हैं और ध्यान रखते हैं कि गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए. इसके लॉन्च होने के सिर्फ एक महीने के भीतर ही पूरे शहर में इसकी चर्चा होने लगी. यहां पर रिक्शा चलाने वाले से लेकर दुकानदार, फेरीवाले, मजदूर जैसे लोग भोजन करने के लिए आते हैं. दिन में सिर्फ दो घंटे के लिए दोपहर 12 बजे से लेकर 2 बजे तक यह रेस्टोरेंट खुलता है और इस दरम्यान लगभग 500 लोगों का पेट भरा जाता है. भुखमरी से लड़ने के लिए रोटी बैंक जैसी और कई पहले चल रही हैं, लेकिन अनूप सिर्फ 5 रुपये में ही 500 लोगों का पेट भर रहे हैं.

नोएडा में दादी की रसोई के दो स्टाल हैं. एक सेक्टर 17 में है जो कि सुबह 10 से 11.30 तक खुलता है दूसरा सेक्टर 29 में है जो कि 12 से 2 बजे तक खाना खिलाने का काम करता है. यहां पर लंच करने को लेकर लंबी लाइन लग जाती है. इस पहल को शुरू करने का श्रेय अनूप की बेटी स्वाति को जाता है. हालांकि अनूप का पूरा परिवार इस पहल को सपोर्ट करता है. अनूप हर महीने अपनी ओर से 30,000 रुपये सिर्फ किचन में लगा देते हैं. हालांकि कई समाजसेवी और अच्छे लोग भी उनको दान करते हैं. अनूप बताते हैं कि हर रोज उन्हें स्टाल लगाने के लिए 2,500 रुपये खर्च करने पड़ जाते हैं.

आस-पास के दुकानदार भी अनूप की मदद करते हैं और उन्हें दाल, चावल, मसाले और नमक जैसी चीजें काफी कम दाम में उपलब्ध करवा देते हैं. वहां आसपास रहने वाले लोग जन्मदिन, शादी और किसी अन्य समारोह के दौरान बचने वाला खाना और खाद्य सामग्री दान कर देते हैं. अनूप पूरे नोएडा में ऐसी पहल शुरू करना चाहते हैं. वे कहते हैं कि ऐसा करना ज्यादा मुश्किल नहीं है, बस नीयत अच्छी होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के लिए रोटी, कपड़ा और दवा जैसी चीजें तो हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरते हैं और इसके बिना आज जिंदगी की कल्पना संभव नहीं है.

अनूप इसके अलावा एक और पहल चला रहे हैं जिसके तहत गरीब और बेसहारा लोगों को कपड़े, जूते और किताबें जैसी चीजें दान की जाती हैं. उन्होंने नोएडा में पहली प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की भी स्थापना की है. इस योजना के तहत किफायती दाम में गरीबों को दवाईयां उपलब्ध करवाई जाती हैं. अनूप इलाके में दवाएं की दो दुकानें संचालित करते हैं. आसपास कोई हादसा होने पर लोग सबसे पहले अनूप को ही बुलाते हैं और वे सिर्फ एक फोन करने पर फौरन जगह पर मौजूद हो जाते हैं. अनूप के पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रह चुके हैं और उन्हीं से अनूप ने समाजसेवा की प्रेरणा ली है.

साभार:yourstory.com

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