साल 2018 को लेकर हर इंसान में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. हर इंसान चाहता है कि उसका आने वाला साल गुजरे हुए सालों से बेहतरीन हो. हर कोई चाहता है कि उसका नया साल उसके लिए ढेर सारी खुशियां लेकर आए और साथ ही उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहे. ऐसे में हिंदू धर्म के शास्त्रों के अनुसार हर इंसान पर उसके ग्रह और नक्षत्रों का गहरा प्रभाव पड़ता है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि शनि देव को सबसे क्रूर देव माना जाता है. अगर शनिदेव क्रोध में आकर किसी पर अपना प्रकोप ढा दे तो उस इंसान की जिंदगी नर्क से भी बदतर हो सकती है. ऐसे में साल 2018 में भी शनिदेव कुछ राशियों पर अपना अच्छा प्रभाव डालने वाले हैं तो कुछ पर बुरा.

मेष

मेष राशि के लिए नया साल कुछ खास बढ़िया नहीं जाने वाला.  इस आने वाले साल में मेष राशि के जातकों पर शनि का प्रकोप शुरू हो जाएगा जिससे उन पर शनि की बुरी दृष्टि बनी रहेगी. ऐसे में मेष राशि वाले लोगों को सतर्क रहने की अधिक जरूरत है. क्योंकि इस नए साल में शनि देव सबसे ज्यादा असर आपके व्यवसाय पर डालने वाले हैं जिससे आपको धनराशि की कमी होना तय है. शनि के प्रकोप से बचने के लिए आप शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करें और परिवार में शांति बनाए रखें.

वृषभ

वृषभ राशि के जातकों के लिए हम बता दें कि यह आने वाला नया साल आपके लिए कुछ खास नहीं रहेगा. क्योंकि इस नए साल के आने के साथ-साथ आप पर शनि देव की कृपा दृष्टि भी बनी रहेगी जिसके कारण आपके काम बनते और बिगड़ते रहेंगे. इस साल आपको कई कामों के लिए नुकसान होना तय है साथ ही आपको अपनी कोई कीमती चीज खोनी पड़ सकती है. ऐसे में आप को डरने या घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि इससे बचने का एकमात्र उपाय यह है कि आप शनिवार के दिन शनि महाराज की सच्चे मन से पूजा और आराधना करें साथ ही जितना अधिक हो सके दान-पुण्य करें.

मिथुन

अगर बात मिथुन राशि के जातकों की की जाए तो इस आने वाले नए साल में मिथुन राशि पर शनि की विशेष कृपा दृष्टि रहेगी. तो यह मान लीजिए कि इस नए साल में मिथुन राशि के लोगों के बिगड़ते काम बन जाएंगे. हालांकि इस साल के बीच के महीनों में उन्हें कुछ दिक्कतें आ सकती हैं परंतु बाकि पूरा साल उनके लिए खुशनुमा बना रहेगा. इसके इलावा मिथुन राशि के युवक और युवतियों के लिए यह साल काफी अच्छा रहेगा. इसके इलावा मिथुन राशि के लोगों को अच्छे साथी मिलने के मौके भी प्राप्त होंगे.

शनिदेव के प्रकोप से बचना है तो ना करें ऐसे काम

शनि क्रूर देव नहीं हैं? हम गलत करेंगे, तो वे हमें दंड देंगे, लेकिन यदि हमसे अंजाने में गलती हुई है और बाद में इसका पछतावा करेंगे, तो वे हमें माफ भी कर देंगे.

हम गलती करें ही नहीं, तो उनसे डरने की क्या आवश्यकता है. आखिर वे सूर्य पुत्र हैं, क्या उन्हें थोड़ा सा सरसों के तेल और कुछ सिक्कों से हम उन्हें लुभा सकते हैं.

शनि का स्मरण आते ही हमारे दिमाग में जो बिंब उभरता है, वह एक ऐसे देव का है, जिनका रंग काला है, जिनके एक हाथ में तीर और दूसरे में धनुष है. जिनकी सवारी विशाल गिद्ध या विशाल कौआ है.कुल मिलाकर शनि की जो तस्वीर बनाई गई है, वह हमारे दिमाग में खौफ पैदा कर देती है. ऐसा ही खौफ यमराज के स्मरण से पैदा होता है. वैसे भी शनि को यमराज का बड़ा भाई बताया गया है.

काला रंग, गिद्ध की सवारी और फिर यमराज का भाई जैसी काल्पनिक कथाओं ने हमारी आदिम चेतना, जो आरंभ से ही अंधकार के कालेपन से सबसे अधिक भयभीत रहती थी, को शनि के प्रति पूर्वाग्रही बना दिया है.

ज्योतिषीय दृष्टि से भी देखें तो शनि यदि कहीं हानि पहुंचाते हैं, तो कहीं लाभ भी देते हैं. लेकिन हमारा दिमाग शनि से कुछ इतना ज्यादा खौफजदा है कि हम शनि के नाम पर व्यापार करने वालों का ही भला करते हैं.पौराणिक ग्रंथों की मानें तो शनि सूर्य के पुत्र हैं और वे न्याय के देवता हैं. हम जो भी अच्छा या बुरा करते हैं, उसे शनि अपने न्याय के तराजू में तौलकर उसका परिणाम हमें उसी तरह लौटा देते हैं. वे अपने न्याय में सही का साथ देते हैं. यहां शनि काला कोट पहने हुए एक तटस्थ न्यायाधीश की तरह होते हैं.

न किसी के दोस्त और न ही दुश्मन. इस प्रकार शनि ब्रह्मंड में प्रकृति के कर्म के इस सिद्धांत को कार्यरूप देता है कि ‘जो जैसा करेगा, वह वैसा ही भरेगा.’

अब एक आखिरी बात. जो न्यायी होगा, उसे गलत काम करने वालों के प्रति क्रूर होना ही पड़ता है. उन्होंने तो अपने पिता सूर्य तक को नहीं छोड़ा. पौराणिक कथा के अनुसार, शनि जब गर्भ में थे, तब उनकी माता छाया ने शिव की कड़ी तपस्या में खाना-पीना छोड़ दिया था. इसका दुष्प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ा, जिससे शनि का रंग काला हो गया.

पुत्र के जन्म के बाद सूर्य ने छाया पर आरोप लगाया कि ‘यह मेरा पुत्र जान नहीं पड़ता.’ इस गलत आरोप को शनि बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्होंने जैसे ही अपने पिता को गुस्से से देखा, सूर्य का रंग काला पड़ गया. सूर्य के माफी मांगने पर उनका रंग लौट आया.

जाहिर है कि ऐसे में गलत काम करने वालों और सोचने वालों को शनि से डरना ही चाहिए. शनि से ही क्यों, उन्हें तो प्रत्येक से डरना चाहिए. मुश्किल यह कि चूंकि सही काम करने वालों की संख्या बहुत कम है, इसलिए शनि से डरने वालों की संख्या ज्यादा दिखाई देती है.

नोट: आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ भिन्नता हो सकती है. पूरी जानकारी के लिए किसी पंडित या ज्योतिषी से मिल सकते हैं.

कुंडली में दोष है? टेंशन नहीं लें..... और परामर्श के लिए संपर्क करें:

* पं.प्रदीप मिश्रा शास्त्री,

मोबाइल: 94251-61406

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