महादशा जब भी किसी ग्रह की शुरू होती है तब जीवन एक नया मोड़ लेता है. कुछ लोगों की शादी महादशा शुरू होने पर होती है. कुछ लोगों के बच्चे महादशा के शुरुआत में होते हैं. कुछ लोगों की नौकरी लगती है या तरक्की नई महादशा में होती है. कुछ लोग विदेश नई महादशा में जाते हैं. कुछ लोग विदेश से वापिस आते हैं. कुछ लोगों का नाम होता है कुछ लोग बदनाम भी होते हैं. इस तरह महादशा में जो भी होता है वह महत्वपूर्ण होता है. इसलिए अपनी कुंडली देखिये कि अगली महादशा कब है. यदि आप जानना चाहते हैं कि समय कब बदलेगा तो महादशा में इसका स्पष्ट उत्तर लिखा है. ज्योतिष का यह नियम यदि आप सीख लेंगे तो केवल विमशोत्तरी महादशा के आधार पर अपनी कुंडली स्वयं देख पाएंगे और भविष्य में कब क्या होगा इसका अनुमान भी आप लगा पाएंगे. 

महादशा एक परिचय

कुंडली में एक ग्रहों की समय सारिणी होती है जिसमे लिखा रहता है कि कौन सा ग्रह कब तक आप के जीवन में प्रभावी रहेगा. ग्रहों का मुख्य प्रभाव काल महादशा और उसके बाद अन्तर्दशा फिर प्रत्यंतर दशा कहलाता है. हर ग्रह की अपनी अवधि अपना समय होता है जिसके अंतर्गत जातक का जीवन चलता है. क्रमानुसार ग्रहों की दशा और प्रभाव काल इस प्रकार है.

सूर्य 6 वर्ष, चन्द्र 10 वर्ष, मंगल 7 वर्ष, राहू 18 वर्ष, गुरु 16 वर्ष, शनि 19 वर्ष, बुध 17 वर्ष, केतु 7 वर्ष, शुक्र 20 वर्ष.

महादशा में अन्तर्दशा

यह सारिणी विंशोत्तरी महादशा के नाम से कुंडली में दी होती है. अब बात करते हैं महादशा के समय की. महादशा सबसे कम सूर्य की छः वर्ष होती है. शुक्र की महादशा बीस वर्ष चलती है. मैं अपने अनुभव के आधार पर बता रहा हूँ कि महादशा किसी भी ग्रह की हो परन्तु जब भी समाप्त होती है तब आपके जीवन में बड़े बदलाव आते हैं. महादशा का समाप्ति काल हमेशा कुछ न कुछ देकर जाता है.

महादशा में क्या होता है

महादशा के अंत में कोई न कोई उपलब्धि आपको जीवन में अवश्य होगी. कोई ग्रह चाहे उच्च का हो या नीच का, मित्र राशि में हो या शत्रु राशि में अपनी राशि में हो या अस्त अशुभ हो या शुभ अपनी महादशा के समय में पूरी तरह से बुरा या अच्छा फल नहीं देता. एक ही ग्रह एक ही समय में शुभ और अशुभ दोनों तरह के फल दे सकता है इसका कारण यह है कि महादशा में अन्य ग्रहों की भी दशा होती है जिसे अन्तर्दशा कहा जाता है. जिस ग्रह की महादशा होती है उस ग्रह के समय में अन्य सभी ग्रहों की अन्तर्दशा चलती है. इस तरह प्रत्येक ग्रह का प्रभाव जातक पर पड़ता है.

महादशा के दौरान व्यक्ति जो काम करता है अगली महादशा में उस काम में बदलाव आते हैं. इस तरह समय सदा एक सा नहीं रहता यह कहावत सत्य प्रतीत होती है. यदि महादशा का ग्रह यदि कोई पाप ग्रह है तो अशुभ घटनाएं और शुभ ग्रह है तो मांगलिक कार्य जीवन में सम्पन्न होते हैं. इसी तरह अशुभ ग्रह की महादशा में अशुभ ग्रह की अन्तर्दशा आने पर समय भी कठिनता से गुजरता है. नीचे दिए गए चित्र में राहू की महादशा में केतु, मंगल और शनि को पाप ग्रह में पाप ग्रह की अन्तर्दशा के रूप में दर्शाया गया है. इस जातक की राहू महादशा केतु अन्तर्दशा में पैर पर चोट लगी जो दस महीने बाद ठीक हुई. शनि की महादशा में माँ और चाचा की मृत्यु का समाचार मिला और मंगल की दशा में प्रापर्टी का नुक्सान हुआ.

निष्कर्ष

केवल एक समय सारिणी यह बताती है कि कोई घटना कब होगी. आपके जीवन के प्रारम्भ से लेकर एक सौ बीस वर्ष तक चलने वाली महादशा में आप अपने भूत काल की तारीखों और जीवन की घटनाओं का अवलोकन करने के बाद यह पता लगा सकते हैं कि कब क्या किस ग्रह के कारण हुआ था और इसी तरह भविष्य  में कब क्या होगा इसका एक मोटा अनुमान लगा सकते हैं. हर ज्योतिषी इसी सारिणी की मदद से आपके भविष्य में होने वाली घटनाओं का पता लगाता है. इसीलिए इस सारिणी को इतना महत्व दिया गया है. इस तरह जो काम आप किसी ज्योतिषी से करने की अपेक्षा रखते हैं वह आप स्वयं भी जान सकते हैं.

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जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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