इस बार दीपावली पर्व 19 अक्तूबर को  मनाया जा रहा है दीपावली पूजन का महत्व काली रात्रि और स्थिर लग्न  मे विशेष माना जाता है विशेष तौर पर कार्तिक अमावस्या को ही दीपावली पूजन का विधान है वैसे भी महालक्ष्मी और अँधेरे का गहरा सम्बंध है धन को छुपाकर ही रखा जाता है.

*स्थिर लग्न मे पूजन का विधान*- अधिकतर लोग स्थिर लग्न मे ही  महालक्ष्मी का पूजन करते है जो भी स्थिर लग्न अमावस्या को रात्रि मे आयॆ उस लग्न मे महालक्ष्मी का पूजन करने से लक्ष्मी की स्थिरता आपके घर मे बनी रहती है वैसे तो  चार स्थिर लग्न है पहला वृषभ दूसरा सिंह तीसरा वृश्चिक चौथा कुम्भ.सामान्यतः दीपावली की रात्रि मे वृषभ लग्न मिल ही जाया करता है जिसमे सभी लोग महालक्ष्मी का पूजन करते है सिंह लग्न मध्य रात्रि 12 से 4 बजे के बीच आता है इस समय घनी रात्रि रहती है यदि इस समय अमावस भी हो तो  क्या कहने सोने पर सुहागा.हमारे पाठको को हम इस दीपावली मे एक विशेष जानकारी देने जा रहे है जो आपके लिये विशेष लाभदायक है.

*सिंह लग्न और वृषभ लग्न का समय*- इस बार दीपावली गुरुवार को आ रही है जो अति शुभ है अमावस्या तिथि बुधवार को 11:17 रात्रि  से गुरुवार को 11:26रात्रि  तक  रहेगी इस अमावस मे ही  महालक्ष्मी पूजन का विधान है जो लोग सिंह लग्न  मे पूजन  करना चाहते  है  उन्हे इस बात का ध्यान  रखना पड़ेगा की  गुरूवार को  रात्रि 11:26 को अमावस समाप्त हो जायेगी इसके बाद पूजन करने का कोई  मतलब नही,तो  फ़िर क्या करे इस बार सिंह लग्न और अमावस मे पूजन नही  हो पायेगा ऐसा नही  है इस बार जो भी सिंह लग्न  मे पूजन करना चाहते है उन्हे बुधवार 12 बजे रात्रि के पश्चात गुरुवार और 19 तारीख को  अमावस तिथि मे 12 से 4 बजे के बीच  मे जब भी सिंह लग्न आता है उस समय पूजन  करे जो  लोग इस समय पूजन  नही  कर सकते वे गुरुवार की  शाम को प्रदोष काल  मे रात्रि 7 से 10 के बीच मे वृषभ लग्न  मे पूजन कर सकते है लेकिन ध्यान रहे गुरुवार को रात्रि 12बजे के बाद 20 तारीख लग जायेगी उस समय  अमावस भी नही  रहेगी शुक्रवार का दिन लग जायेगा इसमे कोई  भी पूजा अमान्य है.भोपाल इन्दौर मे सिंह लग्न तथा वृषभ लग्न मे पूजा का समय इस प्रकार रहेगा.

*भोपाल*-बुधवार 12के बाद गुरूवार लग जायेगा.

गुरूवार सुबह 2:03 बजे  से सुबह 4:07तक  सिंह लग्न.

गुरुवार प्रदोष काल वृषभ लग्न  रात्रि 7:28 से 9:27तक.

*इन्दौर*-गुरूवार सुबह 2:05 बजे से 4:09 बजे तक सिंह लग्न.

गुरुवार प्रदोष काल रात्रि 7:30 से 9:31तक वृषभ लग्न.

उपरोक्त समय महालक्ष्मी पूजन का शुध्द व सही मुहूर्त है इस समय किया गया पूजन आपको श्रेष्ठ फल देगा.

*महालक्ष्मीपूजन और श्रीसूक्त का पाठ*

यह ऋग्वेद के दूसरे अध्याय के छठे सूक्त में आनंदकर्दम ऋषि द्वारा श्री देवता को समर्पित काव्यांश है. लक्ष्मी साधना के सिद्ध मंत्र के रूप में प्रतिष्ठित इस रचना का यह हिन्दी अनुवाद है.

*हरित और हिरण्य-वर्णा

हार स्वर्ण, रजत सुशोभित

चन्द्र और हिरण्य आभा

देवि लक्ष्मी का, अग्नि अब तुम करो आवाहन.

करो आवाहन, हमारे गृह अनल

उस देवि श्री का अब, वास हो जिसका सदा

और जो दे धन प्रचुर, गो, अश्व, सेवक, सुत सभी.

अश्व जिनके पूर्वतर, मध्यस्थ रथ

हस्ति- रव से प्रबोधित पथ, देवि श्री का आगमन हो, प्रार्थना है.

परा रूपा, हसित-आभा, हेम-वदना, आर्द्र-करुणा

तप्त, तृप्त, सुशीतकर, पद्म स्थित

पद्म-वर्णा, देवि श्री का आगमन हो.

चन्द्रकान्ता, कीर्ति से प्रज्वलित

लोक-श्री, सुरलोक पूजित, उदारा

देवि पद्मा की शरण हूँ

दूर हो दारिद्र्य, तेरी दया हो.

सूर्य-प्रभ, तप प्राप्य, तुझ से ही हुआ

वनस्पति में विल्व तरु, फल तप रूप

आह्लादित उर करे, निर्गमित करदे सकल दारिद्रय मेरा.

सुर- सखा, करदो कृपा

कीर्ति, मणियों सहित मुझ पर

मैं इस राष्टृ में पैदा हुआ

अब धन,कीर्ति, वैभव मुझे दो.

क्षुत्, पिपासा, मलिनता, जो ज्येष्ठा-श्री

आदि सब को नष्ट करता हूँ

अयश, निर्धनता सभी मेरे, पलायन करो गृह से.

गन्ध सेवित, दुर्जयी, सन्तुष्ट नित, गज स्वामिनी

ईश्वरी सब प्रणियों की, देवि श्री की अर्चना है यह.

कामनायें पूर्ण हों मन की, सत्य वाणी में बसे मेरी

अन्न, पशु, वैभव, सुयश सब देविहमें श्री, श्रेयस् मिले.

प्रजा कर्दम की सभी हम, सदा आगे ही रहें कर्दम

कुल हमारे सम्पदा श्री रहे, माँ हमारी पद्म-माला.

जल सुशीतल, स्नेह वर्षा करे गृह

सदा कुल मेरे रहे श्रेयस्, जननि देवी.

आर्द्र-कमला, आप्त, पिंगल, पद्म-माला

चन्द्र और हिरण्य आभा, देवि श्री का, अग्नि आवाहन करो.

आर्द्र, अनुशासक, सुवर्णा, दण्डधारी हेम- माला,

सूर्य-द्युति, स्वर्णिम, देवि श्री का, अग्नि आवाहन करो.

अग्नि लाओ देवि-श्री वह, जो कभी जाती नहीं

आगमन से जिसके मुझे हो प्राप्त

प्रचुर धन, गो, अश्व, सेवक और संतति.

॥ श्री सूक्त सम्पूर्ण ॥

*महालक्ष्मी के विषय मे सम्पूर्ण जानकारी*-मां लक्ष्मी अपने भक्तों की धन से जुड़ी हर तरह की समस्याएं दूर करती हैं. इतना ही नहीं, देवी साधकों को यश और कीर्ति भी देती है.

*मां लक्ष्मी की महिमा*-

धन और संपत्ति की देवी हैं मां लक्ष्मी,माना जाता है कि समुद्र से इनका जन्म हुआ और इन्होंने श्रीविष्णु से विवाह किया.

इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है, साथ ही वैभव भी मिलता है,अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएं, तो घोरदरिद्रता का सामना करना पड़ता है,ज्योतिष में शुक्र ग्रह से इनका सम्बन्ध जोड़ा जाता है,इनकी पूजा से केवल धन ही नहीं, बल्कि नाम, यश भी मिलता है,इनकी उपासना से दाम्पत्य जीवन भी बेहतर होता है.

*लक्ष्मी की पूजा के नियम*-

मां लक्ष्मी की पूजा सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनकर करनीचाहिए,इनकी मध्यरात्रि मे करनी चाहिये,मां लक्ष्मी के उस प्रतिकृति की पूजा करनी चाहिए, जिसमें वह गुलाबी कमल के पुष्प पर बैठी हों, साथ ही उनके हाथों से धन बरस रहा हो,मां लक्ष्मी को कमल चढ़ाना सर्वोत्तम रहता है,मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप स्फटिक की माला से करने पर वह तुरंत प्रभावशाली होता है,मां लक्ष्मी के विशेष स्वरूप हैं,जिनकी उपासना शुक्रवार के दिन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है.

*धन से जुड़ी अलग-

अलग आर्थिक समस्याओं के लिए महालक्ष्मी का पूजन*-नियमित धन प्राप्ति के लिए: धन लक्ष्मी की पूजा.

* मां लक्ष्मी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें उनके हाथों से धन गिर रहा हो.

*चित्र के समक्ष घी का एक बड़ा सा दीपक जलाएं, इसके बाद उनको इत्र समर्पित करें,वही इत्र नियमित रूप से प्रयोग करें.

*विभिन्न राशियों के लिये लक्ष्मी पूजन*-

*मेष,सिंह और धनु*- ये तीनो अग्नि तत्व प्रधान राशि है इन  राशि वालों के लिए धन लक्ष्मी की पूजा विशेष लाभकारी होती है,मां लक्ष्मी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें उनके पास अनाज की ढेरी हो.चावल की ढेरी पर लक्ष्मीजी का स्वरूप स्थापित करें उनके सामने घी का दीपक जलाएं, उनको चांदी का सिक्का अर्पित करें. पूजा के उपरान्त उसी चांदी के सिक्के को अपने धन स्थान पर रख दें.

*मिथुन, तुला और कुम्भ राशि*- इन राशि वालों के लिए गजलक्ष्मी के स्वरूप की आराधना विशेष होती है,कारोबार में धन की प्राप्ति के लिए गज लक्ष्मी की पूजा,लक्ष्मीजी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें दोनों तरफ उनके साथ हाथी हों.

लक्ष्मीजी के समक्ष घी के तीन दीपक जलाएं, मां लक्ष्मी को एक कमल या गुलाब का फूल अर्पित करें,पूजा के उपरान्त उसी फूल को अपनी तिजोरी मे रख दें.

*वृष, कन्या,मकर*- इस राशि के लोगों के लिए ऐश्वर्यलक्ष्मी की पूजा विशेष होती है,नौकरी में धन की बढ़ोतरी के लिए: ऐश्वर्य लक्ष्मी की पूजा,गणेशजी के साथ लक्ष्मीजी की स्थापना करें,गणेशजी को पीले और लक्ष्मीजी को गुलाबी फूल चढ़ाएं, लक्ष्मीजी को अष्टगंध चरणों में अर्पित करें, नित्य प्रातः स्नान के बाद उसी अष्टगंध का तिलक लगाएं.

*कर्क, वृश्चिक और मीन राशि*- इस राशि के लिए वरलक्ष्मी की पूजा विशेष होती है.

धन के नुकसान से बचने के लिए: वर लक्ष्मी की पूजा मे लक्ष्मीजी के उस स्वरूप की स्थापना करें  जिसमें वह खड़ी हों और धन दे रही हों,उनके सामने सिक्के तथा नोट अर्पित करें,पूजन के बाद यही धनराशि अपनी तिजोरी मे रखें, इसे खर्च न करें.

उपरोक्त विधि विधान से पूजन करने पर महालक्ष्मी आप पर प्रसन्न होगीं तथा घर मे समृद्धि व प्रसन्नता आयेगी.

*देश के प्रमुख शहरों मॆ वृषभ लग्न मॆ महालक्ष्मी पूजन का शुध्द समय*

 *दिल्ली 7:12 से 9:12शाम*  *चंडीगढ़ 7:10से 9:09*

 *अमृतसर 7:17से 9:16*

 *शिमला 7:10 से 9:09*

 *श्रीनगर  7:13 से 9:13* *जम्मू 7:15 से 9:14*

 *जयपुर 7:22 से 9:21*

 *जैसलमेर 7:40 से 9:40*

 *जोधपुर 7:35 से 9:35*

 *अहमदाबाद 7:40 से 9:40*

*भुज 7::53 से 9:53*

 *मुम्बई 7:45 से 9:45*

 *नागपुर 7:19 से 9:19*

*औरंगाबाद महाराष्ट्र 7:35 से 9:35*

 *हैदराबाद 7:25 se 9:25*

 *बंगलौर 7:35 से 9:35*

  *चेन्नई 7:24 से 9:24*

  *हुबली 7:45 से 9:45*

 *उडिपि 7:47 से 9:47*

 *सीलीगुरी 6:33 से 8:33*

 *कोलकता 6:40 से 8:40*

 *गौहाटी 6:20 से 8:20*

 *डिब्रुगड 6:03 से 8:03*

 *इटानगर 6:10से 8:10*

 *आईजोल 6:20se8:20*

 *इम्फाल 6:13 से 8:11*

 *तिरुचिरापली 7:35 से 9:93 नागेर्कॉइल केरल 7:45 से 9:45*

 *पटना 6:48 से 8:48*

*रांची 6:50से 8:50*

*बिलासपुर छतीसगढ़ 7:05se9:04*

 *रायपुर 7:08 से 9:08*

 *हरिद्वार 7:07 से 9:07*

 *बनारस 6:53 से 8:53*

 *लखनऊ 6:59 से 8:59* *तिरुपति 7:28 से 9:28*

*पुरी 6:55 से 8:55*

*इन्दौर 7:28 से 9:27*

 *ग्वालियर 7:14 से 9:14*

 *भोपाल 7:20 से 9:20*

 *जबलपुर 7:10 से 9:10*

हमने देश के हर हरे बड़े शहर मॆ स्थिर लगन वृषभ का पूजन काल निकाला है आपके  नगर मॆ पूजन का समय आपको निकालना है तो   उपरोक्त नगरों के आसपास अपना शहर खोजें तथा दिये गये समय मॆ ही पूजा करें।

*प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"*

9893280184,7000460931

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