भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात की हुआ था जबकि भगवान राम का जन्म चैत्र मास मॆ नवमी तिथि को मध्य दोपहर मॆ हुआ था.यह सभी भगवत भक्तो के लिये विचारणीय तथ्य है की भगवान राम ने सूर्य वंश मॆ चैत्र मास मॆ भरी दोपहर को नवमी तिथि मॆ तथा कृष्ण ने चंद्रवंश मॆ भादों की काली रात मॆ जन्म लिया था.नवमी तिथि की स्वामी मां दुर्गा तथा अष्टमी तिथि के स्वामी भगवान शिव है.त्रेता मॆ भगवान राम ने मां दुर्गा की शक्ति की साधना के बल पर रावण सहित सभी दुष्ट शक्तियों को संहार किया इसीलिये चैत्र मास मॆ मां दुर्गा की साधना की जाती है वही भगवान कृष्ण द्वापर मॆ कंस जरासंघ कौरव तथा समस्त आतताइयॉ  को महाकाली की शक्ति से नष्ट किया.त्रेता मॆ रावण सहित सभी शत्रु अहंकारी तथा नीतिवान थे वही द्वापर मॆ कंस जरासंघ शकुनि धृतराष्ट्र कुटिल तथा अहंकारी थे.कलयुग मॆ भगवान राम की मर्यादा से ज्यादा कृष्ण की नीति अधिक फलदायी है क्योंकि राम के समय शत्रु बाहरी थे कृष्ण मॆ समय आंतरिक शत्रुओं का बोलबाला था कलयुग मॆ दोनो तरह के शत्रु है जिसका मुकाबला हम भगवान राम तथा कृष्ण की संयुक्त नीति से ही करना होगा.

*राम का उजला तथा कृष्ण का काले से सम्बंध*-

भगवान राम ने सूर्य वंश मॆ जन्म लिया सूर्य का सम्बंध दिन तथा आत्मा से है सूर्य की चाल हमेशा एक जैसी रहती है उसकी गति मॆ कभी अंतर नही आता वही चंद्र का कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष भी है चंद्र घटता बढ़ता है राम ने युद्ध मॆ कभी छल कपट का सहारा नही लिया जबकि कृष्ण मॆ शत्रु को ख़त्म करने के लिये छल कपट चतुराई का सहारा लिया.भगवान राम स्थिर तथा मर्यादित थे भगवान कृष्ण चुलबुल नटखट तथा नीति से शत्रु को मारने वाले थे युद्ध मैदान से भागने के कारण वे रणछोड़ भी कहलाये.राम चौदह कला सम्पन्न अवतार थे तो कृष्ण पूर्ण कला सम्पन्न परमअवतार थे.

*अष्टमी तिथि तथा कृष्ण*

-ज्योतिष मॆ आठ (8)अंक का खास महत्व है शनिदेव इस अंक के स्वामी है कुंडली मॆ आठवां स्थान म्रत्यु का है इस तिथि मॆ की गई पूजा पाठ महान म्रत्युतुल्य संकट मॆ विजय दिलाती है.जन्माष्टमी मॆ भगवान कृष्ण की पूजा धन धान्य तथा ऐश्वर्य की प्राप्ति कराती है.

*जन्माष्टमी तथा शनिदेव*-

भगवान राम के अवतार मॆ सूर्य मंगल तथा गुरु ग्रह का महत्व है तो कृष्ण अवतार मॆ बुध शुक्र शनि तथा राहु का महत्व है  राम अवतार मॆ पुरुष पक्ष की महिमा है तो कृष्ण अवतार मॆ महिला पक्ष का गुणगान है.भगवान कृष्ण का अवतार *निष्काम कर्मयोग* द्वारा मन को स्थिर करना तथा शनिदेव की महत्ता का वर्णन है.भगवान कृष्ण की पूजा से शनि शुक्र जैसे ग्रहों की अनिष्टता कम होती है.इसीलिये मन लगाकर जन्माष्टमी मनाईये कृष्ण तत्व का महत्व समझकर अपने जीवन को सफल कीजिये.

*प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु"*

9893280184,7000460931

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