नई दिल्ली. रूसी हैकरों ने पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से कुछ दिन पहले अमेरिका की एक वोटिंग सॉफ्टवेयर कंपनी को हैक किया था. वहीं अब एक खबर आ रही है कि कतर संकट के लिए पीछे भी रूस का ही हाथ है. मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक अमेरिकी जांचकर्ताओं का मानना है कि रूसी हैकरों ने झूठी खबर (फेक न्यूज) चलाकर कतर के सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों के साथ रिश्ते खराब कर दिए और राजनयिक संबंध भी तुड़वा दिये. अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने मामले की जांच में कतर सरकार की मदद के लिए एक टीम दोहा भेजी है.

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीआई के विशेषज्ञों ने मई के अंत में कतर का दौरा एक कथित साइबर हमले की जांच के लिए किया. उन लोगों ने देखा कि हैकर्स ने कतर की सरकारी न्यूज एजेंसी पर झूठी खबर डाल दी थी. उसी झूठी खबर को हवाला देकर सऊदी अरब ने कतर से राजनयिक और आर्थिक संबंध तोड़ने का फैसला लिया.

कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल सानी ने सीएनएन को बताया कि एफबीआई ने हैक और फर्जी खबर डालने की पुष्टि कर दी है. उन्होंने सीएनएन से बताया, 'जो कुछ भी आरोप लगाए गए हैं, वे सभी गलत सूचना के आधार पर हैं और हमारा मानना है कि सारी संकट की जड़ यह गलत सूचना ही है.'

इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले विदशी दौरे के समय सऊदी में ईरान की आलोचना कर चुके हैं. मालूम हो कि पांच जून को सऊदी अरब, बहरीन, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात समेत सात देशों ने कतर के साथ राजनयिक रिश्ते खत्म कर लिए हैं. इन देशों ने कतर के साथ राजनयिक रिश्तों के साथ जमीन, समुद्र और हवाई संपर्क भी खत्म कर दिए. आतंकी और चरमपंथी संगठनों को समर्थन का आरोप लगाते हुए कतर के खिलाफ ये एक्शन लिया गया. 

बताया जा रहा है कि 23 मई को कतर न्यूज एजेंसी ने एक खबर प्रकाशित की थी, जिसमें कतर के अमीर के हवाले से कहा गया कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान क्षेत्रीय और इस्लामिक शक्ति है. लिहाजा इसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. हालांकि कतर का कहना है कि यह खबर झूठी है और हैकिंग के जरिए प्लांट की गई है. कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी का कहना है कि अब एफबीआई ने भी हैकिंग और फेक न्यूज की पुष्टि कर दी है. 

गौरतलब है कि सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने सोमवार को कतर से सभी तरह के संबंध तोड़ने की घोषणा की. कतर पर चरमपंथी गुटों की मदद करने और सऊदी अरब के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी ईरान का समर्थन करने के आरोप लगाए गए. दूसरी तरफ कतर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. इस विवाद में ट्रंप सऊदी अरब के साथ खड़े नजर आए हालांकि कतर में अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री बेस है. 

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