2014 में योशा गुप्ता ने हांगकांग में Lafalafa की शुरूआत की. स्टार्टअप को लेकर योशा की सोच काफी स्पष्ट और सरल थी. यदि वे ई-कॉमर्स कंपनियों की एक भागीदार बन जायें तो वे अपने कमीशन का अधिकांश हिस्सा उन उपभोक्ताओं को दे सकती हैं, जो उनकी Lafalafa साइट से कूपन खरीदते हैं और साथ ही इसकी मदद से ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर बिक्री में बढ़ोतरी भी की जा सकती है. आने वाले कुछ सालों में भारत में ऑनलाइन ई-कॉमर्स बाजार 100 अरब डॉलर के पार भी जा सकता है और इससे संबंधित उद्योग जीएमवी में 15-20 प्रतिशत योगदान देता है. योशा कहती हैं, "इस क्षेत्र में प्रतियोगिता के साथ ही एक बड़ा मौका भी है." MySmartPrice, CouponDunia, Grabon, Cashkaro, और Pennyful आदि Lafalafa के बड़े प्रतिद्वंदी हैं.

योशा गुप्ता के 'LafaLafa' का चयन 500 स्टार्टअप्स में किया गया है, क्योंकि योशा का बिज़नेस मोबाइल पर केंद्रित है और उसको अपनाने वालों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी. 'LafaLafa' के बिज़नेस का 70 प्रतिशत हिस्सा एंड्रॉयड एप से आया है.

योशा कहती हैं “हम व्यक्तिगतकरण पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि हम अपने उपयोगकर्ताओं को अधिक प्रासंगिक ऑफ़र सुझा सकें.” साथ ही कंपनी ऑफ़लाइन व्यापार मॉडल पर भी काम करा रही है. जिस के विकास में स्टोर कूपन और कैशबैक स्वाभाविक रूप से शामिल होंगे. कंपनी ने 500 से भी अधिक ऑनलाइन ब्रांडों के साथ करार किया है, जिसमे फ्लिपकार्ट, पेटीएम, स्नैपडील और शॉपकैवेल जैसे सभी शीर्ष ब्रांड शामिल हैं.

विकासशील देशों की महिलाओं के लिए पश्चिमी बाजारों में पकड़ बना कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराना कभी आसान काम नहीं रहा और इस हालात को और बदतर बनाने वाली बात ये है, कि उनके घरेलू बाज़ार भी अभी तक उनके इन विचारों को स्वीकार करने और अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं

कई नकारात्मकओं बावजूद कुछ महिलायें सपने देखने की हिम्मत करती हैं. करोड़पति अनूशेह अन्सारी की मिसाल हमारे सामने है. अस्सी के दशक में, जब वे ईरान से अमेरीका आईं थीं, तो उन्हें अंग्रेजी का एक शब्द भी नहीं आता था. उनकी अंग्रेजी भाषा के ज्ञान की कमी के कारण स्कूल में प्रवेश के दौरान अधिकारियों ने सुझाव दिया, कि उन्हें ग्रेड 11 से ग्रेड 9 के लिए डिमोट किया जाये. अनूशेह अपनी इस अस्थायी कमजोरी के कारण दो साल बर्बाद नहीं करना चाहती थीं, इसलिए वे 11वीं कक्षा में प्रवेश पाने के लिए गर्मी के अवकाश के दौरान 12-घंटे की अंग्रेजी कक्षाओं में गईं और उनकी इस दृढ़तापूर्ण आदत ने भविष्य में उनकी मदद की.

आगे चलकर एक दशक के अंदर ही अनुशेह ने 1997 में 750 मिलियन डॉलर में दूरसंचार का अपना स्टार्टअप बेचा और स्वयं को पहले से अधिक साहसिक सिद्ध करते हुए 11 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा भी की. भारतीय महिलाओं को इन उदाहरणों से सीख लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि हमारे पास भी महिलाओं की एक ऐसी पीढ़ी है जो या तो स्वयं की कंपनियां चला रही हैं या कंपनियों में शीर्ष प्रबंधन अधिकारी के रूप में सेवारत हैं. आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर, एक्सिस बैंक की शिखा शर्मा, आईबीएम की वनिता नारायणन और ओमदीयार नेटवर्क की रूपका जैसी महिलाएं बेहतरीन उदाहरण हैं. निश्चित रूप से ये युग उन युवा भारतीय महिलाओं का होगा, जो अपने स्टार्टअप का संचालन करके उन्हें वैश्विक कंपनियों में शामिल करने में सफल होंगीं.


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