काजल डागा और कविता चौधरी अपने बच्चों के प्री-स्कूल में मिले और मिलते ही इन दोनों का आपस में एक जुड़ाव सा हो गया. इसके बाद शुरू हुआ साथ चाय के दौर पर मिलने का अंतहीन सिलसिला और मुलाकातों के इसी दौर में इनके मस्तिष्क में अपना कोई व्यापार करने का विचार आया. इन लोगों के मन-मस्तिष्क में प्रारंभ से ही एक बात बिल्कुल स्पष्ट थी कि जब वे व्यवसाय की दुनिया में कदम रखेंगी तो सिर्फ गृह साज सज्जा (होम एंड डेकोर) से संबंधित काम को ही चुनेंगी.

काजल और कविता दोनों ही वाणिज्य की पृष्ठभूमि से आती थीं लेकिन इन्हें खुदरा व्यापार के क्षेत्र का कोई प्रभावी अनुभव नहीं था. यह तो इन दोनों का कला के पति झुकाव और समान पसंद थी जो इन दोनों को साथ लाने में कामयाब रही. ये दोनों जुनूनी महिलाएं बैंगलोर के व्हाइटफील्ड इलाके के होम एंड डेकोर के क्षेत्र के नामी और मशहूर ‘द चाॅक बुटीक’ की सहसंस्थापक हैं.

काजल और कविता दोनों वही आंखों को सुहाने वाली चीजों की पारखी नजर रखती हैं और इन्हें अपने और अपने घरों के लिये सुंदर और आकर्षक चीजें खरीदने का शौक है. अपने लिये एक अनूठे उत्पाद की तलाश में ये दोनों सहेलियां शहर में आयोजित होने वाल कला प्रदर्शनियों और शहर के विभिन्न कोनों में स्थित विचित्र उत्पादों की दुकानों के चक्कर लगातीं और इसी दौरान इन दोनों और करीब आईं.

32 वर्षीय काजल कहती हैं, ‘‘क्योंकि हम दोनों ही हमेशा से कला और शिल्प के क्षेत्र में ही कुछ करना चाहती थीं और ऐसी प्रदर्शनियों और दुकानों में आने-जाने के दौरान हमारी इस काम को प्रारंभ करने की इच्छा को और अधिक बल मिला!’’ इसके अलावा ये दोनों एक दूसरे की पूरक साबित होती थीं और यह बात इनके पक्ष में रही. हालांकि इन दोनों में से एक रचनात्मकता से भरपूर है और दूसरी पूरी तरह से व्यापारिक दिमाग वाली है और यह दोनों एक सफल व्यापार के संचालन के लिये अति आवश्यक गुण हैं.

और परिणति स्वरूप ‘द चाॅक बुटीक’ की स्थापना हुई. इसके अलावा बैंगलोर के व्हाइटफील्ड इलाके में होम एंड डेकोर से संबंधित एक भी स्टोर का न होना उन्हें इस स्टार्टअप की नींव रखनेे के लिये प्रेरित करने वाला मुख्य कारक रहा.

‘द चाॅक बुटीक’ अपने उपभोक्ताओं के लिये कुछ ऐसा करता है जो बिल्कुल नया और अनोखा होता है और यही इनकी सफलता का मुख्य राज है. इनका प्राथमिक उद्देश्य उभरते हुए कलाकारों द्वारा तैयार किये हस्तनिर्मित उत्पादों को अपने उपभोक्ताओं के सामने प्रस्तुत करना है. इनके सभी उत्पाद विशेष तौर पर इन दोनों सहसंस्थापकों द्वारा स्वयं कारीगरों से तैयार करवाये हुए होते हैं.

वाणिज्य के प्रति काजल का झुकाव

झीलों के शहर के नाम से मशहूर मध्य प्रदेश के भोपाल में जन्मी काजल की परवरिश अन्य बच्चों की तरह सामान्य परिवेश में हुई. सिर्फ लड़कियों के लिये संचालित होने वाले एक मिशनरी स्कूल में पढ़ाई करने वाली काजल बताती हैं कि उन्हें स्कूल में एक निश्चित तरीके से बाल बनाने और मोजे तक पहनने सिखाए गए थे.

दसवीं की परीक्षा में अव्वल आने पर काजल को उच्च शिक्षा के लिये अपनी पसंद के विषयों का चुनाव करने का विकल्प दिया गया. हालांकि उनके माता-पिता चाहते थे कि वो विज्ञान का चुनाव करें लेकिन उन्होंने ह्युमैनिटी का चुनाव किया.

काजल कहती हैं, ‘‘आखिरकार मैंने वाणिज्य के क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी की और सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में मैं चार्टड एकाउंटेंट बनने में सफल रही.’’ इसके बादएक वर्ष तक वे अपने पिता की कंपनी में एक चार्टड एकाउंटेंट के रूप में काम करती रहीं और इसी दौरान एक मित्र के घर पर आोजित पार्टी में उनकी मुलाकात अपेन होने वाली पति से हुई. विवाह के बाद वे अपने पति के साथ बैंगलोर आ गईं और नौकरी की तलाश में लग गईं. कुछ समय बाद उन्हें एक बहुराष्ट्रीय कंप्यूटर प्रौद्योगिकी निगम में नौकरी मिल गईं और वे तीन वर्षों तक वहां कार्यरत रहीं. इसके बाद पति के नए काम के चलते इन्हें उनके साथा अमरीका के सैन जोस का रुख करना पड़ा. काजल कहती हैं, ‘‘मुझे अमरीका का वर्क वीज़ा मिलने में कुछ समय लगा और इस दौरान मेरे पास काफी खाली समय था. इस दौरान खाली समय के प्रबंधन के लिये मैंने अध्ययन जारी रखने का फैसला किया और अमरीका प्रवास के दौरान ही मैंने अपना सीपीए पूरा किया.’’ दो वर्ष बाद वे वापस बैंगलोर आए और उस समय वे उनके गर्भ में उनका पहला बच्चा पल रहा था.

काजल में अमरीका से लौटने के बाद कुछ समय कामकाज से दूर रहने का फैसला किया और इसी दौरान उन्हें कला के प्रति अपने जुनून और पसंद का अहसास हुआ. उन्होंने आर्ट क्लासेस में दाखिला ले लिया और कला के प्रति झुकाव रखने वाले मित्रों के यहां आना-जाना शुरू कर दिया. इसके अलावा वे खाली समय में पुस्तकालयों के चक्कर लगातीं और कला से संबंधित पुस्तकों को पढ़ती. वे चित्रकला की बेहद शौकीन थीं और गभावस्था के बावजूद सप्ताह के कम से कम एक बार घर के 30 किलोमीटर स्थित ‘चित्रकला परिषद’ जरूर जातीं और इसके अलावा पूरे दिन साज-सज्जा से संबंधित ब्लाॅग पढ़ने में अपना समय गुजारतीं. उस समय पर वे साज-सज्जा से संबंधित कम से कम चार पत्रिकाओं की पाठक थीं. काजल मजाकिया लहजे में कहती हैं, ‘‘वह एक पागलपन जैसा जुनून था और मेरे पति को लगा कि मैं अपना मानसिक संतुलन खो बैठी हूँ और उन्होंने इसके लिये गर्भावस्था के हाॅर्मोन को दोषी ठहराया.’’

बच्चे को जन्म देने के कुछ समय बाद ही उन्होंने घर पर परिवार के सहयोग से एक पूर्णकालिक कार्य प्रारंभ करने का विचार किया. उन्होंने 4 वर्ष तक घर से सफलतापूर्वक व्यवसाय का संचालन किया लेकिन जल्द ही वे अपनी समयबद्ध दिनचर्या से ऊब गईं.

काजल कहती हैं, ‘‘उस समय मैंने अपने व्यवसाय को ताला लगाने का फैसला किया. मैं अपने भावी जीवन के बारे में विचार करने के लिये कुछ समय चाहती थी.’’ और इसी समय काजल की मुलाकात कविता से हुई.

कविता की कहानी

राजस्थान के एक छोटे से शहर बांसवाड़ा की रहने वाली कविता भी काजल की ही तरह चार्टड एकाउंटेंट हैं और वे भी सीपीए कर चुकी हैं. इसके अलावा कविता के पिता भी एक चार्टड एकाउंटेंट हैं और उनका बचपन भी काजल की तरह बिल्कुल सामान्य रहा.

37 वर्षीय कविता और काजल को सभी चीजों को एक साथ लाते हुए अपने इस स्टोर की अवधारणा को मूर्त रूप देने में आठ महीनों का समय लगा. सितंबर 2013 में ‘द चाॅक बुटीक’ ने उपभोक्ताओं के लिये संचालन प्रारंभ किया.

हम अपने स्टोर पर हमेशा से ही ऐसे उत्पाद रखना चाहते थे जोे औरों से बिल्कुल अलग होने के अलावा हाथ से तैयार किये हुए हुए और हाथ से ही चुने हुए हों और साथ-ही साथ वे कीमतों के मामले में भी ऐसे जो उपभोक्ता की जेब को भारी न लगें. हम अपने उपभोक्ताओं के सामने रंग, बनावट, लहजे और विचारों का एक समायोजन प्रस्तुत करना चाहते थे और हमारे स्टोर में आपको सिर्फ यही मिलेगा. और बेशक हमारी ‘मशहूर’ ब्लैक बोर्ड वाॅल एक ऐसी खासियत है जिसपर हम गर्व कर सकते हैं. अपने स्टोर के बारे में बताते हुए कविता कहती हैं कि वे चाहते हैं कि उनका स्टोर हमेशा विकास करता रहे जैसे चाॅकबोर्ड करता है.

इस जोड़ी के लिये सबसे यादगार लम्हा वह रहा जब एक ही दिन दो अलग उपभोक्ता इनके स्टोर में आए और उन्होंने इन्हें बताया कि दुकान के हर कोने में घूमने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि यह स्टोर श्रम से प्रेम का सच्चा प्रतीक है. और इन संस्थापकों का मानना है कि इनके उत्पादों का यही ‘प्रथकत्व’ इन्हें बाजार में मौजूद अन्य स्टोर्स से अलग करता है.

दो शिशुओं का आगमन

‘द चाॅक बुटीक’ का उद्घाटन काजल के लिये एक यादगार लम्हा है. काजल बताती हैं, ‘‘जब हम लोग सभी मुद्दों को अंमित रूप दे रहे थे तभी मुझे पता चला कि मैं दोबारा गर्भवती हूँ और मेरे गर्भ में हमारा दूसरा बच्चा पल रहा है.’’ ऐसी स्थिति में एक नये प्रारंभ करे हुए उद्यम के साथ खुद को जोड़े रखना बहहुत हिम्मत का काम है और वे अपने पति और माँ के सहयोग से दोनों को सफलतापूर्वक संभालने में कामयाब रहीं. काजल कहती हैं, ‘‘मेरे लिये यह पूरा सफर बहुत ही रोचक और बेहतरीन रहा है. एक बच्चा घर पर, दूसरा बच्चा मेरे गर्भ में और तीसरा यानि की ‘द चाॅक बुटीक’ भी अपनी स्थापना के दौर में था.’’

इन्हें काफी कम समय में सोर्सिंग, एकाउंट्स, फोटोग्राफी, मार्केटिंग के अलावा और भी कई कार्यों को निबटाना था और काजल के नेतृत्व में यह जोड़ी इन कामों को सफलतापूर्वक करने में कामयाब रही.

कोई भी उद्यमी चीन मुख्य चुनौतियों से दो-चार होता है जो हैं, सही उत्पाद, सही कीमत और सही मार्केटिंग. लेकिन इन संस्थापकों का मानना है कि अगर किसी के मन में अपने काम के प्रति लगन और जुनून है तो इन चुनौतियों से पार पाना बहुत आसान हो जाता है और आपको सफलता जरूर मिलती है.

इनका विश्वास है कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि आप एक जिस व्यवसाय को संचालित करें वह सिर्फ लाभप्रद ही हो बल्कि यह ऐसा होना चाहिये जिसका प्रबंधन आप खुशी-खुशी कर सकें और वह भी रोजाना.

अंत में काजल और कविता एक ही सुर में कहती हैं, ‘‘जब आप एक व्यवसायी होते हैं तो आपके जीवन में कभी भी नीरसता से भरे क्षण नहीं आते हैं और आने वाला हर नया दिन अपने साथ नई चुनौतियों और अनुभवों को लाता है.’

- निशिकांत गोयल

 साभार: योर्स स्टोरी  


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