सुरक्षित सब्जी उत्पादन वह तकनीक है जिसके अंतर्गत उगाये जाने वाली सब्जीयों के चारो तरफ अच्छी वृद्धि एवं उत्पादन के लिये पूर्णतः या आंशिक, आवश्यकता के अनुसार सूक्ष्म अनूकूलित वातावरण तैयार करके सब्जीयों को उगाया जाता है. कृषि जलवायु के आधार पर बाँटे गये क्षेत्रों के अनुसार सब्जीयों को उगाने हेतु विभिन्न प्रकार की सुरक्षित सब्जी उत्पादन तकनीक अपनाई जाती है. मध्य भारत में सब्जीयों को उगाने के लिये ग्रीनहाऊस, पॉलीहाउस , लेथहाऊस, कपड़ा घर एवं नेटहाऊसों का प्रायः उपयोग किया जाता है.

ग्रीनहाऊस

ग्रीनहाऊस वह ढाँचा है, जिसकी ऊपरी छत पारदर्शी या पारदर्शक सामग्री से ढकी रहती है, इससे उगाई जाने वाली फसल को नियंत्रित वातावरण में इस तरह उगाया जाता है कि, इसमे कार्य करने वाला व्यक्ति आसानी से अंतरशस्य क्रियाएँ कर सके.

ग्रीनहाऊस के लाभ

1. ग्रीनहाऊस में उगाई जाने वाली सब्जीयों की अनुकूलता के आधार पर नियंत्रित वातावरण प्रदान करके चार से पाँच सब्जीयों को वर्ष भर आसानी से उगाया जा सकता है.

2. इसके द्धारा प्रति इकाई क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले फल प्राप्त होते है.

3. ग्रीनहाऊस में दिये जाने वाले निवेशो जैसे पानी, उर्वरकों बीजों एवं रसायनिक दवाईयों का उपयोंग अधिक बेहतर ढंग से किया जा सकता है.

4. इसमे कीडे़ एवं बीमारियों का नियंत्रण भी आसानी से किया जा सकता है.

5. ग्रीनहाऊस में बीजों का अंकुरण का प्रतिशत अधिक होता है.

6. जब ग्रीनहाऊस में सब्जीयों को उगाया नही जाता है इस दशा में ग्रीनहाऊस द्धारा शोषित की गई उष्मा का उपयोग उत्पादको को सुखाने एवं अन्य संबंधित कार्यों के करने में किया जाता है.

6. पौधा में सिचाई, वातावरण का नियंत्रण एवं अन्य निवेशों का उपयोग कम्प्यूटर के द्धारा स्वनियंत्रित करके किया जाता है.

7. युवाओं को रोजगार के लिये बेहतर अवसर मिलते है.

ग्रीनहाऊस हेतु स्थल का चुनाव

ग्रीनहाऊस हेतु भौगोलिक क्षेत्रों का चुनाव करे, जिसके मूल्य कम हो एवं यातायात और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो .

भौगोलिक दशा

चुने गये स्थल की भौगोलिक दशा इस प्रकार की हो कि ग्रीनहाऊस में सभी कार्य आसानी से किया जा सके एवं जल निकास व्यवस्था अच्छी होनी चाहिये.

आवागमन

सुगम आवागमन हेतु सड़क अच्छी होनी चाहिये, यदि ग्रीनहाऊस का निर्माण पहाड़ी क्षेत्रों में किया जाता रहा है, तब आवश्यकता के अनुसार सुगम पहुँच मार्ग का निर्माण करे. निर्माण किये गये ग्रीनहाऊस पर चारों ओर के वातावरण का प्रभाव पड़ता है, इसके लिये ग्रीनहाऊस का निर्माण शहर से बहार करना चाहिये, ताकि आवासीय आबादी का प्रतिकूल असर पौधे पर न पड़ सके .

1) बिजली

ग्रीनहाऊस में बिजली का कुछ मिनटों के लिये भी बंद होना, पौधों की वृद्धि व विकास पर बाधा डालता है, इसलिये ग्रीनहाऊस में ऐसी व्यवस्था हो कि हमेशा बिजली उपलब्ध रहे.

2) जल

पानी की गुणवत्ता एवं सही मात्रा में उपलब्धता ग्रीनहाऊस का निर्माण करने के पूर्व जाँच ले, यदि कुआँ या तालाब या नगरनिगम के पानी का उपयोग किया जाना हो, तब सिचाई हेतु उपयोग किये जाने वाले पानी को उबालकर या उपचारित करने के पश्चात ही प्रयोग करे.

निर्माण हेतु आर्थिक मूल्यांकन

मेड़ एवं नालीदार आकार वाले ग्रीनहाऊस ही आर्थिक दृष्टि से निर्माण हेतु बेहतर होते है. इन्हे निर्माण करने हेतु कम जगह की आवश्यकता होती है, ग्रीनहाऊस की संरचना को इस प्रकार से व्यवस्थित करनी चाहिये, कि उगाई जाने वाली सब्जीयों की आसानी से तुड़ाई की जा सके एवं उन्हे बाजार में ले जाया जा सके.

ग्रीनहाऊस हेतु विभिन्न प्रकार के ढाँचे

ग्रीनहाऊस के निर्माण में उपयोग होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री का चुनाव संरचना स्थायित्व प्रारंभिक लागत एवं रखरखाव की लागत को ध्यान में रखते हुये करना चाहिये . लकड़ी के द्धारा बताया गया ग्रीनहाऊस कम समय हेतु एवं अस्थाई होता है. रेडवुड की लकड़ी से बनाये गये ढाँचे को रखरखाव लागत कम होती है . प्रायः ग्रीनहाऊस का निर्माण करने हेतु स्टील के ढाँचों का उपयोग किया जाता है. जंग लागने से बचाने के लिये स्टील के फ्रेम पर पेंट कर दिया जाता है. आजकल स्टील के फ्रेम की जगह एल्यूमिनियम के फ्रेम का उपयोग ज्यादा हो रहा है क्योकि इन पर जंग लागने की समस्या कम होती है. लकड़ी या स्टील या एल्यूमिनियम के द्धारा बनाये गये ढाँचो का रखरखाव लगभाग समान ही रहता है.

ग्रीनहाऊस ढकने हेतु सामग्रीयाँ

ग्रीनहाऊस की छत को ढकने हेतु इस प्रकार की सामग्री का उपयोग करना चाहिये, कि ढकी हुई सामग्री से अधिकतम प्रकाश की मात्रा पौधो को मिल सके, ढकने हेतु सामग्री का चुनाव स्थायित्व, प्रारंभिक लागत एवं रखरखाव की लागत को ध्यान में रखते हुये करना चाहिये.

सब्जियों की अच्छी वृद्धि के लिये ग्रीनहाऊस का तापमान उपयुक्त होना चाहिये . उगाई जा रही सब्जियों के अनुसार ग्रीनहाऊस के तापमान को परिवर्तीत करना चाहिये, तापमान के उपयुक्त न होने की दशा पर सब्जियों की वृद्धि, विकास, फूल आने की अवस्था एवं फलन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है.


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