लू एवं पाले से बचाव

गरम हवाएँ सदा पश्चिम से और ठंढी हवाएँ उत्तर से चलती हैं. इन तेज, गरम और ठंढी हवाओं को रोकने के लिए बाग की उत्तर और पश्चिम दिशा में ऊँचे बढ़ने वाले पेड़ों की घनी पंक्ति लगा देनी चाहिए. इस पंक्ति को विंड ब्रेक (Wind Break) कहते हैं. विंड ब्रेक के लिए शीशम, देशी आम, जामुन आदि लगाते हैं. पेड़ों का फासला लगभग १०-१५ फुट तक रखते हैं, जिससे वे घने होकर सीधे और लंबे बढ़ते हैं.

लू एवं पाले से छोटे पेड़ों को बचाने के लिए ग्रीष्म और शीतकाल में प्रत्येक पेड़ के चारों ओर फूस की छोटी टट्टी पूर्व दिशा में खुली रहती है, जिससे पेड़ को धूप और हवा मिलती रहे. टट्टियाँ केवल पेड़ों की उन्हीं किस्मों में बाँधते हैं जिनको लू एवं पाले से मरने का अंदेशा रहता है, जैसे आम, पपीता, लुकाठ आदि. गरमी और जाड़ों में गहरी सिंचाई करने से भी लू और पाले से बचाव होता है.

जंगली जानवरों आदि से रक्षा

बाग में जंगली जानवर, चौपाए आदि को घुसने से रोकने के लए बाग के चारों ओर बाढ़ लगाना आवश्यक है. इसका एक तरीका यह है कि चारों ओर लगभग तीन फुट गहरी एक खाईं खोदी जाए और उसकी मिट्टी बाग के अंदर की ओर खाईं के किनारे एक चौड़ी और ऊँची मेड़ के रूप में जमा दी जाए. यह खाई और ऊँची मेड़ अच्छी रोक बना लेती है. यदि इस मेड़ के ऊपर थूहर अथवा नागफनी आदि लगा दी जाए तो और भी अधिक रक्षा रहेगी. बाग के चारों और काँटेदार घनी झाड़ी, जैसे करौंदा, खट्टा, बबूल आदि भी, लगा सकते हैं. आजकल काँटेदार तार लगाने का प्रचलन है. यदि छह फुट ऊँचे खंभों में काँटेदार तार की चार लड़ लगाकर बाग को घेर दिया जाए, तो भी बाग की रक्षा होती है.

फलों को हानि पहुँचानेवाले प्राणी, जैसे पक्षी एवं बंदर आदि, से रक्षा के लिए आदमी रखना पड़ता है, जो पटाखे, गुलेल आदि चलाकर फसल की रक्षा करता है.

पेड़ों की कटाई छँटाई

जाड़े में पत्ती गिरानेवाले कुछ पेड़ों, जैसे फालसा, अंजीर, शहतूत आदि, की सालाना कटाई छँटाई करनी पड़ती है. इनकी छँटाई करने से नई शाखाएँ खूब फूटकर निकलती हैं और इनमें अच्छे और काफी फल लगते हैं. सालाना कटाई न करने से इनमें केवल गिनी चुनी शाखाएँ निकलती हैं, जिनमें केवल थोड़े से फल लगते हैं. इनकी कटाई छँटाई उस समय करते हैं, जब जाड़ों में ये पत्ती गिरा देते हैं.

पेड़ लगाने के बाद प्रारंभ के दो तीन साल तक सभी पेड़ों को सुंदर और सुदृढ़ बनाने के लिए कटाई, छँटाई की आवश्यकता होती है. भूमि से लगभग दो तीन फुट की ऊँचाई तक तने को साफ कर लेना चाहिए. तने के ऊपरी भाग में तीन या चार मजबूत भिन्न भिन्न दिशाओं में बढ़ती हुई शाखाओं को चुन लेना चाहिए और केवल उनको ही बढ़ने देना चाहिए. अन्य शाखाओं को तने के पास से काट देना चाहिए.

जैसे जैसे पेड़ बढ़ते जाएँ, उनके थाले बढ़ाते जाना चाहिए. प्रति वर्ष थालों की गोड़ाई करके उनमें खाद देनी चाहिए. यह कार्य अक्टूबर तथा नवंबर के महीने में करना अच्छा रहता है.

बाग की सफाई का सदा ध्यान रखना चाहिए. जंगली घास फूस साफ करते रहना चाहिए.

उचित सिंचाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, विशेषकर ग्रीष्म काल और फल लगने के बाद. किसी भी बीमारी अथवा कीड़ों के लगते ही उनको रोकने के लिए उचित दवा का छिड़काव करना चाहिए.


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