शाजापुर. मंगलवार को आदिम जाति कल्याण विभाग आश्रम के अधीक्षक को लोकायुक्त टीम ने धरदबोचा. उक्त अधीक्षक की नजर अजा वर्ग के बच्चों को शासन से मिलने वाली राशि पर थी. लेकिन एक पालक की शिकायत पर लोकायुक्त ने उसे आज रिश्वत के 3 हजार 850 रूपए के साथ रंगे हाथ पकड़ लिया. गौरतलब है कि उक्त अधीक्षक भ्रष्टाचार के आरोप के चलते पहले भी सुर्खियों में रहे हैं.
मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे गैस गोदाम के पीछे स्थित आदिम जाति कल्याण विभाग आश्रम अधीक्षक कमलसिंह बोड़ाना कलेक्टर कार्यालय में चुनाव की ट्रेनिंग में व्यस्त थे. तभी एक फोन आया और वे वहां से निकल कर सीधे नीचे गेट पर आ गए. जहां उन्हें पिंदोनिया निवासी केशवलाल पिता दुलीचंद मकवाना ने 3 हजार 850 रूपए दिए. श्री बोड़ाना रूपए गिन कर अपनी जेब में रख ही रहे थे कि तभी लोकायुक्त इंस्पेक्टर प्रशांत मुकादम ने पीछे से उनके कंधे पर हाथ रख दिया. रूपए मिलने से जो चमक श्री बोड़ाना के चेहरे पर आई थी वह लोकायुक्त इंस्पेक्टर का परिचय सुनते ही गायब हो गई. लोकायुक्त टीम कमल बोड़ाना को पकड़ घुमाते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग के दफतर ले गई. जहां उनके हाथ धुलवाए गए तो पानी का रंग लाल हो गया और श्री बोड़ाना के चेहरे का रंग सफेद. लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेनेे वाले आश्रम अधीक्षक श्री बोड़ाना खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13/1, 13/2 के तहत प्रकरण दर्ज कर 25 हजार रुपए के मुचलके पर छोड़ दिया. लोकायुक्त टीम में श्री मुकादम के अलावा इंस्पेक्टर दिनेश रावत, आरक्षक संदीप कदम, प्रकाश सती, सुनील परसाई
बच्चे की सामग्री के थे रूपए...
अधीक्षक को पकड़वाने वाले केशवलाल मकवाना ने बताया कि उनका बालक लोकायुक्त टीआई प्रशांत मुकादम ने बताया कि 16 फरवरी को पिंदोनिया निवासी केशवलाल मकवाना ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका पुत्र अनिल गैस गोदाम के पीछे स्थित आदिम जाति आश्रम में रहते हुए शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक स्कूल क्रमांक 2 में पढ़ता है. उसे शासन द्वारा बिस्तर, स्वेटर आदि सामग्री खरीदने के लिए शासन ने 3 हजार 850 रूपए प्राप्त हुए हैं. इस राशि का उपयोग बालक या उसके पालक को करना है. लेकिन आश्रम अधीक्षक कमलसिंह बोड़ाना उक्त राशि की मांग कर रहे हैं. इस पर लोकायुक्त ने उन्हें एक वाइस रिकार्डर दिया. जिस पर उन दोनों की बात कराई गई और प्लान बनाकर मंगलवार को रिश्वत की राशि देना तय किया गया.
और बच्चों से भी लिए थे रूपए..!
कार्रवाई के दौरान अधीक्षक कमल बोडऩा की बातचीत से ऐसा लगता है कि उन्होंने और बच्चों से रूपए ले लिए हैं. जब श्री बोड़ाना से पूछा गया कि उन्होंने मांग क्यों की थी तो बोले कि वे सामान खरीद कर उन्हें दे देते. जब उनसे पूछा गया कि कितने बच्चों से रूपए लिए हैं तो बोले आश्रम में 50 बच्चे हैं, लेकिन सभी ने पैसे नहीं लिए. यानि कुछ बच्चों से तो उन्होंने पैसे लिए ही थे. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि जिनसे पैसे लिए उन्हें सामान लाकर दिया या नहीं, इस पर वे चुप हो गए. बहरहाल अब यह विभागीय जांच का मामला है, यदि जांच ईमानदारी से होती है तो और भी खुलासे हो सकते हैं.


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