जिंदगी सबक दे रही है .... अनजान रास्तो से, अनजान लोगो से, अनोखे तरीको से .... पता नहीं... पर कुछ जादू सा होने वाला जरूर है .... अगर रोज नए अहसास हो तो लगता है न... की जिंदगी क्या चाहती है .... आज का सबक भी अजीब है .... पता नहीं मैं आश्चर्यचकित हूँ या अभिभूत हूँ ... .. पता नहीं मैं समझ नहीं पाया या जिंदगी आज क्या समझा गयी ..... खैर जो भी है.... है कमाल की बात ही. रोज सुबह छ बजे सुबह की सैर को जाता हूँ .... आज सुबह देखा एक भिखारी मंदिर के बाहर हाथ जोड़े खड़ा है. मैंने उसे दूर से देखा और देखते देखते उसके बराबर से होता हुआ आगे निकल गया. थोडा आगे जाकर मन में प्रश्न उठा की ये भिखारी क्यूँ भगवान् के दरबार में खडा है .... भगवान् तो इसे कुछ दे ही नहीं पाया तभी तो लोगो के सामने हाथ फैलाता है. फिर से मुड कर देखा तो वो वहीँ खडा था .... दोनों हाथ जोड़े. मैं एक मिनट उसे देखता रहा फिर मुझसे रुका न गया और वापिस मुड कर उसके पास पहुंचा. मुझे देखकर भी वो वैसे ही पूजा करने में मगन. दो चार मिनट बाद मैंने टोका .... बाबा कुछ बात करनी है.

उसने कहा - हैंजी

मैंने फिर कहा कुछ बात करनी है

वो मुझे देखने लगा ... मैंने पूछा पूजा क्यूँ करते हो .... क्या माँगते हो भगवान् से ....

उसने फिर मुझे कहा - हैंजी

मैंने दोबारा कहा अरे बाबा भगवान् ने कुछ दिया ही नहीं तुम्हे ... भीख मांग कर गुजरा कर रहे हो तो भगवान से क्या मांगते हो .....

इसके बाद उसने जो कहा .... उसने मेरे पैरो के नीचे से धरती खिसका दी ....

वो बोला मुझे तो भगवान् ने बहुत कुछ दिया है .... देखो उसने अपना हाथ दिखाया .... मैंने देखा की वो कोढ़ी था .... हाथ की सारी उंगलियाँ गायब …… उसने कहा देखो ये ठीक हो गया ... अब कोढ़ नहीं है मुझे .... मुझे मेरे बाप ने छोड़ दिया था लेकिन मेरे चारो बच्चे पढ़ रे स्कूल में ..... इसके बाद वो बोलता रहा की भगवान् ही तो देते हैं सब .... उसकी तो पूजा करनी ही चाहिए और न जाने क्या क्या ..... मैंने अच्छी सी मुस्कान दी उसे ... और कंधे पर हाथ रखते हुए मैं आगे चला आया ... लग रहा है की जैसे बस इतना सा समझ जाए इंसान तो सुखी ही न हो जाए .... एक भिखारी ये सब कुछ कह गया विश्वास ही नहीं हो रहा .... काश कैमरा होता तो उसी फोटो लेता .... लगता है पढ़ा लिखा कर हम लोग अपनी जड़ो से दूर हो गए .... बचपन में कुछ भी हो जाने पर माँ कहती थी जैसे भी रखे भगवान् सब ठीक है शायद तभी दिन सबसे अच्छे थे ..... तरक्की कर के बस मकान पक्के और बड़े बना लिए हमने वरना हम मानसिक और अध्यात्मिक तौर पर तो बौने ही हो गए हैं ....

- अजय सिंघल (Udaan - Wings of Dreams के संस्थापक)


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