शाजापुर. गत दिवस जिला अस्पताल के पीछे मृत मिली लाडली की मौत भूख के चलते हुई थी. अस्पताल सूत्रों की मानें तो बालिका की मौत का यही प्रमुख कारण है. वहीं शव की स्थिति के अनुसार उसकी डिलेवरी हॉस्पिटल में ही हुई थी. चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार तो मामला सामान्य मौत का नहीं है. अब पूरा मामला पुलिस जांच पर निर्भर करता है. यदि जांच ईमानदारी से हुई तो ही मृत लाडली को न्याय मिल पाएगा. क्योंकि स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर बेपरवाही ही बरतता नजर आ रहा है.
गत दिवव जिला अस्पताल के पीछे एक नवजात बालिका का क्षत विक्षत शव मिला था. शव को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया था और उसका एक हाथ तक खा गए थे. उक्त शव को लेकर अस्पताल प्रबंधन दूसरे दिन भी लापरवाहीपूर्ण रवैया अपनाता नजर आया. लेकिन यदि चिकित्सकों के अनुसार उक्त 'लाडलीÓ की मौत भूख की वजह से हुई थी और उसकी उम्र 3 दिन रही होगी. यानि उक्त बालिका जीवित अवस्था में पैदा हुई थी. ऐसे में यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. क्योंकि यदि बालिका की मौत भूख की वजह से हुई तो निश्चित तौर पर इसके लिए उसके माता-पिता जिम्मेदार होंगे. लेकिन यह पूरा मामला अब पीएम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पर निर्भर करता है. क्योंकि यदि पुलिस ईमानदार के साथ जांच करती है तो निश्चित तौर पर बालिका की मौत के दोषियों को सजा मिल सकती है.
हॉस्पिटल में हुआ था जन्म...
अस्पताल के चिकित्सकों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मृत बालिका की अमलाइकल कोर्ड यानि नाल में क्लेंप लगा हुआ था. साथ ही उसके पेड भी लगा था. जिससे साफ होता है कि बालिका का जन्म कहीं ओर नहीं बल्कि किसी अस्पताल में ही हुआ था.
...तो हत्या का है मामला!
यदि चिकित्सकों की मानें तो बालिका जीवित अवस्था में जन्मी थी. साथ ही उसकी मौत भूख से हुई थी. इससे तो यही जाहिर होता है कि बालिका को जानबूझ कर अस्पताल के पीछे मिट्टी में दबाया गया था. यानि निमर्म माता-पिता ने लाडली को जिंदा दफना कर हत्या कर दी. अब पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग और पुलिस पर निर्भर करता है. क्योंकि यदि मामले की जांच पूरी ईमानदारी के साथ की जाती है तो निश्चित की दोषियों पर कार्रवाई होगी.
पुलिस ने दर्ज किया प्रकरण
उक्त मामले में मर्ग कायम करने के बाद देर रात पुलिस ने भादवि की धारा 317 के तहत अज्ञात के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है. थाना प्रभारी आनंत तिवारी ने बताया कि अस्पताल से मिली जानकारी के आधार पर प्रकरण दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि पुलिस जांच कर दोषियों का पता लगाने की पूरी कोशिश करेगी. बताया जाता है कि धारा 317 वैध पालक द्वारा बच्चे को असुरक्षित आरक्षित स्थिति में छोड़ देने, जिससे उसकी मृत्यु हो जाने पर लगाई जाती है. इसमें 7 साल की सजा का प्रावधान है.
जिम्मेदार बोले...
'सिविल सर्जन के अनुसार शव किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा फैंका गया होगा. लेकिन जिस तरह की बातें सामने आ रही है उससे यह बयान गलत प्रतीत होता है. बालिका की नाल पर क्लेंप लगने से पता चलता है कि डिलेवरी अस्पताल में हुई होगी. सब बातों से मामला गंभीर हो जाता है, इस मामले में आज ही पीएम रिपोर्ट देखने के बाद सीविल सर्जन व अन्य डॉक्टर्स से पूछताछ की जाएगी.Ó - डॉ. अनुसूय्या गवली सिन्हा, सीएमएचओ शाजापुर


************************************************************************************

बॉलीवुड       कारोबार        दुनिया       खेल        इन्फो      राशिफल

************************************************************************************



पलपलइंडिया का ऐनडरोएड मोबाइल एप्प डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे.

खबरे पढने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने, ट्विटर और गूगल+ पर फालो भी कर सकते है.


Comments-
0

अन्य जानकारियां :

सुरुचि: इस पेज पर कुकिंग और रेसेपी के बारे में रोज़ जानिए कुछ नया

तनमन: इस पेज पर जाने सेहतमंद रहने के तरीके और जानकारियां

शैली: यह पेज देगा स्टाइल और ब्यूटीटिप्स सहित लाइफस्टाइल को नया टच

मंगलपरिणय: इस पेज पर मिलेगी विवाह से जुड़ी हर वो जानकारी जिसे आप जानना चाहेंगी

आधी दुनिया: यह पेज साझा करता है महिलाओं की जिन्दगी के हर छुए-अनछुए पहलुओं को

यात्रा: इस पेज पर जानें देश-विदेश के पर्यटन स्थलों को

वास्तुशास्त्र: यह पेज देगा खुशहाल जिन्दगी की बेहद आसान टिप्स