भोजन हर जीव की ज़रूरत है, चाहे वह चल हो या अचल. अपने लिए उपयुक्त भोजन वह घूम फिर कर प्राप्त कर ही लेते हैं. किंतु पेड़-पौधे अचल हैं ये अपनी जड़ों द्वारा एक ही जगह पर रहकर भोजन लेकर अपना विकास करते हैं. पेड़-पौधों को भी सभी प्रकार से शामिल मिनरल्स, नाइट्रोजन, फास्फोरस, कैल्शियम और अन्य आवश्यक तत्वों से युक्त भोजन की ज़रूरत होती है, लेकिन इनकी जडें जहां तक पहुंचती हैं वहीं तक ये आवश्यक तत्व अवशोषित कर सकती हैं. बडे पेड़ों की जडें दूर तक फैली होती हैं, किंतु छोटे पौधों की सामथ्र्य सीमित होती है, इसलिए उन्हें खाद की ज़रूरत होती है, जिसमें सभी प्रकार के आवश्यक तत्व मिल जाते हैं.

पोषण के लिए विभिन्न प्रकार की आवश्यकता के लिए विभिन्न प्रकार की खाद चाहिए होती है, बहुवर्षीय सजावटी पौधे हों या फुलवारी. हमें पौधों की प्रकृति समझकर उनकी वृद्धि के लिए अच्छे बड़े फूल प्राप्त करने के लिए या अच्छी फसल लेने के लिए उचित खाद पानी देना होगा. सर्दी का यह मौसम फुलवारी के लिए महत्वपूर्ण है. अत: खाद के बारे में हम अच्छी जानकारी होनी चाहिए.

गोबर की खाद

भारत में सबसे ज़्यादा इसी खाद का प्रचलन है और यह है भी संपूर्ण खाद. गाय-भैंस के गोबर के अलावा अन्य मवेशियों के गोबर से तैयार खाद को इसी श्रेणी में रखते हैं. इसमें आवश्यक नाइट्रोजन की मात्रा पांच प्रतिशत होती है. इसका प्रभाव भूमि में थोड़ा देर से किंतु लंबे समय तक रहता है.

कम्पोस्ट खाद

ये खाद पेड़-पौधों की पत्तियों, टहनियों तालाब से प्राप्त जलीय पौधों के अवशेष, घर से निकला वेस्ट पदार्थ चायपत्ती, आदि को मिलाकर बनाई जाने वाली खाद कम्पोस्ट खाद हैं. इसमें नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में होती है और यह भूमि को मृदु बनाए रखने व सजावटी पौधों के लिए विशेष उपयोगी है.

खली की खाद

सरसों, तिल, अरंडी, नीम और बिनौला व अन्य प्रकार के बीज जिनसे तेल निकाला जाता है, के अवशेषों को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. जिसमें तेल की उपलब्धता होती है. यह चिकनाई पौधों के लिए वैसे ही उपयोगी और पुष्टिकारक है जैसे हमारे लिए मक्खन घी होता है.

तरल खाद की विधि

बड़े घड़े या पात्र में तीन चौथाई पानी भरकर उसमें नीम या अन्य खली पाउडर डालकर मटके का मुंह अच्छी तरह एअरटाइट कर दें और रोजाना लकड़ी के डंडे से हिलाते रहें. दस-पन्द्रह दिनों में यह गलकर अच्छी खाद बन जाएगी. पौधों में इसे पोषण के रूप में दें. इसे एक भाग खाद और 16 भाग पानी मिलाकर 15-20 दिनों में दोहरा सकते हैं. यह विधि खली की खाद बनाने के लिए बताई गई है. ताजा गोबर से भी तरल खाद बनाई जा सकती है. उसमें अनुपात 10:1 का रखें.

रासायनिक खादें

नाइट्रोजन खाद : इसकी कमी से पौधे की वृद्धि कम व पत्तियां कमजोर होती है. इससे बचाव के लिए नाइट्रोजन की खाद डाली जाती है. यूरिया एक प्रचलित नाम है.

फास्फोरस : पौधों में जड़ों की वृद्धि व फूलों की अधिक संख्या, मात्रा व आकार बढ़ाने के लिए एक आवश्यक तत्व है यह. इसे पौधे लगाते समय ही मिट्टी में डाला जाता है. बोनमील अच्छा माध्यम है और बेहतर विकल्प है अप्राकृतिक खाद का.

पोटाश : पोटाश खाद देने से फूलों-फलों का आकार बढ़ने के साथ रंग भी अधिक गहरा और चमकीला हो जाता है. खादों को समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए अधिक रासायनिक खाद से पौधों की असमय मृत्यु हो सकती है. गोबर-कम्पोस्ट बोनमील खली आदि की प्राकृतिक खादों का प्रयोग अधिक करें.

बोनमील रासायनिक खादें

मृत पशुओं की हड्डी से निर्मित खाद जिसमें फॉस्फोरस व अन्य तत्व समाहित हैं जो फूलों-फलों की संख्या व आकार बढ़ाने में सहायक है.


************************************************************************************

बॉलीवुड       कारोबार        दुनिया       खेल        इन्फो      राशिफल

************************************************************************************



पलपलइंडिया का ऐनडरोएड मोबाइल एप्प डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे.

खबरे पढने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने, ट्विटर और गूगल+ पर फालो भी कर सकते है.


Comments-
0

अन्य जानकारियां :

सुरुचि: इस पेज पर कुकिंग और रेसेपी के बारे में रोज़ जानिए कुछ नया

तनमन: इस पेज पर जाने सेहतमंद रहने के तरीके और जानकारियां

शैली: यह पेज देगा स्टाइल और ब्यूटीटिप्स सहित लाइफस्टाइल को नया टच

मंगलपरिणय: इस पेज पर मिलेगी विवाह से जुड़ी हर वो जानकारी जिसे आप जानना चाहेंगी

आधी दुनिया: यह पेज साझा करता है महिलाओं की जिन्दगी के हर छुए-अनछुए पहलुओं को

यात्रा: इस पेज पर जानें देश-विदेश के पर्यटन स्थलों को

वास्तुशास्त्र: यह पेज देगा खुशहाल जिन्दगी की बेहद आसान टिप्स