सदाबहार

प्रचलित नाम : सदफूल, सदासुहागन

अंग्रेजी नाम : ट्रोपिकल पेरीविन्किल

पौध परिचय : सदाबहार एक बहुवर्षीय, सीधी, बहुशाखीय झाड़ी होती है जिसकी ऊँचाई 70-80 से.मी. तक होती है. इसकी पत्तियाँ दीर्घवृत्तीय, अंडाकार अथवा गोल होती है. फूल 1-4 की संख्या में ससीमाक्ष (साइम्स) होते हैं. बाह्यदल पुंज (कैलिक्स) खण्डों में सूच्यग्री (सुबुलेट) होता है. फॉलिकिल 2-3 से.मी. लम्बी तथा सूक्ष्म रोमिल होते हैं.

उपयोगी अंग : पत्ती एवं जड़

मुख्य रासायनिक घटक : सदाबहार की पत्तियों एवं जड़ों से 100 से भी अधिक क्षाराभ में (एल्केल्वाएड्स) निष्कर्षित किये गये हैं. पत्तियों में विद्यमान कैंसर रोधी क्षाराभों में विनब्लास्टीन एवं विनक्रिस्टीन प्रमुख है. जड़ों से अजमेलिसीन, सर्पेन्टीन एवं रिजर्पिन नामक क्षाराभ पृथक कर औषधीय उपयोग में लाये जाते हैं.

औषधीय गुण एवं उपयोग : विनब्लास्टीन नामक यौगिक का उपयोग स्तन, फेफड़ा, अण्डकोष एवं रक्त कैंसर की चिकित्सा के अतिरिक्त अन्य विभिन्न प्रकार के कैंसर यथा-लिम्फोसारकोमा, कोरियोकार सीनोमा, न्यूरोव्लास्टोमा इत्यादि में किया जाता है. उसी तरह विनक्रिस्टीन का उपयोग रक्तकैंसर, हाचकिन बीमारी, विलम्स ट्यूमर, न्यूरोब्लास्टोमा, रैब्डोसारकोमा और रेटिकुलम-सेल सारकोमा में किया जाता है. जड़ से प्राप्त क्षाराभों का उपयोग, हृदय एवं उच्च रक्तचाप की बीमारियों में किया जाता है.

शतावरी

प्रचलित नाम : शतावरी, शतमूली, सतावर

अंग्रेजी नाम : वाइल्ड एस्पेरेगस

पौध परिचय : शतावरी के कांटेदार एवं आरोहणशील झाड़ीनुमा क्षुप, अनेक शाखाओं द्वारा चारों ओर फैले रहते हैं. पर्णाभ काण्ड (क्लेडोड्स), लम्बे, नोंकदार, 2-6 एक साथ गुच्छाबद्ध निकलते हैं. फूल-सफेद, सुगंधयुक्त होते हैं. फल गोलाकार तथा पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं. मूल स्तम्भ के कन्द सदृश, लम्बगोल, परन्तु दोनों सिरों पर क्रमश: पतले श्वेत मूलों का गुच्छा निकलता है.

उपयोगी अंग : गांठदार जड़

मुख्य रासायनिक घटक : शतावरी की जड़ से अनेक जड़ से अनेक स्ट्रिओयड ग्लाईकोसाइड्स (I-IV), एवं सारसेपोजेनिन, निष्कर्षित किए गए हैं. जड़ से एस्पराजेमाइन-एल्कलाइड भी अलग किया गया है.

औषधीय गुण एवं उपयोग : यौन दुर्बलता के लिए एक पोषक औषधि के रूप में इसकी जड़ों का बहुत व्यापक इस्तेमाल होता है. शतावरी की जड़, भारतीय चिकित्सा पद्धतियों-आयुर्वेद एवं यूनानी में वात पित्त शामक, वल्य एवं दुग्धवर्धक रसायन द्रव्य के रूप में अत्यधिक रूप से प्रयोग में लाई जाती है. यह अतिसार, मधुमेह, पीलिया, मूत्ररोग, मिर्गी, घाव भरने तथा चेहरे की झुर्री दूर करने में विशेष रूप से लाभदायक है.

स्पीयर मिन्ट

प्रचलित नाम : स्पीयर मिन्ट

पौध परिचय : स्पीयर मिन्ट बहुवर्षीय शाकीय पौधा होता है. इसकी पत्तियाँ भालाकार, नुकीली एवं दाँतेदार होती है. सफेद फूल एक्सिलेरिस एवं अन्तस्थ वर्टीसिलास्टर में निकले होते हैं.

उपयोगी अंग : ऊपरी शाखाएं सुगन्धित तेल का स्रोत हैं.

मुख्य रासायनिक घटक : कार्बोन तथा लिमोनिन

औषधीय गुण एवं उपयोग : खाद्य सामग्री एवं औषधियों में उपयोग होता है.

वच

प्रचलित नाम : घोड़वच, वच

अंग्रेजी नाम : स्वीट-फ्लैग, कैलेमस रूट

पौध परिचय : वच, 60 से.मी. से 1.5 मीटर तक ऊँचा, जलाशयों के पास तथा दलदली भूमि में उगने वाला एक बहुवर्षीय पौधा है. इसका कन्द जमीन के अन्दर फैलता है. इसकी लम्बी पत्तियाँ गुच्छों में निकलती हैं और पुष्पव्यूह बाली की भाँति होता है. फल छोटे-छोटे, मांसल बेर होते हैं, जिसमें अनेक बीज होते हैं.

उपयोगी अंग : कन्द (भौमिक काण्ड)

मुख्य रासायनिक घटक : इसके भौमिक काण्ड (राइजोम्स) में 2-4 प्रतिशत सुगन्धित सुवाष्पी तेल पाये जाते हैं. तेल के अन्दर अल्फा एवं बीटा एसेरोन नामक तत्त्व पाये जाते हैं.

औषधीय गुण एवं उपयोग : कफ और वात का शमन करने तथा पित्त को बढ़ाने वाली वच, वाणी एवं बुद्घि में निखार लाती है. यह मिरगी, दमा, स्मृतिनाश, बच्चों का हकलाना, भूख न लगना व पेट दर्द तथा मोटापा दूर करने में भी लाभदायक है.

वेटिवर

प्रचलित नाम : खस

अंग्रेजी नाम : वेटिवर

पौध परिचय : ़खस एक बहुवर्षीय भूमिगत तनायुक्त, सीधी खड़ी रहने वाली घास है. इसकी पत्तियाँ लगभग 2 मीटर तक लम्बी होती हैं. फूल गुच्छ स्पाइसीफार्म असीमाक्ष (रेसीम) में होता है. पुष्पगुच्छ की शाखाएं बहुत सिकुड़ी होती है. अवृन्त स्पाइकिका किनारों से चपटी, रेखाकार व भालाकार होती है तथा पुष्पवृन्त (पेडिसेल्ड) स्पाइकिका 0.6 सेमी. लम्बी होती है.

उपयोगी अंग : जड़, सुगन्धित तेल का मुख्य स्रोत है.

मुख्य रासायनिक घटक : इस तेल का मुख्य रासायनिक घटक खुसीमॉल, वेटीसेलिनीनाता, वीटा यूडिसमाल, अल्फा विटिवोन तथा वेटिवेरॉल है.

औषधीय गुण एवं उपयोग : ़खस का तेल मुख्यत: सुगन्धित द्रव तथा सुगन्ध स्थिरक व फिक्सेटीव के रूप में प्रयोग होता है. साथ ही इसे स्वादगंध और पेय पदार्थों में भी प्रयोग किया जाता है.

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