आइए आज हम आपको राष्ट्रपति भवन के औषधीय उद्यान की सैर करवाएं.

अश्वगंधा

प्रचलित नाम : अश्वगंध, असगंध

अंग्रेजी नाम : विन्टर चेरी, इन्डियन जिनसेंग

पौध परिचय : अश्वगंधा का झाड़ीदार पौधा, साधारणतया सीधा, शाखीय एवं 30 से 150 सेमी. तक ऊँचा होता है. इसकी पत्तियां लम्बोतरी, अण्डाकार से चौड़ी अण्डाकार, 10 से.मी. तक लम्बी तथा रोमों से ढकी होती हैं. फूलों के पास पत्तियाँ छोटी होती हैं. पीले रंग के फूल 5-5 के गुच्छों में पाए जाते हैं. इसके कच्चे फल (बेर) हरे रंग के बाह्य-दल पुंजों में अवस्थित होते हैं. फल परिपक्व पर लाल रंग के हो जाते हैं, जिसमें चपटे एवं गोलाकार पीताभ-श्वेत असंख्य बीज होते हैं.

उपयोगी अंग : जड़

मुख्य रासायनिक घटक : विद्रानिया सोम्नीफेरा से प्रमुखतया क्षराभ (अलोकाएड) एवं विथैनोलाइड्स नामक दो प्रमुख रासायनिक तत्त्व प्राप्त किए गए हैं, जिनके औषधीय गुणों की परख की जा चुकी है.

औषधीय गुण एवं उपयोग : भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में अश्वगंधा एक उच्च कोटि की रसायन एवं बलवर्धक औषधि मानी जाती है. इसके अतिरिक्त इसका उपयोग आमवाल, कुष्ठ, तंत्रिका विकार, दीपन, पाचन, उन्माद एवं अपस्मार आदि व्याधियों में किया जाता है. यह लगभग 150 से भी ऊपर विभिन्न आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधि योगों के निर्माण में घटक द्रव्य के रूप में प्रयोग किया जाता है. शक्तिवर्धक ओर किसी भी प्रकार की कमजोरी के लिए बच्चों को एक टॉनिक के रूप में दिया जाता है.

बर्गामोट मिंट

प्रचलित नाम : विलायती पुदीना

अंग्रेजी नाम : मार्श मिंट, बर्गामोट मिंट, वॉटर मिंट, लेमन मिंट.

पौध परिचय : एक सीधी, शाखाओं वाला पौधा पतली और आमने-सामने, पर्णवृन्त, भालाकार, 1.5-5 सें.मी. लम्बी पत्तियां. सबसे ऊपर, ऊपरी तने की गांठों में छोटे-छोटे फूल और किनारों पर छोटे-छोटे घने कांटे.

उपयोगी अंग : पत्तियाँ

मुख्य रासायनिक घटक : विलायती पुदीना के तेल के प्रमुख घटक लिनालोप (50-50 प्रतिशत) और लिनालिल एसिटेट (30-35 प्रतिशत)

औषधीय गुण एवं उपयोग : विलायती पुदीने के तेल का प्रमुख उपयोग सुगंध और सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है. तेल का उपयोग साबुन, इत्र और प्रसाधन की वस्तुओं में भी होता है.

भूमि आमलकी

प्रचलित नाम : तामलकी, भूई आँवला, हजारदाना

अंग्रेजी नाम : फाइलेन्थस एमारस

वर्षा ऋतु में, फाइलेन्थस एमारस प्राय: देश के सभी प्रांतों में प्रचुरता से उगता है. इसके एकवर्षीय शाकीय पौधे साधारणतया 10-60 से.मी. ऊँचे होते है. पौधे का मुख्य तना सरल चिकना, बेलदार, हल्का भूरा होता है. उन शाखाओं में 15-20 भालाकार पत्तियाँ होती हैं जिनकी ऊपरी सतह गाढ़ी हरी तथा निचली सतह हल्की हरी होती है. इसके फूल उभयलिंगी, तने के निकटस्थ, हमेशा खिलते रहते हैं. इसके फल सम्पुट गोल, ध्रुवों पर चपटे, हल्के भूरे एवं इनके पृष्ठ सतह पर 5-6 समानान्तर लम्बी धारियां पाई जाती हैं.

उपयोगी अंग : सम्पूर्ण पौधा

मुख्य रासायनिक घटक : पौधों में औषधीय गुण युक्त विभिन्न प्रकार के कार्बनिक यौगिक जैसे अलकोलाएड्स, फ्लेवोनाएड्स, लिग्नैन, कुमेरिन इत्यादि पाए जाते हैं जिनके फाइलेन्थिन एवं हाइपो फाइलेन्थिन नामक लिग्नैन प्रमुख हैं.

औषधीय गुण एवं उपयोग : यह कसैले स्वाद का पौधा है, जिसमें कषाए, क्षुधावर्धक, मूत्रल, ज्वरहर, यकृत्तोजक एवं सूक्ष्म जीवाणुनाशक गुण पाए गए हैं. ताजे एवं शुष्क दोनों प्रकार के पौधे का उपयोग पीलिया रोग के उपचार में किया जाता है. पीलिया रोग के लिए बनाई जाने वाली विभिन्न औषधियों में इसका प्रचुर प्रयोग होता है. रासायनिक यौगिक-फिलैंथिन और हाइपोफिलैंथिन में यकृत आविषालुता रोधी प्रमुख गुणधर्म हैं.


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