श्रीहरिकोटा. मंगल अभियान की सफलता के बाद अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत एक और छलांग लगाई है. भारत अब तक के अपने सबसे वजनी और अगली पीढ़ी के रॉकेट भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-मार्क3) को श्री हरिकोटा से लॉन्च किया. जिओ सिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल यानी जीएसएलवी मार्क-3 की यह पहली टेस्ट फ्लाइट है. अगर यह लॉन्च सफल होता है तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो अंतरिक्ष में बड़े सेटेलाइट भेजने की काबिलियत रखते हैं.

इसरो ने आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से भारत के सबसे वजनी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट का प्रक्षेपण किया. अगर ये प्रक्षेपण सफल रहता है तो इसरो अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की अपनी योजना का एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लेगा.

दरअसल जीएसएलवी मार्क-3 अपने साथ एक भारी भरकम कैप्सूल (क्रू मॉड्यूल एटमॉस्फेयर रिएंट्री एक्सपेरिमेंट मिशन) भी लेकर गया है. इसरो न सिर्फ इस कैप्सूल को अंतरिक्ष में भेज रहा है बल्कि वो उसे सकुशल धरती पर वापस लाकर भी दिखाएगा. ये पूरा प्रयोग तकरीबन आधे घंटे चलेगा. यदि ऐसा हो जाता है तो इसरो अंतरिक्ष में कैप्सूल भेजने और उसे वापस लाने की तकनीकी परीक्षा में पास हो जाएगा. यदि 1600 डिग्री सेल्सियस तक गरम वायुमंडल से कैप्सूल को सकुशल धरती पर वापस लाया जा सका तो इसका मतलब होगा कि इसरो ऐसा कैप्सूल बनाने में सक्षम है जो इतनी विपरीत परिस्थितियों को भी झेल सकता है. यहां ये बताना जरूरी है कि ऐसे कैप्सूल में ही अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाता है. हालांकि इस प्रयोग के सफल रहने के बाद भी इसरो को अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने में तकरीबन पांच साल लगेंगे.

जीएसएलवी मार्क-3 को श्री हरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया . इस रॉकेट का वजन 630 टन है. इसकी ऊंचाई करीब 42 मीटर है और यह 4 टन का वजन ले जा सकता है. जीएसएलवी मार्क-3 को बनाने में 160 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट के साथ इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने वाले यान को भी लॉन्च किया जाएगा. मानवरहित इस यान को फिलहाल टेस्ट किया जा रहा है. यह यान दो से तीन लोगों को अंतरिक्ष में ले जा सकता है. यह यान 125 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाएगा, फिर पैराशूट के सहारे धरती पर लौटेगा. बंगाल की खाड़ी में यह यान लैंड करेगा, जहां इसे बाहर निकालने के लिए भारतीय जहाज़ मौजूद रहेंगे.

फिलहाल रूस, अमेरिका और चीन के पास इंसान को अंतरिक्ष में भेजने की काबिलियत है. अगर इसरो का यह टेस्ट कामयाब होता है तो भारत भी इन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा.

इस लॉन्च के साथ ही इंसान को अंतरिक्ष भेजना आसान हो जाएगा. यह यान अपने साथ क्रू मॉड्यूल भी लेकर जाएगा, लेकिन यह मानव रहित होगा.

श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एम. वाई. एस प्रसाद ने बताया, रॉकेट के परीक्षण की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. परीक्षण से संबंधित सभी काम पूरे किए जा चुके हैं. रॉकेट का परीक्षण गुरुवार सुबह 9.30 बजे हुआ. प्रसाद ने बताया कि 630 टन वजनी इस रॉकेट को तरल एवं ठोस ईंधन से ऊर्जा दी गई. उन्होंने बताया कि रॉकेट लांच की उल्टी गिनती के दौरान रॉकेट के तरल ईंधन इंजन में ईंधन भरा गया और निष्क्रिय क्रायोजेनिक इंजन को तरल नाइट्रोजन से भरा गया.

प्रसाद ने इससे पहले बताया कि रॉकेट की इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली को बुधवार देर रात एक बजे चालू गया. इस प्रायोगिक अभियान में 155 करोड़ रुपये की लागत आई है. परीक्षण में रॉकेट के साथ उपग्रह नहीं भेजा गया, क्योंकि वास्तविक क्रायोनिक इंजन इस समय निर्माणाधीन है. लगभग चार टन वजनी उपग्रह को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए तैयार किए गए रॉकेट को ऊर्जा आपूर्ति करने वाला वास्तविक क्रायोजेनिक इंजन इस समय निर्माणाधीन है और इसके दो सालों में तैयार हो जाने की उम्मीद है.

रॉकेट के साथ भेजे गए क्रू मॉड्यूल का परीक्षण इसके पुन:प्रवेश उड़ान और पैराशूट प्रणाली के सत्यापन के लिए किया गया. परीक्षण अभियान के तहत अंतरिक्ष में 126 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचने के बाद रॉकेट क्रू माड्यूल कैप्सूल को अलग कर देगा और इसके 20 मिनट बाद क्रू माड्यूल कैप्सूल पोर्ट ब्लेयर से 600 किलोमीटर एवं अंतरिक्ष केंद्र से 1,600 किलोमीटर दूर बंगाल की खाड़ी में गिरेगा, जहां से भारतीय तट रक्षक या भारतीय नौसेना के जहाज उसे तट तक लाएंगे.

चार टन वजनी क्रू मॉड्यूल का आकार किसी विशाल कप केक के जैसा है, जो ऊपर से काले और बीच से भूरे रंग का है. भारत अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के एक अधिकारी ने बताया कि यह किसी छोटे शयनकक्ष के आकार का होगा, जिसमें दो या तीन लोगों की जगह होगी. प्रसाद ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से क्रू माड्यूल को लाने के बाद इसे पहले एन्नोर बंदरगाह पर लाया जाएगा और वहां से इसे श्रीहरिकोटा पहुंचाया जाएगा. श्रीहरिकोटा से क्रू मॉड्यूल को तरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) लाया जाएगा.


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