घर पर उगाई सब्जियों का मजा ही कुछ और होता है. यदि आपके पास थोड़ी-सी भी जमीन है तो आपकी बहुत इच्छा होगी कि घर की ताजा सब्जियों का लाभ व आनंद उठाया जाए. पालक, मैथी, सलाद, मूली, गाजर, धनिया, सरसों के अतिरिक्त बैंगन, टमाटर, फूल गोभी, बंद गोभी, गांठ गोभी आदि घर की बगिया से बड़ी आसानी से लिए जा सकते हैं.

इसके लिए क्यारी तो उसी प्रकार तैयार की जाती है, जैसे कि फूलों की, परंतु लगाने की योजना में थोड़ा फर्क हो जाता है. एक तो तरीका है कि अलग-अलग सब्जियों की क्यारी लगा दी जाएं. इसके लिए सागनुमा पौधे- मेथी, पालक, सरसों तो अलग-अलग क्यारी में लगाए जा सकते हैं, परंतु बोते समय इन्हें पंक्तियों में लगाने से काटते समय सुविधा रहती है व गुड़ाई भी आराम से की जा सकती है.

गुड़ाई करने से जड़ों को विकसित होने में सुविधा मिलती है. मूली को आप इन्हीं साग की क्यारियों की मुंडेर पर ही लगा सकते हैं. मूली, गाजर, चुकंदर के बीज व गोभी परिवार की पौध कभी भी एक साथ न लगाएं, बल्कि इनके चाहे बीज बोएं या फिर पौध लगाएं, इन्हें कम से कम दस दिनों के अंतराल से लगाएं. नहीं तो एक साथ तैयार हो जाने पर इन्हें एक साथ प्रयोग में लाने की समस्या रहेगी. अत: इनके बीज व पौध जो भी लगाएं, दस दिन के अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा लगाएं. इसी प्रकार सलाद की भी बहुत-सी किस्में आ गई हैं. आप थोड़े-थोड़े पौधे ही लगाएं व आवश्यकता पड़ने पर सलाद के पत्ते चारों ओर से थोड़े-थोड़े निकालते रहें व ऊपर वाले बीच के पत्तों को छोड़ दें.

यदि आपके घर में कच्ची जगह नहीं है, छत है और पर्याप्त स्थान है तो किचन गार्डन का शौक आप छत पर भी पूरा कर सकते हैं, लेकिन थोड़ा परिश्रम करना होगा. गमलों में सब्जी उगाकर या छत पर क्यारियां बनवाकर.

गमलों में 9 या 12 इंच के गमलों का चयन करना होगा. 12 इंच का गमला बेहतर रहेगा. इनके पैंदे को ठीक कर लें ताकि अतिरिक्त पानी के निकास की व्यवस्था हो सके. अब इनमें खाद व मिट्टी का मिश्रण भरें जिसमें थोड़ा सुपर फॉस्फेट, बोन मील व नीम की खली डाल दें. धनिया, पुदीना जैसे पौधे के लिए 12 इंच के चौड़े मुंह वाले कुंडिया अच्छी रहेंगी.

दीवार के सहारे या अपनी सुविधानुसार छत के कोने में या मध्य में स्थान तय करें जहां पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो. दीवार व फर्श पर जलरोधी पेंट करें और उस पर एक मोटी पॉलिथीन बिछाएं. यह पॉलिथीन फर्श से दीवार तक एक हो. इस पर करीब एक फीट तक मिट्टी बिछाएं. लंबाई में पांच-पांच फीट तक रख सकते हैं. जरूरत के मुताबिक क्यारियां छोटी की जा सकती हैं. क्यारियों में नीचे छेद रखना न भूलें. अतिरिक्त पानी के निकास के लिए सहारे वाली ईटों की चुनाई के पश्चात प्लास्टर करवा सकते हैं. चिनाई से भी काम चल जाएगा. इन क्यारियों में आप वह पानी भी छोड़ सकती हैं जो रसोई में उपयोग के बाद व्यर्थ बहा दिया जाता है. यह पानी की बचत का महत्वपूर्ण साधन हो सकता है.


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