जावद.तहसील के ग्राम खोर में स्थित विक्रम सिमेंट फैक्ट्री में ठेकेदार जी.एस.इंजिनियरिंग के अधिनस्त कार्यरत 30 वर्षीय श्रमिक निर्मल पिता घीसालाल बड़ोलिया की प्लांट में कार्य करने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. श्रमिक की मौत की सूचना मिलते ही फैक्ट्री गेट पर ग्रामीणों का जमावाड़ा हो गया. पुलिस भी बिना किसी विलम्ब के वहां पहुंच गई थी. ऐसे में आक्रोशित ग्रामीणों की भीड़ देख फैक्ट्री प्रशासन ने तत्काल 12 लाख का मुआवजा देकर मामले को रफा दफा करवाया.

प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रमिक निर्मल धाकड़ आज प्रात: घर से फैक्ट्री गया था जहां वह कार्यरत था कि अचानक उसके सीने में दर्द उठा तो उसके सहकर्मी उसे तत्काल विक्रम सिमेंट के स्थानिय चिकित्सालय ले गये जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे गीतांजली हास्पीटल उदयपुर रेफर कर दिया. परन्तु श्रमिक ने रास्ते में ही दम तौड़ दिया. जैसे ही श्रमिक की मौत की खबर परिजनों व ग्रामीणों को हुई तो फैक्ट्री गेट पर वे आ धमके और माहौल तनावपूर्ण हो गया. ग्रामीणों का आक्रोश देख फैक्ट्री प्रशासन ने गेट पर सिक्यूरिटी गार्ड की तैनाती कर दी तब तक सूचना मिलने पर थाना प्रभारी पियूष चाल्र्स भी दल बल के साथ गेट पर पहुंच गये. स्थिति को देख मजदूर युनियन पदाधिकारियों, मृतक के परिजनों व फैक्ट्री प्रशासन के बीच समझौता वार्ता सम्पन्न हुई. सूत्रों का कहना है कि इस समझौता वार्ता ने मृतक के परिजनों को 12 लाख के मुआवजे में राजी कर लिया और वे मृतक का शव गांव ले गये जहां उन्होने उसका अंतिम संस्कार कर दिया.

क्यों नही होने दिया पोस्टमार्टम : अहीर

इस मामले को लेकर किसान नेता राजकुमार अहीर ने आरोप लगाते हुए कहा कि सी भी दुर्घटना के बाद हुई मौत के मृतक का पोस्टमार्टम करवाया जाना कानूनन जरूर है ताकि मौत के कारणों का खुलासा होने के साथ ही मृतक का परिवार दुर्घटना बीमा राशी से लाभान्वित हो सके परन्तु इस मजदूर की मौत के बाद फैक्ट्री प्रशासन व पुलिस ने बगैर पोस्ट मार्टम के शव परिजनों के हवाले कर उसके बीमा राशी से वंचित करने के अलावा इस ताबड़तोड़ कार्यवाही को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।



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