नीमच. भोले बाबा की भक्ति की अलख जगाने वाले श्रावण मास में समूचे आषाढ़ रूठे रहे इन्द्र को भी भोले भंडारी का अभिषेक करने आना पड़ा और उसने किसान हो या जनजीवन सभी की पथराई आंखों को सकून दे धरती की प्यास बुझा उसे हरित चुनर ओढ़ाने का दायित्व निभा ही दिया ।

गत एक माह से बरसात का इंतजार कर रहे जनजीवन को जब श्रावण मास ने वर्षा की सौगात दी तो उसका मन मयूर नाचने लगा है क्योंकि श्रावण मास की अगवानी के साथ शुरू हुई बरसात प्रतिदिन अपनी उपस्थिति जरूर दर्ज करवा रही है । जिसकी वजह से डूबते को तिनके का सहारा वाली कहावत चरितार्थ होकर किसानों ने बोवनी करने का कार्य पूर्ण कर लिया है । क्योंकि अब आसमान में हो रही बादलों की आवाजाही, उमस, ठंडी हवाओं का समन्वय सतत वर्षा का संदेश देकर जनजीवन की उम्मीदों को पर लगा रहा है । वैसे बरसात की इस खेंच से खरीफ फसलों के उत्पादन को एक माह आगे बढ़ा दिया है जो रबी की फसल के लिये परेशानी व घाटे का सौदा बनना तय है । किसानों के इस तर्क के साथ ही उनका यह भी कहना है कि अगर श्रावण मास में सतत रिमझिम व झमाझम वर्षा की उसे सौगात मिलती रही तो पानी की इफरादी होने पर उसकी रबी फसलों को ज्यादा नुकसानी नहीं होगी । बरसात के साथ ही किसान खेतों में बोवनी का कार्य कर अब अपनी फसलों के अंकुरण के साथ ही उनकी परवरिश की चिंता में लग गया है ।

बोवनी प्रारंभ

बादलों की गडग़ड़ाहट और बिजली की चमक के साथ एक घंटा हुई बरसात । दोपहर 12.30 बजे से 1.10 मिनिट तक हुई तेज बारिश से क्षेत्र तरबतर । इस वर्षा से किसानों में खुशी । क्षेत्र के 70 फीसदी किसानों ने अपने खेतों में बोवनी कर दी एवं फसल ने अंकुरण लेकर खेतों में हरियाली दिखाई देने लगी । वर्षा से सिंगोली, फुसरिया, धोगवां, कछाला, धनगांव, थड़ोद, गोविन्दपुरा, बनेडिय़ा, धारड़ी कदवासा हुए तर-बतर ।



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