नीमच. कृषि उपज मंडी में किसान संघ द्वारा किये गये अनिश्चितकालीन बंद ने शहर के व्यवसाय व विकास को प्रभावित कर कृषि मंडी में प्रतिदिन होने वाले करोड़ों के कारोबार को रोककर सभी वर्ग के लोगों को प्रभावित कर मंडी की आय को भी लाखों के घाटे में उतार दिया है ।

भारतीय किसान संघ के आव्हान पर अनिश्चितकालीन बंद का हजारों किसानों की उपस्थिति में ऐलान करने वाले किसान संघ के पदाधिकारियों का वजूद महज दो चार सौ किसान ही एकत्रित कर पाया और उसने प्रदेश ही इस जवाबदार व अपनी खासी साख रखने वाली कृषि मंडी का कारोबार रोककर किसानों का भला करने की बजाय उन्हें उपज बेचने हेतु अन्यत्र मंडियों में भटकने पर मजबूर कर मंडी गेट बंद कर दिया जो किसी भी प्रावधान के अनुरूप नहीं है । क्योंकि जहां तक आंदोलन का सवाल है उसके लिये किसान संघ स्वतंत्र है परंतु सवाल यह है कि उसे मंडी गेट बंद करने का अधिकार किस कानून ने दिया। इसका जवाब शायद उसके पास भी नहीं है । आंदोलन शुरू होने के बाद अक्सर अपनी वाहवाही करवाने वाले एक सदस्य जो प्रदेश कार्यकारिणी में हैं । इस सदस्य ने भी मोर्चा सम्हाल कर धरना स्थल पर डेरा जमा लिया है । जो केवल और केवल अपनी डिंगे हांकते हुए किसानों को प्रभावित करने के जतन में ही लगा रहता है । मुख्यमंत्री से भेंट के लिये जाने पर होने वाली खान पान व ठहरने की व्यवस्था का बखान करना वह नहीं भूलता जो इस बात को दर्शाता है कि ये चंद रोटीराम किसान की भलाई को कैसे मूर्त रूप दिलवा सकते हैं । रही बात मंडी में व्याप्त समस्याओं, अनियमितताओं, अवैध वसूली, नवीन कृषि मंडी निर्माण कार्य शुरू होने की तो इन तमाम बातों का समाधान मंडी बंद करना कतई नहीं है इसके लिये मंडी कारोबार शुरू रख किसान संघ के पदाधिकारी व सदस्य छापामार कार्यवाही करने का साहस दिखा सकते थे तो सांप भी मर जाता और लाठी भी नहीं टूटती मगर उनका वजूद यह सब इसलिए नहीं कर पाया कि उनको मार्गदर्शन देने वाला एक मात्र बाहरी याने प्रदेश सदस्य जो उनका नेतृत्व सम्हालता है वह केवल अपनी ही टर-टर लगाने में व्यस्त होकर खुद को ही ज्यादा ज्ञानवान समझता है । जहां तक समस्याओं अवैध वसूली का सवाल है उसका निदान समन्वय से ही संभव है । किसान को इस अवैध वसूली रोकने में पहले अपने हित का त्याग कर खुद सुधरना होगा तो कृत्यकारी खुद ब खुद सुधर जाएंगे । किसान संघ को वैसे तो मंडी में व्याप्त अनियमितताओं, समस्याओं का स्टिंग ऑपरेशन करने की फुर्सत नहीं बल्कि केवल प्रेस विज्ञप्ति जारी कर किसान हित के आंसू बहाना उसे बहुत अच्छी तरह आता है । मंडी में जारी इस अनिश्चितकालीन बंद को लेकर आज भी कोई समाधान सामने नहीं आया है । वैसे शासन ने मंडी सचिव के. डी. अग्निहोत्री को जरूर नीमच मंडी सचिव पद से हटाकर भोपाल भेज दिया है ।



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