मुम्बई. ठिठोली अवार्ड, टीओवाईपी अवार्ड, महाकवि निराला सम्मान, कलाश्री अवार्ड, अट्टहास शिखर सम्मान, काका हाथरसी अवार्ड, हास्य रत्न अवार्ड के विजेता हास्य कवि हुल्लड़ मुरादाबादी का शनिवार को दोपहर बाद मुंबई में निधन हो गया. 72 वर्षीय हुल्लड़ लंबे समय से बीमार चल रहे थे.

बहुत कम लोग जानते हैं कि हुल्लड़ मुरादाबादी का असली नाम सुशील कुमार चड्ढा था.

हुल्लड़ मुरादाबादी का जन्म 29 मई 1942 को गुजरावाला पाकिस्तान में हुआ था. परिवार में पत्नी कृष्णा चड्ढा के साथ ही युवा हास्य कवियों में शुमार पुत्र नवनीत हुल्लड़, पुत्री सोनिया एवं मनीषा हैं. हुल्लड़ मुरादाबादी के निधन की खबर से शहर के कवि साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई.

उन्होंने क्या करेगी चांदनी, जिगर से बीड़ी जला ले, मैं भी सोचूं तू भी सोच जैसी हास्य से सराबोर किताबें लिखीं. दो फिल्मों में अभिनय भी किया.

शुरुआत में उन्होंने वीर रस की कविताएं लिखी लेकिन कुछ समय बाद ही हास्य रचनाओं की ओर उनका रुझान हो गया और हुल्लड़ की हास्य रचनाओं से कवि मंच गुलजार होने लगे. सन 1962 में उन्होंने सब्र उप नाम से हिंदी काव्य मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. बाद में वह हुल्लड़ मुरादाबादी के नाम से देश दुनिया में पहचाने गए. फिल्म संतोष एवं बंधनबाहों में भी उन्होंने अभिनय किया था.

प्रकाशित पुस्तकें

इतनी ऊंची मत छोड़ो, क्या करेगी चांदनी, यह अंदर की बात है, त्रिवेणी, तथाकथित भगवानों के नाम (पुरस्कृत), हुल्लड़ का हुल्लड़, हज्जाम की हजामत, अच्छा है पर कभी कभी.

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