पल पल इंडिया ब्यूरो. बुरहानपुर. बहादरपुर सहकारी सूत मिल कांग्रेस मंत्री मंडल के एक निर्णय से बंद होने केबाद पूरी की पूरी मिल लापता हो गई. तब सेलेकर आज तक वहां के मिल मजदूर आज भीलावारिश होकर रह गएं.मप्र की प्रथम सहकारिता सूत मिल की एक-एक ईटे गायब हो गई. वहां के सारे मजदूरबेरोजगार हो गएं. मिल का एक-एक सामान लोगट्रकों में लादकर उठा ले गएं. लेकिन उस समयका शासन और प्रशासन मौन साधे रहा. हालातके मजबूर मजदूर आज भी अपनी ग्रेज्यूटी फंडको लेकर दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर होरहे हैं, लेकिन इनकी सुनवाई करने वाला कोईमसिहा नहीं दिख रहा. बहादरपुर की सहकारिता सूत मिल अप्रैल1998 को मंत्री मंडल के लिए निर्णय के अनुसारबंद हो गई. मिल का शुभारंभी 1969 में प्रदेश के तत्कालिन मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुल के द्वाराकिया गया था. इस मिल में बहुत ही अच्छीवालिटी का धागा बना करता था. मिल के भीतरकुल स्थाई कर्मचारियोंं की सं या कुल 504 थीतथा अस्थाई मजदूर 210 थे एवं बदली श्रमिक 280 थे.इस मिल में लाखों रुपए का धागा प्रतिदिनबना करता था. मिल में 25 हजार स्पेंडल लगें हुएथे. जिनसे छह हजार किलोग्राम धागा बनता था.मिल में कार्यरत मजदूर की उम्र 35-40 साल कीथी उसी दौरान इस मिल को बंद करा दिया गया.चूकि मिल घाटे में जा रही थी, शायद इसलिए तत्कालिन राज्य सरकार ने इसे बंद कराना ही उचित समझा. लेकिन मिल के मजदूरों की दशाकी ओर ध्यान देना भाभी ला$जमी नहीं समझा. चूकिनौकरी के कुछ ही वर्षों बाद यह मिल बंद हो गई.लोग सडक़ पर आ गएं. ऐसे में यहां कार्य करनेवाले मजदूरों का जीवन निर्वाह करना मुश्किल होगया. मजदूरों को परिवार बेघर जैसा हो गया. येलोग दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज हो गएं.हर महिने सुनने में आने लगा कि किसी ने आत्महत्या कर ली, कोई भूख से तो कोई बीमारी से मररहा हैं. ऐसे उत्पन्न हुए हालात में भी किसी नेमुडक़र भी इन मजदूरों की ओर नहीं देखा.मजदूरों के बच्चों की शादी, शिक्षा भी करा पानाना मुमकिन हो गया. यहां के मजदूरों ने अपनेमेहनत की कमाई का पैसा मांगने के लिएतत्कालिन मुख्यमंत्री तक दौड़ लगाई. लेकिन नतिजा वहीं ढाक के तीन पात रहा.बूढ़े हो चूके कर्मचारी अपनी कमजोर आंखोंसे आज भी भीरोसा नहीं खोएं हैं. उन्हें उम्मीद हैं कि कोई तो आएंगा जो उनके मेहनत का वाजिब हक दिला सकेगा. इस मिल की लागत लगभीग75 करोड़ रूपए के आसपास थी. प्रथम सहकारीसूत मिल का उचित देखरेख न होने के कारण यहमिल धीरे-धीर घाटे में जाने के चलते अंतत: बंदकर दी गई और कुछ ही दिनों में दलालों एवं चोरोने पूरी मिल को पुरी तरह समाप्त कर दिया.



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