पल पल इंडिया ब्यूरो, बुरहानपुर. आज 1 जूलाई को विश्व डॉक्टर्स-डे है. वही डॉक्टर को भगवान दूसरा रूप माना जाता है, क्योंकि वह जिंदगी और मौत के फासलो को दूर कर कई लोगो को नया जीवन प्रदान करता है. वर्तमान समय में जहां कई चिकित्सक केवल पैसो के लिये कार्यकर रहे है, वही कई डॉक्टर पैसो के साथ-साथ गरीब मरीजों का नि:शुल्क उपचार भी करते है. जिनका बाकायदा समय-समय पर समान भी किया जाता है. आज विश्व डॉक्टर्स-डे पर बुरहानपुर जिले के जिला चिकित्सालय में चिकित्सको की कमी एवं जिले के एकमात्र आयुर्वेदिक कॉलेज की मान्यता रद्द होने के कारण प्रतिवर्ष जो चिकित्सक जिले को मिल रहेे थे, उसके बारे मेंं विस्तृत रूप से चर्चा करेगे. साथ ही आवश्यकता से कम डॉक्टरों पर जिला चिकित्सालय किस तरह से चल रहा है, उसके बारेे मेंं भी बतायेगे. 38 की जगह 19 ही डॉक्टर जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन 900 मरीज अपनी परेशानियों को लेकर पहुंचते है. जिन्हे देखने वाले मौके पर मात्र चार से पांच डॉक्टर ही रहते है. जिसका मुख्य कारण जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों कीकमी है. मिली जानकारी के अनुसार जहां प्रतिदिन जिला चिकित्सालय में इमरजेंसी चिकित्सको में 12 डॉक्टर तैनात रहना चाहिए, वहां मात्र चार डॉक्टरों से कार्य लिया जा रहा है. उस पर भी उन डॉक्टरों से सभी प्रकार के कार्य करवाये जा रहे है. जहां एक ओर जिला चिकित्सालय में प्रथम श्रेणी चिकित्सक के 23 पद स्वीकृतहै, उसमें से केवल 14 कार्यरत है, वही द्वितीय श्रेणी चिकित्सक के 15 पद स्वीकृत है जिसमें केवल 5 कार्यरत है. अत: जिला चिकित्सालय में चिकित्सको की कमी के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जिस ओर ध्यान देने वाला कोई नही है. जिसके चलते बुरहानपुर के मरीजों को आस-पास के बड़े शहरो का रूख करना पड़ता है. वही रास्ते में जाते समय कई लोगो की जान भी चली गई है. छह: बर्षों से अटकी मान्यता जिले के एकमात्र शासकीय पंडित शिवनाथ शास्त्री आयुर्वेदीक महाविद्यालय की सौगात मिली थी, जहां से प्रतिवर्ष 40 आयुर्वेदिक चिकित्सक बाहर निकलते थे और मरीजों का उपचार करते थे. किन्तु पिछले 6 वर्षो से सीसीआईएम द्वारा मापदंड पर पूर्ण न होने के कारण कॉलेजको मान्यता नही दी जा रही है. अत: पिछले6 वर्षो से एक भी आयुर्वेदिक चिकित्सक बाहर निकल नही पाया है. न ही तो जिलेमें 240 आयुर्वेदिक चिकित्सक मौजुद रहते, किन्तु ऐसा नही हुआ. हालांकि आयुर्वेदिक कॉलेज को प्रशासन द्वारा 6एकड़ भूमि दी गई है. साथ ही 3 करोड़रूपये की राशि भी स्वीकृत हुई है, वहां वन बनाने हेतु 10 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे आशंका बनी हुई है कि जल्द से जल्द आयुर्वेदिक कॉलेज प्रारंभ हो पायेगा. वर्तमान में आयुर्वेदिक कॉलेज को मान्यता नही मिलने का मुख्य कारण स्टॉफ की कमी बताई जा रही है.



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