पल पल इंडिया ब्यूरो, बुरहानपुर. वर्तमान समय मेंं मौसम विभाग की सूचना पर नजर डाले तो पता चलता है कि वर्षाकाल को अभी समय है, 7 से 10 जूलाई के मध्य वर्षा प्रारंभ होनेकी संभावना बनी हुई है. वही जिले में दूसरी ओरजल संकट गहराने की संभवना बनी हुई है. जहां एक ओर शहरी क्षेत्र मेंउतावली नदी से 15 ट्युबवेल एवं दोबावड़ी के माध्यम से जल वितरण कियाजा रहा है, करीब 20 दिन वर्षाकाल केविलंब से होने के कारण जल स्तर घट गया है. अत: सब की निगाहे आसमान की औरटीकी हुई है, कि कब वर्षा होगी. बुरहानपुर जिले के शहरी क्षेत्र में उतावली नदी सपवेल से 70 प्रतिशत पिनेके पानी का वितरण किया जाता है. यहां पर 15 ट्युबवेल एवं दो बावड़ी के माध्यम से राजपुरा, उपनगर लालबाग एवं किला रोड़पर स्थित पानी की टंकियों में पानी एकत्रितकर वार्डो में वितरीत किया जाता है. किन्तुवर्षाकाल को 20 दिन विलंब होने केकारण जल स्तर घट चुका है एवं 200फिट तक पहुंच चुका है. जिसके कारण ट्युबवेल से आने वाली जल धारा पतली हो चुकी है. मौसम विभाग के अुसार 7 से10 जूलाई के बीच वर्षा हो सकती है या इससे भी अधिक विलंब हो सकता है.जिसके चलते बचे-कुचे नलकुप भी दमतोड़ सकते है और जहां एक ओर वर्तमानसमय में वार्डो में एक दिन के बाद पानी मिल रहा है, वह सप्ताह में एक दिन भी होसकता है. उतावली नदी के किनारे स्थित वाटर पंपीग स्टेशन से शहर भर के वार्डा में जल प्रदाय किया जाता है. इस सब स्टेशन पर उतावली नदी के किनारे खुदवाये गये करीब 15 ट्युवबेलतथा दो बावड़ी का पानी चौबीस घंटे मोटरपंप की सहायता से एकत्रित कर विभिन्नवार्डो में वर्तमान समय तो जल प्रदाय किया जा रहा है. परंतु जैसे जैसे वर्षाकाल प्रारंभ होने में देरी होगी तो शहरी क्षेत्र में कुछ वार्डो में जल प्रदाय की समस्या उत्पन्न होने की संभावना से इन्कार नही किया जासकता है.

पनप सकता है जल संकट उतावली नदी के किनारे स्थित वाटरपंपिग स्टेशन पर कार्य करने वाले निगम कर्मचारीयों ने बताया कि सब स्टेशन परजो पानी टयुबवेल तथा बावड़ी के माध्यम से एकत्रित हो रहा है उसमें वर्तमान समयमें करीब 15 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है. जैसे जैसे वर्षाऋतु में देरी होगी, वैसे-वैसे जमीन से जलस्तर और अधिक गिरने लगेगा जिससे ट्युबवेल जमीन से पानी नही खिंच पायेगें. साथ ही उससे शहर केकुछ वार्डो में जल प्रदाय करने में समस्याका सामना करना पड़ सकता है.

जिला प्रशासन एवं नपा प्रशासन ने नहीं उठाए कोई कदम

मौसम विभाग के अनुसार 20 दिन देरी से वर्षाकाल प्रारंंभ होने के कारण जिले में पानी का संकट गहरा सकता है, लेकिन जिला प्रशासन एवं नगर पालिक निगम द्वारा इस ओर कोई ठोस कदम आज तक नही उठाये गये है. एनवत पर पानी के संकट से कैसे उभरा जा सकता है, यह एक विचारणीय प्रश्न बन रहा है? जहां एक ओरवर्षाकाल देरी से प्रारंभ होने के कारण दिन-प्रतिदिन नलकुपो के कंठ सुखा रहे है, व जल स्तर घट रहा है, फिर भी इस ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है. जिससे इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं.

कृषि पर भी हो सकता है असरपिछले वर्ष जिले में 28 जून तक 343.8 एमएम बारिश दर्ज की गई थी, इस वर्ष 28 जून तक मात्रा 48.7 एमएम ही वर्षा दर्ज हो पाई है. अत: विगत वर्षसे 300 एमएम कम है. बारिश को देरी होने कपास, सोयाबीन, उड़द, मुंग जैसी खरीफ की फसलें प्रभावित हो सकती हैं. जिसका सिधा असर फसलोंकी पैदावार पर होगा और उत्पादन कम होने कीआशंका बनी हुई है. हालांकि कृषि उपसंचालक एमकेदेवके ने किसानो से अपील की है कि 10 जूलाई तककिसानो ने बोवनी नही करना चाहिए एवं 3 इंचबारिश होने पर ही बोवनी करे, साथ ही बीजो कासही रोपण करे. कपास की खेती में मुंग, उड़द एवं तिल की खेती करे, वही बोवने के पूर्व जैविक खाद का उपयोग करे, बीजो का परीक्षण करे, सोयाबीन के बीजो का अंकुरण कर ही बोये ऐसे कई उपाये बताये है, किन्तु वर्षा नहीं होती है तो इसका असर सीधा किसान पर भी होगा. धीमी हुई पानी की रफ्तार...नदी के किनारे स्थित उतावली सब स्टेशन पर 15 टयुबवेल से वर्तमान समय 24 घंटे पानी खिंचा जा रहा है. जिससे शहरी क्षेत्र के सभी वार्डो को पर्याप्त जल मिल सके. परंतु हमारे प्रतिनीधी द्वारा पंप स्टेशन का दौरा करने पर पाया कि 15 टयूबवेल में कुछ टयूबवेल की पानी खींचने की रफ्तार लगातार धीमी होती जा रही है. निगम कर्मचारी के अनुसार पानी एकत्रित होने वाले टैंक जो की 25 फिट गहरा तथा 25 फिटचौड़ा है वह वर्षाकाल तथा शीतकाल में मात्र आधे से पौन घंटे में लबालब भर जाता थ. लेकिन जून माह मेंपानी की खपत अधिक होने तथा जलस्तर गिरने के कारण टैंक में पानी 24 घंटे मोटर चलने के पश्चातभी भर नही पा रहा है. जिस कारण आगामी दो माह में और अधिक पानी कम हो सकता है जिससे जलसंकट उत्पन्न होने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है.  



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