पल पल इंडिया ब्यूरो, नीमच. करोड़ो का प्रतिदिन कारोबार करने वाली नीमच कृषि उपज मंडी की साख को शर्ने:शर्ने गिखी रखने को आमार्दा मंडी प्रशासन कोई कसर नही छोड़ रहा है. अव्यवस्था किसानों के साथ लूट-खसौट इस मंडी की दिन चर्या में शुमार होने के साथ ही मंडी प्रशासन की भ्रष्ट कार्यशैली इसकी साख को बट्टा लगाकर अपनी जेब भरने में लगा है. मंडी में उपज लेकर आने वाले किसानों की उपज चौरी होना आयेदिन की बात हो गई है जिसके फलस्वरूप मंडी की आवक प्रभावित होकर मंडी के राजस्व का कबाड़ा कर रही है. पूर्व सचिव रजिन्द्रसिंह गेहलोत के कार्यकाल में आवारा तत्वों व छोटे- छोटे बच्चों द्वारा मंडी में किसानों की उपज चौरी पर लगभग पूर्णतया लगाम कस दी गई थी जो उनके जाने के बाद अब पुन: धडल्ले से जारी होकर इन आवारा बच्चों के आतंक से किसान त्रस्त हो गये है ये बच्चें झाड़ू और बोरी का कट्टा लेकर सौरन के बहाने दिन भर मंडी में मंडराते रहते है और किसान के इधर-उधर होते ही उसकी उपज को 2 किलों से 5 किलो तक का चूना लगा रफूचक्कर हो जाते है जिसे तत्काल मंडी प्रांगण के बाहर दुकानों पर बेच पुन: घात लगाना शुरू कर देते है. रात्री में भी इन बच्चों के अलावा अवारा तत्वों से किसानों की उपज सुरक्षित नही है. न तो मंडी में पेयजल की समूचित व्यवस्था पर्याप्त पेयजल होने के बावजूद नही है. यही नही रात्री में यहां आने वाले किसानों को चाय व पानी उपलब्ध करवाने का भी टोटा है. कुछ गरीब लोग हाथ ठेला लगाकर रात्री में किसानों की चाय पानी की व्यवस्था व सेवा करते है उनके साथ नवरात मंडी सचिव की ज्यादतियां शुरू होकर वे उन्हे भगाकर इस मंडी को पूरी तरह इन अवारा तत्वों की चोरियों के हवाले करना चाहते है क्योंकि मंडी में व्यवस्था नही होने की वजह से किसानों को मंडी के बाहर जाना पड़ता है ऐसे में उसकी उपज आसानी से असामाजिक तत्वों की भेंट चढ़ जाती है नवगत सचिव जो आफिस की कुर्सी अपनी दादागीरी ईमानदार लागों को दिखाते नजर आते है. उन्होने अब मंडी में चाय- नाश्ता की व्यवस्था कर रोजी रोटी कमाने वालों को नोटिस थमा दिये है. याने इन महाशय को मंडी मेेंं अदने से लेकर अधिकारियों तक किये जा रहे भष्टाचार से कोई कोई एतराज नही है बल्कि मेहनत की कमाई करने वालों से इन्हे तकलीफ है जिसका सीधासा अर्थ है कि मेहनत की कमाई करने वालों से शायद उनकी स्वार्थ सीद्धि नही हो सकती इसलिये उनके प्रति वे नजरे टेड़ी कर रहे है. किसानों व गरीब व्यवसाईयों ने जिला कलेक्टर से आगृह किया है कि वे हस्तक्षेप कर सचिव की इस अप्रासंगिक कार्यशैली से राहत दिलवाएं. इस मंडी के भ्रष्टाचार का जहां तक सवाल है वह ऐसी मलाई है जो सभी के मुंह लगी होकर मंडी की राजस्व आय हो या व्यवस्था सुधार के नाम किये जा रहे भ्रष्टाचार का कीर्तिमान रच रही है. मंडी में स्थापित राष्ट्रपति महात्मा गंाधी की मूर्ति के यहां लगी पोल की स्ट्रीट लाईट एक पखवाडें से ज्यादा समय ेस बंद पड़ी होकर किसानों को आहत कर रही है मगर सचिव महोदय को उसे चालू करवाने की कतई चिंता नही है. यही हाल मंडी में लगाई गई हाई मास्क लाइटों का हेै जो बंद पड़ी होकर उन पर खर्च किये लाखों रूपयों का हिसाब मांग रही है इस तरह कई अव्यवस्थाएं और किसानों के साथ होने वाली लूट-खसौट मंडी के व्यवसाय का दिन -प्रतिदिन भट्टा बिठा रही है. सूत्रों की माने तो नवागत सचिव की कार्य शैली से कर्मचारी व कृत्यकारी भी आहत होकर उन्हें कोैसते ही नजर आते है.