पल पल इंडिया ब्यूरो, नीमच. आज से ठीक चार दिन बाद लोकसभा प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ई व्ही एम मशीने उगलेगी. परन्तु जैसे- जैसे यह समय नजदीक आ रहा है उम्मीदवारों की सांसे उपर-नीचेे होकर उनकी धडक़नें बढ़ा रही है. वैसे तो भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के प्रत्याशी, नेता और कार्यकर्ता अपनी जीत के दावे- प्रतिदावे कर रहे है. मगर हकीकत कुछ और बयां कर मन्दसौर- नीमच संसदीय क्षैत्र के चौकाने वाले परिणाम देने का इशारा कर रही है. जहां तक चैकाने वाले परिणाम की बात है ये दो तरफा होंगे याने चीत भी मेरी और पट भी मेरी क्योंकि अगर कांग्रेस उम्मीदवार को जीत का सेहरा बंधता है तो यह परिणाम इसलिये चौकाएगा कि चुनावी प्रचार के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार का गलत चुनावी प्रबंधन व मंहगाई के खिलाफ जनाधार उसकी जीत की राह रोकता नजर आया था. उसके अलावा कंाग्रेस कार्यकर्ताओं की चुनावी प्रबंधन से उभरी नाराजगी भी जीत का रोड़ बन रही थी ऐसे में अगर कांग्रेस इस सीट पर पुन: कब्जा करती है तो यह परिणाम भी चौकांने वाला कहा जाएगा. ठीक इसी तरह जहां तक भाजपा उम्मीदवार का सवाल है वह नया चेहरा होकर संसदीय क्षैत्र के लिये विशेष वजूद नही रखता जितकी खिलाफत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों ने बिना हिचक की थी. ऐसे में अगर मोदी लहर कहें या उनके सत्तायोग के परिणाम स्वरूप वह यह संसदीय सीट भाजपा की गौद में डाल देता है तो भी ये परिणाम चौकाने वाला ही होगा. खैर. कहते है नाई-नाई बाल कितने तो 16 मई को वे हमारे सामने आ ही जाएंगे. लाल माटी की पहचान बनी धर्माराधना नीमच की लाल धरा का ये सौभाग्य है कि यहां के लोग जिस आस्था, श्रद्धा व धर्माराधना के दीवाने है वह आये दिन इस शहर को धार्मिक आयोजनों की सौगात देकर धर्म की बयार प्रवाहित करती रहती है. समाजसेवी दानदाताओं को जन्म देने वाली इस नगरी ने कई ऐसे राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतो को अपनी गौद का सम्बल देकर शिखर तक पहुचाने का गौरव पाया है. सभी धर्म के संत महात्माओं की अमृतवाणी का रसास्वादन कर उन्हे आत्मसात करने वाली इस शहर की धर्म परायण जनता कभी भी जाति-समुदाय के झगड़े में नही पड़ती बल्कि प्रत्येक धर्म-समुदाय के धार्मिक आयोजनों में सहभागी बन कौमी एकता की मिसाल कायम करती है और यही नजारा वर्तमान में यहां जारी शंखेश्वर जैन पाश्र्वनाथ मंदिर महोत्सव के दौरान चल रहे मूर्ति प्रतिष्ठा आयोजन में दिखाई दे रहा है जहां इस आयोजन को आशिर्वाद देने पधारे आचार्य देवेश रवीन्द्र सूरिश्वरजी म.सा. एवं ज्योतिषसम्राट राष्ट्र्रसंत मुनिवर ऋषभविजय जी के दर्शन लाभ का लाभ लेकर उनके आशीर्वाद से हर समाज का व्यक्ति गद्गद् हो रहा है. और अन्त में..... जाकी फटे ना बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई ये ऐसी कहावत है जो नगर पालिका प्रशासन हो या अध्यक्ष जर पूूर्ण रूपेण लागू होती है क्योंकि नपाध्यक्ष के पांच वर्षीय कार्यकाल में वह नगर को ऐसा कोई तोहफा नही दे पाई जो उसके कार्यकाल को याद रख सके. बल्कि आज शहर की सफाई व्यवस्था से लेकर वे तमाम मूलभूत व्यवस्थाएं पंगु होकर आने वाले निकाय चुनाव मेंं पार्षद हो या अध्यक्ष सभी से हिसाब चुकता करने पर उतारू है पेयजल का जहां तक सवाल है अगर नल से बाल्टी भरकर शाम तक उसे रख दिया जाए तो शाम को बाल्टी के पेंदे में जमी हुई गाद देखकर कोई भी व्यक्ति उस पानी ाके पीने का खतरा मोल नही लेगा. इस प्रकार पांच साल के लिये चुने गये जनप्रतिनिधियों ने नपा में बैठकर सिर्फ और सिर्फ अपना ही भला किया है जिसकी नाराजगी स्पष्ट रूप से शहर के गली- मोहल्लों से चौराहों तक अपना आक्रोंश दिखाती नजर आ रही है.



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