पल पल इंडिया ब्यूरो, नीमच. दादा गुरूदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाटपरम्परा के सप्तम्पट्टधर आचार्यदेवेश प.पू. श्रीमद्विजय रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा.ज्योतिषसम्राट मुनिराजश्री ऋ षभचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराजश्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. मुनिराजश्री रजतचन्द्रविजयजी म.सा एवं सांध्वी श्री विमलयशाश्रीजी म.सा. सांध्वी श्री अनुभवदृष्टा श्रीजी म.सा. सांध्वी श्री मनीषरसा श्रीजी म.सा. सांध्वीश्री दर्शनरेखाश्रीजी म.सा. आदि का प्रात: नवकारसी के पश्चात् नुतन जिनालय में विधि-विधान पुर्वक प्रभुु पाश्र्वनाथ का जन्म महोत्सव मनाया गया. 56 दिक्कुमारीयो द्वारा शुचिकर्म एवं केलीघर की क्रि या पुर्ण की गई. समस्त मंत्रोचार आचार्यश्री द्वारा उच्चारित किये गए. विधिकारक हेमन्त वेदमुथा नें समस्त पुजा विधान पुर्ण कराये. फि र प्रभु को गाजते-बाजतेे जिनालय सें श्री वाराणसी नगरी के धर्म पांडाल में लाया गया. धर्मसभा-मुनिश्री रजतचन्द्रविजयजी म.सा. धर्मसभा को प्रेरक उद्बोधन देते हुए कहा कि हमे अर्तमन के चंक्षु को खोलकर जागृत बनना है जीवन में जागृत रहने वाला सब कुछ पा जाता है सोया हुआ व्यक्ति सब कुछ खो देता है आत्मा कल्याण के लिए अंर्तमन में आत्मा को जागृत करके हमे भजन-भक्ति प्रिय बनना है हमे भोजनप्रिय बनने की प्रवृति को त्यागना है परोपकार की भावना को रखते हुए भोग प्रवृति का त्याग करते हुए त्याग की प्रवृति को धारण करना है प्रभु महावीर ने कहा है न तेरा है न मेरा है सबकुछ अनेरा है आंखे बंद होने के बाद संसार की मोह माया यहि तक सीमित रह जाऐेगी यह मानव जीवन बार-बार मिलने वाला नही है इसे भव-भव के फेरो सें मुक्त करना है जीवन में आलस्य एवं प्रमादता का त्याग करके पुर्ण जागृत बन जाना है महाराजा अश्वसेन के राज दरबार में माता वामादेवी के शयनकक्ष में प्रभु पाश्र्वनाथ जन्म के पश्चात् 56 दिक्कुमारीयो का सिंहासन कम्पायमान हुआ एवं सभी दिक्कुमारीया क्रमश: मोरपीछी, इत्रदानी, दर्पण, कलश, पंखा, चामर, दीपक, रक्षापोटली लेकर प्रभु के पास शुचीकर्म की क्रिया करके प्रभु की केलीघर की क्रिया सम्पन्न करती है स्थान शुद्धि के पश्चात् इन्द्र सिंहासन कम्पायमान हुआ इन्द्र-इन्द्रिाणी नें प्रभु की शक्रस्थवंदना नमुत्थणं सूत्र के साथ वंदना कर संपुर्ण इन्द्रलोक के 64 इन्द्रो को निमंत्रण भेजकर प्रभु की माता को अवसर्पणी निद्रा में इन्द्र सुलाकर प्रभु को मेरू शिखर ले जाकर 64 इन्द्रो द्वारा 250 अभिषेक किये गये. उक्त कार्यक्रम में प.पू.ज्योतिषसम्राट मुनिराजश्री ऋ षभचन्द्रविजयजी म.सा. ने मंत्रोच्चार विधि पुर्ण की. मंच पर राजेन्द्र करनपुरिया संगीतकार द्वारा 56 दिक्कुमारीयो की प्रस्तुती संगीत के माध्यम सें पुर्ण की. पुजा विधान हेमन्त वेदमुथा के सभी सहयोगी विधिकारको नें पुर्ण कराये. उक्त जन्म कल्याणक महोत्सव इन्द्रलोक में मनाया गया है सोमवार को अश्वसेन राजा के राजदरबार में प्रियवंदा सखी द्वारा जन्म बधाई, प्रभु का नामकरण, पाठशाला गमन आदि कार्यक्रम आयोजित होगे. दोपहर में नूतन जिनालय में 18 अभिषेक महापूजन का भव्य आयोजन किया गया. रात्री में रंगारंग भव्य भक्तिभावना का आयोजन नुतनजिनालय परिसर में आयोजित किया गया.



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