जयपुर/ नई दिल्ली. राजस्थान सरकार के ग्रामीण गैर कृषि विकास अभिकरण (रूडा) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज (फिक्की) के संयुक्त तत्वावधान में नई दिल्ली के भगवान दास रोड़ स्थित आगा खान हॉल में 24 से 28 फरवरी तक आयोजित की गई राजस्थान के दस्तकारों की हस्तशिल्प प्रदर्शनी शिल्पांगन एवं क्राफ्ट बाजार में 45 लाख रू. की बिक्री हुई.

रूडा की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नीलिमा जौहरी ने बताया कि  शिल्पांगन में राजस्थान के 25 उत्कृष्ट हस्तशिल्प दस्तकारों की स्टॉल्स सजाई गई . प्रदर्शनी में मुख्य रूप से टैक्सटाईल उत्पादों का आकर्षण सबसे अधिक रहा. उन्होंने बताया कि नई दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हस्तशिल्प प्रेमी लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और क्राफ्ट बाजार में सजाई गई स्टॉल्स से खरीद फरोख्त की.

सुश्री जौहरी ने बताया कि शिल्पांगन में मुख्य रूप से जयपुर की बगरू एवं सांगानेरी की प्रिंट की हेण्ड ब्लॉक टेक्सटाईल्स आईटम्स की बिक्री सबसे अधिक रही. इसके अलावा जाहोता में कान्थावर्क के दस्तकारों द्वारा बनायी गई साड़ियों, कुर्तियां, सूट, बैडशीट आदि उत्पादों की भी अछी बिक्री हुई. कांच पर सोने की बारीक नक्काशी युक्त प्रतापगढ़ की थेवा कला और जयपुर के दस्तकार बादशाह खान की 50 लाख रू. की लागत से 32 रंगों से निर्मित साड़ी एवं टाई एण्ड डाई के उत्पादों ने भी दर्शकांे को रोमांचित किया. प्रतापगढ़ के लक्ष्मी नारायण सोनी और सुनील सोनी (जयपुर) थेवा आर्ट की खूबसूरत कलाकृत्तियाँ लाये थे.

प्रदर्शनी में सीकर से आये मोहम्मद शकील शेखावाटी बंधेज उत्पादों का प्रदर्शन किया . इसी प्रकार कोटा से आये श्री अजगर अली और महिला बुनकर संस्था, कैथून की श्रीमती बसरीन बानो के कोटा-डोरियाँ साड़ियों की बिक्री हुई. जयपुर के देवेन्द्र बोल्या, मुकेश कुमार, चंद्रकांत छीपा एवं सचिन छीपा ने बगरू-प्रिंट और हैण्ड ब्लॅाक प्रिंट के टैैक्सटाईल्स आईटम्स से प्रदर्शनी को समृद्ध बनाया.

शिल्पांगन में जयपुरी रजाईयां का आकर्षण भी कम नही रहा. जयपुर के खवास जी का रास्ता से आये मोहम्मद युसूफ की कम वजन और गर्म मिजाज की रजाईयों ने दिल्लीवासियों को लुभाया. महिला मडल बाड़मेर की महिलाओं द्वारा प्रदर्शित बाड़मेरी कशीदाकारी ने भी सभी को आकर्षित किया . इसी प्रकार मोहम्मद सलीम के रंग-बिरंगी डिजाईनों वाले टोंक के नमदंे भी काफी बिके. प्रदर्शनी में राजस्थानी ज्वैलरी ने भी दर्शकों को अपनी ओर खींचा. प्रतापगढ़ की थेवा कला के साथ ही जयपुर के कारीगरों द्वारा निर्मित बेशकीमती और अर्द्धकीमती जेवाहरात, मेटल आईटम्स ने भी ग्राहकों को आकर्षित किया. जौहरी बाजार, जयपुर के गिर्राज विजयवर्गीय और मोतीडंूगरी के रवि पांचाल लाख की चूडियों और मोहम्मद दरवेश अपनी बेजोड़ कला के नमूनों के साथ प्रदर्शनी में भाग लेने दिल्ली आये .

जयपुर के चंद्रप्रकाश यादव और मनोज यादव विश्व प्रसिद्ध ब्ल्यू-पोटरी और जालौर के रामचंद्र जीनगर और पारस कपूरजी तथा जयपुर के मालूराम बेनीवाल राजस्थान की जूतियों एवं मोजड़ियों के फैशनेबल आईटम्स के साथ दिल्ली आये .

शिल्पांगन में भीलवाड़ा के फड-पेंटिंग कलाकार विजय जोशी, जयपुर के पुरूषोतम छीपा जाहौता कांथावर्क और नागौर के मकबूल अहमद विश्व प्रसिद्ध मकराना संगमरमर (मार्बल आर्ट) के खूबसूरत आईटम्स के साथ प्रदर्शनी की शोभा बढ़ायी.