पलपल इंडिया ब्यूरो, अशोकनगर. अब गांव में नल जल योजनाओं की जिम्मेदार गांव पंचायत समितियां संभालेंगी. खास बात यह है कि इसके लिए ग्रामीणों की सहमति जरूरी है. यही नही अगर समितियों द्वारा पेयजल प्रदाय सुचारु रूप से किया गया तो ग्रामीणों द्वारा दिए गए अंशदान में 20 प्रतिशत प्रति वर्ष के हिसाब से बढ़ोत्तरी करके राशि वापस कर दी जाएगी. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री ने बताया कि नल जल योजना का प्रस्ताव ग्राम पंचायत की तदर्थ ग्राम स्वास्थ्य समिति और पेयजल उपभोक्ता समिति के माध्यम से ग्राम की सर्व सहमति के आधार पर लेना होगा.

नल जल योजना के संचालन एवं संधारण इन्हीं समितियों से किया जायेगा, जिसकी की लिखित सहमति आवश्यक होगी. नल जल योजना के क्रियान्वयन में ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है. नल जल योजना से घरों में निजी कनेक्शन लेने के लिये कम से कम 75 प्रतिशत परिवारों द्वारा लिखित सहमति देनी होगी. सामान्य परिवारों के बाहुल्य वाले ग्रामों में नल जल योजना की लागत का 3 प्रतिशत अंशदान तथा अनुसूचित जाति, जनजाति बाहुल्य ग्रामों में नल जल योजना की लागत का एक प्रतिशत अंशदान जन सहयोग के रूप में एकत्रित करना होगा. अशंदान के रूप में एकत्रित राशि सावधि जमा के रूप में किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में विभाग द्वारा जमा कराई जाएगी.

जिन समितियों द्वारा नल जल योजना सफलता पूर्वक चलाई जायेगी उन योजनाओं में एकत्रित अंशदान की राशि में से 20 प्रतिशत प्रति वर्ष के मान से प्रोत्साहन राशि के रूप में आने वाले 5 वर्षों में उस समिति को उपलब्ध करा दी जाएगी. पानी का वितरण ग्राम के सभी परिवारों में समान रूप से हो, ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. समूह नल जल प्रदाय योजनाओं में अंशदान की राशि योजना लागत के प्रतिशत के रूप में न ली जाकर सभी परिवारों की वहन क्षमता के आधार पर निर्धारण के अनुसार जमा करनी होगी.