पलपल इंडिया ब्यूरो, मण्डला. साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम का क्रियान्वयन आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले में नियम कानून ताक में रखकर किया जा रहा है. केन्द्र शासन द्वारा जो नियम इस मिशन के क्रियान्वयन के लिये निर्धारित किये गये हैं उसकी धज्जियां जिले व विकासखण्ड के संबंधित अधिकारी खुलेआम उड़ा रहे हैं. निर्धारित नियम कानून से हटकर मिशन का क्रियान्वयन जैसे तैसे किया जा रहा है, जिसके कारण मिशन का मूल काम नहीं हो पा रहा है और इस मूल काम को परिणाम तक पहुंचाने वाले प्रेरक बेवजह परेशान हो रहे हैं. इस तरह की जानकारी जनपद पंचायत नैनपुर की मिली है.

सूत्रों ने बताया है कि इस जनपद पंचायत में साक्षर भारत मिशन का क्रियान्वयन करने में संबंधित अधिकारी मनमानी पर उतारू हो गये हैं. नियम कानून का ख्याल नहीं रखा जा रहा है. सूत्रों ने बताया है कि प्रेरकों को अब स्कूल में हाजिरी देने के लिये दबाव बनाया जा रहा है. प्रेरकों का उपस्थिति पंजी स्कूल में रखने के लिये कहा जा रहा है.

सूत्रों की मानें तो प्रेरक मानदेय न मिलने की वजह से साक्षर भारत मिशन का क्रियान्वयन करने में रूचि नहीं ले रहे हैं. प्रेरकों से कहा गया है कि ग्राम पंचायत या अन्य शासकीय भवन में प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र (कार्यालय) संचालित किया जावे. सूत्रों का कहना है कि जब प्रेरक पंचायत या अन्य भवन में प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र संचालित या कर रहे हैं तो उनकी उपस्थिति पंजी प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र में होना चाहिये. स्कूल में रजिस्टर रखने का आखिर मतलब क्या है.

अधिकांश प्रेरकों ने भी इस संबंध में बताया कि बेहिसाब मनमानी की जा रही है. कई तरह के बिना मतलब के काम कराये जा रहे हैं, जो मूल काम है उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अभी तक जिन्हें साक्षर करना है, उन्हें पढ़ाने के लिये सामग्री की खरीदी नहीं की गई है. यहां तक की साक्षर भारत मिशन की ग्राम पंचायत लोक शिक्षा समिति के खाते में राशि जमा नहीं की गई है.

सूत्रों ने बताया है कि इस संबंध में भी मनमानी की जा रही है. शाला समिति के खाते में राशि जमा करने को कहा जा रहा है, जबकि केन्द्र सरकार ने साक्षर भारत मिशन के लिये ग्राम पंचायत स्तर पर लोक शिक्षा समिति का गठन किया है. इस समिति का खाता बैंक में खोलने का आदेश सरकार द्वारा दिये गये थे, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया है. इसी वजह से शाला प्रबंधन समिति के खाते में राशि जमा की जा रही है.

सूत्रों का कहना है कि लोक शिक्षा समिति का खाता खोलने में आखिर लापरवाही क्यों की गई. संबंधित अधिकारियों के खिलाफ इस संबंध में दण्डात्मक कार्यवाही होना चाहिये. यदि प्रेरक क्यों चूक करते हैं तो उन्हें अधिकारी आंख दिखाते हैं और जब संबंधित अधिकारी ही बड़ी चूक करें तो उनका कान कौन पकड़ेगा यह विषय शोध का हो गया है.

कुल मिलाकर चोरों की बारात में जनवासा कौन ताके, जैसी स्थिति साक्षर भारत मिशन की हो गई है. क्योंकि जिला स्तर के अधिकारी भी मनमानी व गड़बड़ी कर रहे हैं. सिर्फ प्रेरकों को परेशान करने का काम मिशन अंतर्गत किया जा रहा है, जिससे केन्द्र सरकार की मंशा पर पानी फिर रहा है. आदिवासी बाहुल्य यह जिला आज भी निरक्षरता का कलंक नहीं मिटा पाया है. बल्कि दिनों दिन निरक्षरता का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. लाखों रूपये पूर्व में भी साक्षरता के नाम पर फूंके गये और आज भी यही करतूत जिले के संबंधित नौकरशाहों द्वारा की जा रही है. जनता ने नाराजगी जताते हुये तत्काल मिशन का सही क्रियान्वयन करने के लिये सरकार से अपेक्षा जताई है तथा प्रशासनिक लापरवाही पर लगाम लगाने की भी मांग की है. जनता की अपेक्षा है कि मिशन का क्रियान्वयन नियमानुसार ही हो.