पल-पल इंडिया, सीधी. विंध्य का चुनावी समीकरण अभी किसी खास मुकाम पर नही पहुंचता दिखाई पड रहा है. प्रतिदिन विधानसभाओं के लिये टिकट वितरण का समीकरण उत्पन्न होता है फिर संसोधन के दौर में दिखाई देता है. यह स्थिती सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनो की है. निगाहें एक दूसरे पर टिकी हुई है अभी कुछ ही दिनो पहले पार्टी मुख्यालय से कुछ संकेत मिले थे लेकिन उसमें जल्द ही संसोधन कर दिया गया. कयासों का सिलसिला जारी है अपने-अपने अनुभवों से लोग टिकट वितरण की बात कर रहे है. लेकिन वास्तव में अभी कोई फाईनल नतीजे पर नहीं पहुंचा है जिले से चारों विधानसभाओं से दोनों पैनलों के नाम आ तो रहे है लेकिन स्पष्ट कुछ कहा नहीं जा सकता. पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को जो फरमान सुनने को मिलता है वही लोग हवा में उडा देते है. वैसे अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह तक ही पार्टी मुख्यालय से पूर्णत: हरी झंडी मिलने की संभावना है. प्रदेश पार्टी मुख्यालय से आने वाले फरमान का इंतजार इन दिनों हर किसी को है जिले के चारों विधानसभाओं का जो ऐतिहासिक दौर रहा है उसमें अब समीकरणों का इंतजार है. कुछ दिनों पहले सुनने में आया कि सीधी, चुरहट, धौहनी, सिहावल चारों के लिये उम्मीदवारों की घोषणा विपक्ष ने कर दी लेकिन  वह सूची कहा गायब हो गई कानों कान किसी को समझ नही आया यही अफवाह सत्ता पक्ष में देखी गई. विशेषज्ञों की माने तो अभी पार्टी के वरिष्ठ नेता अपना मुहं खोलने के लिये तैयार नही है. लेकिन पक्ष व विपक्ष दोनों एक दूसरे का मुंह ही देख रहे है. अब ऐसे में टिकट वितरण की बात परिस्थती के आधार पर करें तो राजनैतिक अल्पज्ञता हेागी. जिले की बात करे तो पक्ष व विपक्ष दोनों के पास चहेते व प्रखंड नेतृत्ववान चेहरे की कमी है ही अब दो तीन प्रखर चेहरे है चाहे उनका उपयोग विधानसभा करें या लोकसभा में वे तो तीर एक ही है अब निशाना दो है. अब ऐसे में हर तरह से सोचना तो पडेगा ही पार्टी हाईकमान की बात करें तो वजन व बजूद के बाद परिस्थितियों पर गौर करना चाहते है यदि ऐसा हुआ तो टिकट चारों विधानसभाओं का अंतिम माना जायेगा जब प्रत्यासी अपना नामाकंन प्रस्तुत कर दे. अफवाहें तरह -तरह की उड रही है और इन्ही अफवाहों को मीडिया द्वारा तरासा भी जा रहा है पिछले दो तीन, दिनों में सत्ता पक्ष व विपक्ष में प्रदेश स्तरीय बैठक के दौरान कुछ फैसले लिये गये है वही बीच -बीच में लीक हो रहे है उसी के आधार पर लोग समीकरणो की भविष्यवाणी कर रहे है.

भटकना ही जिंदगी है

चाहे भाजपा हो य कांग्रेस दोनो पार्टी में चारो विधानसभाओं की स्थिती भटकाव की ही है. विपक्ष के लिये चुरहट विधानसभा छोड दे तो और सब के लिये यह नही समझ पा रहे लोग की आखिर टिकट किसको मिलेगा दिग्गज नेताओं तक को विश्वास नही है. यही कारण है कि जनसम्पर्क  के दिनों में नेताजी भोपाल प्रवास पर है.  कब कैसी स्थिती निर्मित हो जाय कुछ कहा नही जा सकता. भटकाव जो दौर इन दिनों जो चल रहा है उसमें सत्ता पक्ष भी परेशान है. मौजूदा विधायक भी अफवाहों के अनुसार टिकट की दौड से बाहर है. अब ऐसे में आखिर अफवाहों के जन्मदाता किसको टिकट दिलाना चाहते है यह पता नही. पार्टी में भी इन दिनों गुटवाजी जोर पकड रही है जब  ऐसी स्थिती हो तो परेशानी का सामना तो लोगों को अवश्य करना पडेगा भले ही कितने मजबूत व महतवपूर्ण क्यों न हो. तरह-तरह की अफवाहें जो सुनने को मिल रही है उसमें तो कभी किसी का टिकट कटता है तो कभी किसी को मिलता है.

खेमे में नेतृत्व

भाजपा हो या कांग्रेस दोनो पार्टियों में गुटवाजी साफ तौर से दिखाई दे रही है. विपक्ष में भले ही इन दिनों एकजुटता दिखाई दे रही है लकिन इस बात को नजरअंदाज नही किया जा सकता की पार्टी आतंरिक कलह से जूझ रही और पूरा अमला दो खेमे में बटा है. फिलहाल दोनों संबल और समर्थवान है इसलिये कभी-कभी छोटे से बडे कार्यक्रमों में निचले क्रम के कार्यकर्ता व पदाधिकारी चक्कर में आ जाते है कि वह किस खेमे में खडे हो और लोगों की निगाहें तो टिकी रहती है. भले पार्टी मुख्यालय से एकजुट रहने के फरमान जारी होते रहे हों लेकिन बहुत फर्क उन पर नहीं पडता. सत्ता पक्ष भी गुटवाजी के मायने पर तो कम नहीं है तो रूये-रूये अलग है. अब ऐसे गुटवाजी साफ झलकती है. महापुरूषों के अध्यात्मवाद पर चलने वाली पार्टी नेतृत्व कर्ताओं के कुंठित मरनसिकता की शिकार है. खेमों में बटा दल कमजोर होता है यह तथ्य प्राचीनतम राजनैतिक विद आचार्य चाणक्य ने कहा था. तो सत्ता पक्ष भी एक दूसरे के टांग खीचन से परहेज नहीं करता. ऐसे में चुनावी दौर में बगावत के बिगुल बजने के आसार रहते है.

बगावत की आंधी

सत्ता पक्ष व विपक्ष ने बगावत का दौर बहुत पुराना नहीं है अभी हाल ही में शुरू हुआ अविश्वास प्रस्ताव से पहले ही उपनेता म.प्र.विधानसभा चौधरी राकेश सिह ने कांग्रेस छोड भाजपा का दामन थाम लिया और तो और उन्होंने पार्टी पर आरोप प्रत्यारोप लगाये रही सही कसर जिले के लिये यह रही की कांग्रेस पार्टी के सक्रिय पदाधिकारी रहे कृष्णकुमार सिंह भंवर ने कांग्रेस का दामन छोड भाजपा में दस्तक दी और भाजपा कार्यालय में मीडिया के सामने यह तक कह दिया कि हम चुनाव नहीं लडेगें हम अजय सिंह राहुल के खिलाफ चुनाव प्रचार करेगें यह बाते जनता के बीच चिंतन की है. लेकिन बगावत का जो सुर विघानसाभा से लेकर जिले की विधानसभाओं में नजर आया. इसी  बगावत को रोकने पार्टी द्वारा प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नही की जा रही है ओर आगामी समय में सन्तुलन के बाद ही प्रत्याशियों के नाम की घोषणा हो पाना संभव है.