• दूसरे विधानसभा के नेताओं को टिकट मिलने की है चर्चाएं
  • दोनों पार्टी के नेताओं में शुरू हो गया विरोध का स्वर.

पल-पल इंडिया, सीधी. विधानसभा चुनाव में इस बार टिकट वितरण को लेकर अभी से नेताओं में विरोध मुखर होने लगे है. जिले के सीधी विधानसभा सीट में लगता है कि भाजपा एवं कांगे्रस के पास नेता नही है जिस वजह से दूसरे विधानसभा क्षेत्र के नेताओं को टिकट देने की अफवाहें उड़ रही है. यदि ऐसा हुआ तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. फिलहाल जिस तरह टिकट विरण को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है उससे यह लगता है कि इस बार सीधी विधानसभा सीट में दूसरे विधानसभा प्रत्याशी को ही मैदान में उतारा जा सकता हे ऐसे में कई नेता बगावत कर सकते है.

यह ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां कि पहले 32 वर्षों तक पूर्व मंत्री इन्द्रजीत कुमार का गढ़ बना हुआ था उस दौरान कांगे्रस से दूसरे प्रत्याशी को टिकट मिलने का सवाल ही नहीं उठता था वहीं भाजपा से भी जिसे टिकट मिला कांग्रेस की लहर के कारण सफलता अर्जित नहीं हो सकी थी परिसीमन के बाद नवगठित सिहावल विधानसभा क्षेत्र से नेताओं को उम्मीद जगी कि इस विधानसभा चुनाव में जहीं कांग्रेस ने चूक करते हुए पूर्व विधायक कृष्ण कुमार सिंह भंवर को टिकट दिया था. जिसके विरोध में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ब्रजेन्द्रनाथ सिंह मिस्टर चुनाव मैदान में आकर कांग्रेस पार्टी को सबक सिखाने तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा वहीं प्रत्याशी अब विधानसभा चुनाव मैदान में उतरने की मंशा जता रहे थे जिनमें कि पूर्व मंत्री कमलेश्वर द्विवेदी सहित चौहान वर्ग के नेता भी टिकट मिलने का सपना संजोए हुए थे. लेकिन हाल में ही जिस तरह एक नाम मिलने की संभावना जताई जा रही है उससे कांग्रेस पार्टी में भी विरोध का स्वर शुरू हो गया है. सिहावल विधानसभा क्षेत्र में यह माना जा रहा है कि कांग्रेस पूर्व मंत्री इन्द्रजीत कुमार को टिकट लगभग देना तय मान रही है. लेकिन उनके बेटे प्रदेश कांग्रेस महासचिव कमलेश्वर पटेल को सीधी विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिलने की खबर आग की तरह फैलने लगी है जैसे ही समाचार पत्रों में सीधी विधानसभा क्षेत्र से कमलेश्वर पटेल को टिकट मिलने की जानकारी हुई तमाम विरोध का स्वर सुनने को मिल रहा है यहां तक कि कांग्रेस के कई नेता बगावत होने की बात भी करना शुरू कर दिए है हालांकि अभी यह तय नहीं माना जा रहा है कि टिकट किसे मिलेगा लेकिन यदि ऐसा हुआ तो यही माना जा सकता है कि कांग्रेस में सीधी विधानसभा क्षेत्र से प्रभावी नेताओं की कमी मानकर पार्टी के शीर्ष नेताओं द्वारा दूसरे विधानसभा क्षेत्र से यहां उम्मीदवार बनाए जाने की मंशा जताई जा रही है. फिर भी यह कयास लगाए जा रहे है कि अभी टिकट वितरण की फाइनल सूची तैयार नहीं हुई है ऐसे में फेरबदल हो सकता है लेकिन जो नाम समाचार पत्रों में आया है उससे पार्टी के नेताओं मे विरोध की लहर देखने को मिल रहा है. इसी तरह भाजपा में भी कुछ दिनों से यह चर्चाए सुनने को मिल रही हे कि चुरहट क्षेत्र से विंविप्रा अजय प्रताप सिंह को सीधी विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया जाएगा इस बात की जानकारी होने के बाद यहां से भी भाजपा नेताओं एवं कार्यकताओं में असंतुष्ट देखी जा रही है हांलाकि कल मंगलवार को एक चैनल एवं समाचार पत्रों में सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ल का नाम टिकट वितरण में जोरों से उठा है. लेकिन संबंधित चैनल में कुछ देर बाद इस टिकट वितरण की खबर को तोड़ मरोडकर पेश किया गया. ऐसे में यह माना जा रहा है कि सीधी विधायक को भी टिकट मिलना मुश्किल है. जिस वजह से यह लग रहा है कि चुरहट विधानसभा क्षेत्र के नेता को ही यहां से टिकट मिल सकता है. यदि ऐसा हुआ तो यही माना जा सकता है कि पार्टी के शीर्ष नेताओं एवं संगठन के नजरिए से सीधी विधानसभा क्षेत्र में योग्य नेता भाजपा में नही है जिस वजह से दूसरे विधानसभा क्षेत्र के नेताओं को टिकट देने की मुहिम चल रही है कुल मिलाकर दोनों पार्टी के नेताओं द्वारा टिकट वितरण को लेकर जो रणनीति बनाई जा रही है यदि दूसरे विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं को टिकट दिया गया तो पार्टी के कई नेता बगावत हो सकते है.

सपा को भी है इंतजार

जिले के सीधी विधानसभा सीट पर अभी तक समाजवादी पार्टी द्वारा प्रत्याशी की घोषणा नहीँ की गई है. उसके पीछे कारण यह माना जा रहा है कि सपा में इस विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा नेता चुनाव मैदान में आ सकता है जो भाजपा एवं कांग्रेस के लिए मुश्किले पैदा कर देगा. हालांकि अभी तक सपा में शामिल होकर चुनाव लडऩे की मंशा जताने वाले संबंधित समाजसेवी को भाजपा के टिकट वितरण का इंतजार है यदि सीधी विधानसभा  क्षेत्र से विधायक केदारनाथ शुक्ल अथवा जनपद पंचायत सीधी के अध्यक्ष एवं युवा नेता आशीष सिंह दीनू को टिकट नही मिलता है तो सपा में आकर पर्दे के पीछे रहने वाले समाजसेवी चुनाव लड़ सकते हे उन्हें उम्मीद है कि इन दिनों नेताओं का प्रभाव क्षेत्र में ज्यादा होने के कारण यदि दो में से किसी एक को टिकट मिलता है तो सपा से चुनाव लड़कर विजय हासिल करना टेढ़ी खीर होगा. यदि दो में से किसी को भाजपा टिकट नहीं देती है तो नया चेहरा सपा से चुनाव मैदान में आकर भाजपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ा सकता है.